शेख हसीना ने तारिक रहमान पर साधा निशाना, BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल न होने को बताया निराशाजनक
नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग प्रमुख शेख हसीना ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने के फैसले की आलोचना की है। एक हालिया इंटरव्यू में हसीना ने इस फैसले को अपरिपक्व बताते हुए कहा कि इससे बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों और आर्थिक विकास के अवसरों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति व्यक्तिगत प्रतिक्रियाओं या अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बजाय देश के दीर्घकालिक हितों पर आधारित होनी चाहिए।
‘ब्रिक्स में हिस्सा न लेना निराशाजनक’
शेख हसीना ने कहा कि ब्रिक्स केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं है, बल्कि यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, तकनीक और विकास के क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
उनके मुताबिक, बांग्लादेश के इस सम्मेलन में शामिल होने से देश को आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नए अवसर मिल सकते थे। उन्होंने अफसोस जताया कि सम्मेलन से दूर रहने के कारण बांग्लादेश इन संभावनाओं का लाभ नहीं उठा सका।
हसीना ने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार का काम देश के लिए नए अवसर पैदा करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के रास्ते खोलना है, न कि उन्हें बंद करना।
भारत में हसीना की मौजूदगी को लेकर उठाए सवाल
शेख हसीना ने सवाल उठाया कि अगर भारत में उनकी मौजूदगी तारिक रहमान के दौरे में बाधा बनी, तो इसके पीछे क्या कारण था। उन्होंने अपने पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान 1979 में भारत आए थे, तब वह भी दिल्ली में रह रही थीं। इसके बावजूद जियाउर रहमान की यात्रा नहीं रुकी थी।
हसीना ने इसी उदाहरण के आधार पर पूछा कि उनकी मौजूदगी तारिक रहमान के भारत आने में बाधा क्यों बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि दो देशों के संबंध किसी एक व्यक्ति से जुड़ी राजनीतिक संवेदनशीलताओं के आधार पर तय नहीं होने चाहिए।
BRICS में शामिल होने से बांग्लादेश को क्या फायदा हो सकता था?
शेख हसीना के अनुसार, ब्रिक्स जैसे मंच पर भागीदारी बांग्लादेश को प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संवाद और सहयोग का अवसर दे सकती थी। इससे व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा संभव थी।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को ऐसी विदेश नीति अपनानी चाहिए, जो भारत के साथ संबंध बनाए रखने के साथ-साथ चीन, रूस, जापान, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी सहयोग बढ़ाए।
हसीना ने इस बात पर जोर दिया कि एक देश के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने का अर्थ दूसरे देश के साथ दूरी बनाना नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, बांग्लादेश की विदेश नीति का केंद्र राष्ट्रीय हित और आर्थिक विकास होना चाहिए।
तारिक रहमान ने क्यों नहीं लिया सम्मेलन में हिस्सा?
भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तारिक रहमान को सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। यह निमंत्रण बिम्सटेक के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका से भी जुड़ा था।
हालांकि, बांग्लादेश की ओर से निमंत्रण को लेकर यह सवाल उठाया गया था कि इसे देश के प्रधानमंत्री के तौर पर दिया गया था या बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में। बांग्लादेशी पक्ष ने यह भी संकेत दिया था कि भारत की यात्रा से पहले द्विपक्षीय दौरे और उसके लिए उपयुक्त परिस्थितियों को महत्व दिया जाना चाहिए।
तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने के पीछे भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव और शेख हसीना की भारत में मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विवाद भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि, इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह और विभिन्न पक्षों की व्याख्याओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का मुद्दा
अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और वह भारत आ गई थीं। इसके बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।
बांग्लादेश सरकार शेख हसीना की वापसी की मांग करती रही है, जबकि भारत की ओर से इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जा रहा है। हसीना की भारत में मौजूदगी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चा का अहम विषय बनी हुई है।
शेख हसीना ने अपने हालिया इंटरव्यू में कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ अपने संबंधों को केवल राजनीतिक विवादों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक, पड़ोसी देशों के बीच संवाद और सहयोग दोनों के हित में हैं।
संतुलित विदेश नीति पर दिया जोर
शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश को ऐसी परिपक्व और संतुलित विदेश नीति की जरूरत है, जो देश की आर्थिक जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय भूमिका को ध्यान में रखे। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यक्तिगत राजनीतिक मतभेदों के कारण महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों से दूरी बनाना देश के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश की गैरमौजूदगी को लेकर हसीना की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को लेकर बहस जारी है। उनके बयान ने तारिक रहमान सरकार की विदेश नीति और भारत के साथ रिश्तों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।