कैप्टन अमरिंदर सिंह बोले- BJP में पंजाब पर मेरी सलाह नहीं ली जाती, कांग्रेस में वापसी पर भी दिया जवाब
रिपोर्टर: ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता पंजाब
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में करीब छह दशक का अनुभव रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि पंजाब से जुड़े राजनीतिक मामलों में उनकी राय नहीं ली जाती, जबकि उन्होंने राज्य की राजनीति में करीब 60 साल बिताए हैं। हालांकि, अमरिंदर सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी राय रखना BJP छोड़ने या कांग्रेस में वापस जाने का संकेत नहीं है।
पंजाब पर सलाह नहीं लिए जाने की बात
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी के जीवन पर आधारित पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत की। उनसे पंजाब की राजनीति और BJP में उनकी भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया था।
अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने पंजाब की राजनीति में लगभग 60 साल बिताए हैं और इस दौरान राज्य में कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनका कहना था कि उनके साथ काम कर चुके कई लोगों के पास भी पंजाब का लंबा राजनीतिक अनुभव है, लेकिन पार्टी में उनसे सलाह नहीं ली गई।
उन्होंने कहा कि पंजाब से संबंधित अपने विचार और भावनाएं पार्टी नेतृत्व के सामने रखना उनका कर्तव्य है। उनके मुताबिक, अपनी राय व्यक्त करने का मतलब यह नहीं है कि वह पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
BJP छोड़ने और कांग्रेस में लौटने पर क्या बोले?
अमरिंदर सिंह से जब पूछा गया कि क्या BJP में अपनी भूमिका को लेकर असंतोष के कारण वह कांग्रेस में वापस लौट सकते हैं, तो उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक सफर का उदाहरण दिया।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद वह कांग्रेस से अलग होकर अकाली दल में गए थे और बाद में कांग्रेस में वापस लौटे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में बदलाव होते रहते हैं, लेकिन उनके वर्तमान बयान को BJP छोड़ने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह नहीं कहा है कि वह BJP या कांग्रेस में अब प्रासंगिक नहीं हैं। उनका कहना था कि वह केवल पंजाब को लेकर अपनी राय पार्टी के सामने रख रहे हैं।
2022 में BJP में हुआ था विलय
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2021 में कांग्रेस छोड़ने के बाद अपनी राजनीतिक पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाई थी। इसके बाद 2022 में उनकी पार्टी का BJP में विलय हो गया था। तब से वह BJP से जुड़े हुए हैं।
अब पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले उनके ताजा बयान पर चर्चा हो रही है। अमरिंदर सिंह ने BJP की पंजाब रणनीति को लेकर अपनी राय रखने की बात कही है। उन्होंने विशेष रूप से पंजाब के राजनीतिक हालात और पार्टी की रणनीति पर अनुभवी नेताओं की राय लिए जाने की जरूरत पर जोर दिया है।
अकाली दल के साथ गठबंधन पर भी राय
अमरिंदर सिंह पंजाब में BJP की चुनावी रणनीति को लेकर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन की वकालत करते रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका मानना है कि पंजाब में BJP को अपनी रणनीति बनाते समय गठबंधन के विकल्प पर विचार करना चाहिए।
हालांकि, यह अमरिंदर सिंह की व्यक्तिगत राजनीतिक राय है और इसे BJP की आधिकारिक रणनीति के रूप में नहीं माना जा सकता। BJP की ओर से इस बयान के संदर्भ में पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया अलग विषय है।
उम्र को लेकर भी बोले अमरिंदर
84 वर्षीय अमरिंदर सिंह से उनकी उम्र और भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने उम्र को राजनीतिक सक्रियता की सीमा मानने से इनकार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का उदाहरण दिया।
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद थे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अमरिंदर सिंह को दोबारा पंजाब का मुख्यमंत्री बनते देखने की इच्छा व्यक्त की। हालांकि यह फारूक अब्दुल्ला की व्यक्तिगत टिप्पणी थी, इसे किसी राजनीतिक दल की आधिकारिक घोषणा के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बयान के बाद पंजाब की सियासत में चर्चा
अमरिंदर सिंह के बयान ऐसे समय आए हैं जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बना रहे हैं। उनके BJP में बने रहने और पंजाब से जुड़े मामलों में अपनी राय खुलकर रखने के बयान ने उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
फिलहाल अमरिंदर सिंह ने BJP छोड़ने या कांग्रेस में वापसी की घोषणा नहीं की है। उनका सार्वजनिक रुख यह है कि पंजाब को लेकर अपनी राय BJP नेतृत्व तक पहुंचाना उनका राजनीतिक दायित्व है।
निष्कर्ष: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने BJP में पंजाब से जुड़े मामलों पर सलाह नहीं लिए जाने पर अपनी बात रखी है, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया है कि उनकी टिप्पणी को पार्टी छोड़ने या कांग्रेस में वापसी के ऐलान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।