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Supreme Court Political Protest Ban: कोर्ट परिसरों में प्रदर्शन पर रोक की मांग

By aonenewstv | Published: Oct 14, 2026 12:38 PM

सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन पर रोक की मांग, राहुल गांधी को दस्तक संगठन ने लिखा खुला पत्र

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया है। अदालत परिसरों में राजनीतिक जुलूस, धरना, नारेबाजी और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर 15 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होनी है। इसी बीच डॉ. आंबेडकर सोसायटी फॉर थॉट्स, एक्शंस एंड कॉन्शसनेस यानी दस्तक संगठन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को खुला पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए विरोध मार्च पर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के मार्च पर उठाए सवाल

दस्तक संगठन ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में आरोप लगाया कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता निर्वाचन आयोग तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। संगठन का कहना है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों के अदालत परिसर में पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था और न्यायालय की गरिमा को लेकर सवाल खड़े हुए।

संगठन ने राहुल गांधी से इस मामले पर जवाब देने और अदालत परिसर में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। ये आरोप संगठन की ओर से लगाए गए हैं; इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।

कोर्ट परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग

सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट परिसरों में राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक जुलूस, धरना, नारेबाजी, झंडे-बैनर दिखाने और राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि न्यायालय परिसर में सुरक्षा, न्यायिक कामकाज और अदालत की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि न्यायिक कार्य में बाधा डालने वाली गतिविधियों के लिए जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

इस याचिका को वरिष्ठ अधिवक्ता और बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 15 अक्टूबर को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ सुनने पर सहमति जताई।

SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे विपक्षी नेता

12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्ष के कई नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और नाम हटाए जाने की आशंकाओं पर सवाल उठाए हैं।

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने या उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं ने अदालत में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया अपनाई।

इसी घटनाक्रम के बाद अदालत परिसर में भीड़ जुटने और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद कोर्ट परिसरों में राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका चर्चा में आई।

याचिका में कई बड़े नेताओं के नाम

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई नेताओं को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित घटनाओं की जांच और अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि किसी गतिविधि से न्यायिक कामकाज बाधित हुआ हो, तो उसकी कानूनी जांच की जाए। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोप अपने आप में किसी नेता की कानूनी जिम्मेदारी साबित नहीं करते। इस पर फैसला सुनवाई के बाद अदालत करेगी।

15 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर

सुप्रीम कोर्ट में 15 अक्टूबर को राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका और दिल्ली में 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े अन्य मामलों पर सुनवाई प्रस्तावित है। इन मामलों में मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, रेल सेवाओं में व्यवधान और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित मुद्दे भी शामिल हैं।

अदालत की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि न्यायालय परिसर में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर किस तरह के नियम या दिशा-निर्देश आवश्यक हैं। फिलहाल, दस्तक संगठन के खुले पत्र और जनहित याचिका ने अदालत परिसर में राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों की सीमा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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