प्रयागराज में पितृ पक्ष की शुरुआत, संगम पर पिंडदान के लिए जुटे श्रद्धालु; घर बैठे ऑनलाइन तर्पण की भी सुविधा
रिपोर्टर: ध्रुव सिंह, मुख्य संवाददाता
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
प्रयागराज। पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से हो गई है। इसके साथ ही प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। गंगा, यमुना और धार्मिक मान्यता में अदृश्य सरस्वती के संगम को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों में रहने वाले लोग भी इस दौरान अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कराने प्रयागराज पहुंचते हैं।
26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक पितृ पक्ष
प्रयाग धर्मसंघ के अनुसार इस वर्ष पितृ पक्ष से जुड़े श्राद्ध कर्म 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेंगे। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 सितंबर को प्रतिपदा, 28 सितंबर को द्वितीया और 29 सितंबर को तृतीया के साथ महाभरणी श्राद्ध होगा।
30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध एक ही दिन बताया गया है। 1 अक्टूबर को षष्ठी, 2 अक्टूबर को सप्तमी, 3 अक्टूबर को अष्टमी और 4 अक्टूबर को नवमी का श्राद्ध होगा। 5 अक्टूबर को दशमी, 6 अक्टूबर को एकादशी, 7 अक्टूबर को द्वादशी/महाश्राद्ध, 8 अक्टूबर को त्रयोदशी, 9 अक्टूबर को चतुर्दशी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन होगा।
संगम पर पिंडदान का क्यों है महत्व?
हिंदू धार्मिक परंपरा में प्रयागराज को तीर्थराज यानी तीर्थों का राजा कहा जाता है। यहां गंगा और यमुना के साथ सरस्वती के संगम की धार्मिक मान्यता है। पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु संगम में स्नान के बाद अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का समय है। लोग अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करते हैं और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। पिंडदान और तर्पण के जरिए पूर्वजों की शांति और परिवार के कल्याण की कामना की जाती है।
देश-विदेश से प्रयागराज पहुंचते हैं श्रद्धालु
पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक, कई परिवार पीढ़ियों से प्रयागराज आकर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण कराते रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार इस बार भी दूसरे राज्यों के साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं के प्रयागराज आने की तैयारी है। हालांकि नौकरी, दूरी, समय की कमी और दूसरी परिस्थितियों के कारण हर व्यक्ति के लिए संगम तक पहुंचना संभव नहीं होता। ऐसे लोगों के लिए तीर्थ पुरोहितों ने ऑनलाइन माध्यम से अनुष्ठान कराने की व्यवस्था शुरू की है।
अब ऑनलाइन भी हो सकेगा पिंडदान
प्रयागराज के कुछ तीर्थ पुरोहितों ने ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पिंडदान और तर्पण की व्यवस्था की है, जो खुद संगम नहीं पहुंच सकते। इसके तहत श्रद्धालु वीडियो कॉल या दूसरे डिजिटल माध्यम से अनुष्ठान में शामिल हो सकते हैं।
व्यवस्था के मुताबिक पुरोहित संगम क्षेत्र में मौजूद रहकर धार्मिक प्रक्रिया करते हैं, जबकि श्रद्धालु अपने घर या विदेश से वीडियो कॉल के जरिए उससे जुड़ते हैं। पुरोहित श्रद्धालु का नाम और गोत्र लेकर तर्पण तथा पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करते हैं।
कुछ मामलों में श्रद्धालुओं को अपने स्थान पर पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की जानकारी भी दी जाती है। ऑनलाइन व्यवस्था में धार्मिक अनुष्ठान का संचालन संबंधित तीर्थ पुरोहित करते हैं। हालांकि, ऑनलाइन पिंडदान की स्वीकार्यता और विधि को लेकर अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं में मतभेद हो सकते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने परिवार की परंपरा और संबंधित पुरोहित से विधि की जानकारी लेकर ही अनुष्ठान करना चाहिए।
अमेरिका में बैठे श्रद्धालु भी जुड़ेंगे
तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल देश के बाहर रहने वाले लोग भी कर रहे हैं। एक रिपोर्ट में अमेरिका में रहने वाले श्रद्धालु के 28 सितंबर को ऑनलाइन माध्यम से प्रयागराज संगम पर पिंडदान कराने की जानकारी दी गई है।
इस व्यवस्था में श्रद्धालु अपने स्थान से पूजा प्रक्रिया में शामिल होते हैं और संगम पर मौजूद पुरोहित उनके पूर्वजों के नाम और गोत्र के आधार पर धार्मिक कर्मकांड करते हैं। इससे उन लोगों को धार्मिक परंपरा से जुड़ने का विकल्प मिलता है जो किसी कारण से प्रयागराज की यात्रा नहीं कर सकते।
‘पितृ पैकेज’ की भी व्यवस्था
कुछ तीर्थ पुरोहितों ने प्रयागराज के साथ काशी और गया में धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था को जोड़ते हुए ‘पितृ पैकेज’ की शुरुआत की है। इसमें पुरोहित, यात्रा, ठहरने और भोजन जैसी व्यवस्थाएं शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ऑनलाइन व्यवस्था के तहत श्रद्धालु वीडियो कॉल के जरिए संगम पर होने वाले पिंडदान में शामिल हो सकते हैं। आयोजकों के अनुसार इस सुविधा का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो काम या अन्य व्यस्तताओं के कारण प्रयागराज नहीं आ पाते।
पितृ पक्ष में संगम पर बढ़ेगी भीड़
पितृ पक्ष शुरू होने के साथ प्रयागराज के संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। लोग अपनी निर्धारित तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचेंगे।
कई परिवारों के लिए यह अवधि केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने की पारिवारिक परंपरा भी है। संगम पर आने वाले श्रद्धालु स्नान के बाद अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
घर बैठे अनुष्ठान से जुड़ने का विकल्प
प्रयागराज में ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था धार्मिक परंपरा और डिजिटल तकनीक के मेल का उदाहरण है। जो श्रद्धालु संगम नहीं पहुंच सकते, वे पुरोहित से संपर्क कर निर्धारित समय पर वीडियो कॉल के माध्यम से अनुष्ठान में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, इसे सभी धार्मिक परंपराओं में समान रूप से मान्य मानना उचित नहीं होगा। ऑनलाइन पिंडदान की विधि अपनाने से पहले परिवार की परंपरा, संबंधित तीर्थ पुरोहित और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जानकारी लेना बेहतर माना जाता है।
इस तरह 26 सितंबर से शुरू हुए पितृ पक्ष में एक ओर प्रयागराज के संगम पर देशभर से श्रद्धालु पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक कर्मकांड कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दूर-दराज और विदेशों में रहने वाले लोगों के लिए ऑनलाइन माध्यम से प्रयागराज के अनुष्ठानों से जुड़ने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है।