मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड: सौरभ राजपूत केस की जांच करने वाले दो युवा IPS अधिकारी क्यों आए चर्चा में?
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। पति की हत्या, शव के टुकड़े करना और उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया था। इस मामले की जांच के दौरान दो युवा आईपीएस अधिकारी आयुष विक्रम सिंह और अंतरिक्ष जैन भी चर्चा में आए। पुलिस की जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा। 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की अदालत ने दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
कौन हैं IPS अधिकारी आयुष विक्रम सिंह?
आयुष विक्रम सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 29 अक्टूबर 1992 को हुआ था और वे मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले बताए जाते हैं।
सौरभ राजपूत हत्याकांड की जांच के दौरान उनकी भूमिका को लेकर चर्चा हुई। इस तरह के गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी घटनास्थल की जांच, साक्ष्यों का संकलन, गवाहों के बयान और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने की होती है।
अंतरिक्ष जैन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े तथ्य बताए
इस मामले में दूसरे युवा आईपीएस अधिकारी अंतरिक्ष जैन भी चर्चा में रहे। उन्होंने जांच से जुड़े तथ्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा।
हत्या के मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच का अहम हिस्सा होती है। इससे मृत्यु के कारण, चोटों की प्रकृति और घटना से जुड़े अन्य चिकित्सकीय पहलुओं को समझने में मदद मिलती है। ऐसे साक्ष्य पुलिस की जांच और अदालत में अभियोजन पक्ष के मामले को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
सौरभ राजपूत मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में रहते थे और विदेश में काम करते थे। वे 24 फरवरी 2025 को मेरठ लौटे थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को उनकी हत्या कर दी गई।
पुलिस की जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रख दिया गया। ड्रम में सीमेंट भरकर शव को छिपाने की कोशिश की गई थी।
17 मार्च 2025 को मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने जांच तेज की और मुस्कान रस्तोगी तथा साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया। घटना की प्रकृति और शव को छिपाने के तरीके के कारण यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल
जांच पूरी करने के बाद मेरठ पुलिस ने मई 2025 में मामले में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए।
मुकदमे के दौरान परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक तथ्यों तथा गवाहों के बयानों पर विचार किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में 22 गवाहों के बयान दर्ज हुए और करीब 13 महीने तक सुनवाई चली। इस दौरान कुल 126 सुनवाइयां हुईं।
30 सितंबर को दोषी करार, 14 अक्टूबर को मृत्युदंड
मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया था। इसके बाद अदालत ने सजा पर अंतिम सुनवाई की और 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मृत्युदंड सुनाया।
सजा सुनाते समय अदालत की टिप्पणी ‘दंड भी धर्म है’ भी चर्चा में रही। अदालत ने दंड और न्याय के महत्व को रेखांकित किया। मृत्युदंड के फैसले के बाद भी कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प बना रहता है।
जांच और साक्ष्यों की भूमिका रही अहम
सौरभ राजपूत हत्याकांड में पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों ने मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयुष विक्रम सिंह और अंतरिक्ष जैन जैसे अधिकारियों का नाम जांच के संदर्भ में चर्चा में आया।
इस मामले ने एक बार फिर दिखाया कि गंभीर अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और कानूनी प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है। अदालत का फैसला सुनाए जाने के बाद भी मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।