स्काईस्ट्राइकर लोइटिरिंग म्यूनिशन ने युद्ध अभ्यास 2026 में किया सटीक हमला
रिपोर्टर: दीप सिंह, लखनऊ मुख्य संवाददाता
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका की सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 में आधुनिक ड्रोन और स्वायत्त हथियार प्रणालियों की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में स्काईस्ट्राइकर लोइटिरिंग म्यूनिशन ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक हमला कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। भारतीय सेना के अनुसार, इस प्रदर्शन में सिस्टम ने लक्ष्य का पता लगाया, उसे एंगेज किया और निर्धारित स्थान पर सटीक प्रहार किया।
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ प्रदर्शन
युद्ध अभ्यास 2026 भारत और अमेरिका के बीच होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है। इसका 22वां संस्करण 15 सितंबर से उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास में दोनों देशों के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।
अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभियानों की क्षमता बढ़ाना, एक-दूसरे की रणनीति और प्रक्रियाओं को समझना तथा अलग-अलग परिस्थितियों में मिलकर सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता को मजबूत करना है।
क्या है स्काईस्ट्राइकर लोइटिरिंग म्यूनिशन?
लोइटिरिंग म्यूनिशन ऐसे मानवरहित सिस्टम होते हैं जो किसी इलाके में लक्ष्य की तलाश करते हुए कुछ समय तक हवा में मंडरा सकते हैं और लक्ष्य की पहचान होने के बाद उस पर हमला कर सकते हैं।
स्काईस्ट्राइकर का प्रदर्शन ऐसे ही ड्रोन आधारित युद्धक्षेत्र में सटीक हमले की क्षमता को दर्शाता है। महाजन रेंज में हुए प्रदर्शन के दौरान इसे निर्धारित लक्ष्य की ओर भेजा गया और सिस्टम ने लक्ष्य को पहचानकर उस पर प्रहार किया। भारतीय सेना द्वारा जारी वीडियो में इसकी कार्रवाई को दिखाया गया है।
ड्रोन और स्वायत्त सिस्टम पर बढ़ा जोर
युद्ध अभ्यास 2026 में ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों को विशेष महत्व दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास के दौरान निगरानी और टोही के लिए ड्रोन तथा ऑटोनॉमस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, लक्ष्य पहचान और विभिन्न प्रकार के अभियानों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में युद्ध अभ्यास के दौरान इन प्रणालियों को शामिल करना दोनों सेनाओं के लिए प्रशिक्षण और संचालन संबंधी अनुभव साझा करने का अवसर देता है।
भारत-अमेरिका ने दिखाई संयुक्त फायरपावर
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका की सेनाओं ने संयुक्त फायरिंग प्रदर्शन भी किया। इसमें भारतीय सेना की ओर से पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर और धनुष आर्टिलरी सिस्टम शामिल रहे। इसके अलावा AH-64E अपाचे हेलिकॉप्टर, L70 एयर डिफेंस गन और स्वाति वेपन-लोकेटिंग रडार का भी प्रदर्शन किया गया।
अमेरिकी सेना की ओर से HIMARS और M-LIDS जैसी प्रणालियों को भी संयुक्त प्रशिक्षण में शामिल किया गया। इससे तोपखाने, रॉकेट, हेलिकॉप्टर, एयर डिफेंस और निगरानी प्रणालियों के बीच तालमेल का अभ्यास किया गया।
तोपखाने के साथ संयुक्त प्रशिक्षण
22 सितंबर को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने M777 हॉवित्जर के साथ संयुक्त लाइव-फायर प्रशिक्षण भी किया। अमेरिकी सेना के अनुसार, दोनों देशों के सैनिकों ने एकीकृत क्रू के रूप में काम किया और संयुक्त फायरिंग मिशन को अंजाम दिया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रक्रियाओं की समझ, आपसी समन्वय और संयुक्त अभियानों की क्षमता बढ़ाना था।
इस तरह युद्ध अभ्यास में केवल अलग-अलग हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उन्हें एक साथ इस्तेमाल करने की प्रक्रियाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
मल्टी-डोमेन युद्ध की तैयारी
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, युद्ध अभ्यास 2026 में दोनों सेनाएं अलग-अलग भौगोलिक और परिचालन परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई की क्षमता को मजबूत कर रही हैं। अभ्यास में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स, पैदल सेना आधारित अभियान और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया गया है।
स्काईस्ट्राइकर का प्रदर्शन इसी तकनीकी बदलाव का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक हथियार प्रणालियों के साथ मानवरहित और स्वायत्त सिस्टम को भी सैन्य अभियानों में शामिल किया जा रहा है।
भारत की रक्षा तकनीक पर फोकस
स्काईस्ट्राइकर के प्रदर्शन ने युद्ध अभ्यास के दौरान स्वदेशी रक्षा तकनीक और मानवरहित प्रणालियों की भूमिका को भी सामने रखा। भारतीय सेना के अनुसार, महाजन रेंज में हुए प्रदर्शन ने सटीक प्रभाव, स्वदेशी तकनीक और अनमैन्ड सिस्टम की उपयोगिता को प्रदर्शित किया।
युद्ध अभ्यास 2026 में भारत और अमेरिका की सेनाएं अपनी-अपनी तकनीक, रणनीति और परिचालन प्रक्रियाओं का अनुभव साझा कर रही हैं। इस तरह के संयुक्त अभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी साथ मिलकर अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।