नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का छठा आरोपी गिरफ्तार, ₹15,200 नकद बरामद
फर्जी कंपनी बनाकर बेरोजगार युवाओं को बनाते थे निशाना, पंजीकरण और ट्रेनिंग फीस के नाम पर वसूलते थे रकम; दो मोबाइल, एटीएम कार्ड और चेकबुक भी मिलीं
मैनपुरी, 17 अक्टूबर। (अजय सक्सेना) नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ मैनपुरी पुलिस को एक और सफलता मिली है। साइबर क्राइम थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी अर्जुन सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, 15,200 रुपये नकद, दो एटीएम कार्ड और दो चेकबुक बरामद की हैं। इस मामले में पुलिस पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अर्जुन सिंह की गिरफ्तारी के बाद इस प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या छह हो गई है।
फर्जी कंपनी बनाकर बेरोजगार युवाओं से करते थे ठगी
पुलिस के अनुसार, साइबर क्राइम थाना मैनपुरी में मुकदमा अपराध संख्या 16/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी में मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गिरोह के सदस्यों की पहचान की और कार्रवाई शुरू की।
जांच के क्रम में पुलिस पहले पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब इसी मामले में छठे आरोपी अर्जुन सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
नोएडा के कॉल सेंटर में काम करने के बाद शुरू किया अपना नेटवर्क
पुलिस पूछताछ के मुताबिक, आरोपी अर्जुन सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी क्षेत्र का निवासी है। उसका वर्तमान पता दिल्ली के मयूर विहार क्षेत्र में बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह पहले नोएडा में एक कॉल सेंटर में काम करता था। वहां काम करने के दौरान उसे साइबर ठगी के तरीकों की जानकारी मिली। इसके बाद उसने करीब दो साल पहले अपना कॉल सेंटर शुरू कर दिया और एमएस सॉल्यूशन के नाम से एक कथित फर्जी फर्म बनाई।
आरोप है कि इस फर्म के माध्यम से नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं का डेटा जुटाया जाता था। इसके बाद अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था और इसी बहाने उनसे पैसे वसूले जाते थे।
पंजीकरण और प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर वसूली
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों को फोन करते थे। उन्हें फर्जी ई-मेल के माध्यम से नौकरी मिलने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद पंजीकरण शुल्क और प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर रकम जमा कराई जाती थी।
आरोप है कि बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलने की उम्मीद दिलाकर उनसे पैसे ऐंठे जाते थे। इस तरह गिरोह नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाता था।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि कथित ठगी से प्राप्त रकम विभिन्न म्यूल बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद एटीएम सहित अन्य माध्यमों से पैसे निकालकर गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों और बैंक खातों की भूमिका की जांच कर रही है।
आरोपी के पास से क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी अर्जुन सिंह के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद करने की जानकारी दी है:
- दो मोबाइल फोन
- 15,200 रुपये नकद
- दो एटीएम कार्ड
- दो चेकबुक
पुलिस इन बरामद वस्तुओं की जांच कर रही है, ताकि मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों और संदिग्ध लेनदेन के संबंध में जानकारी जुटाई जा सके।
गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच जारी
मैनपुरी पुलिस के अनुसार, मामले में पहले गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों के बाद अर्जुन सिंह की गिरफ्तारी भी जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस गिरोह के नेटवर्क, कथित फर्जी कंपनी के संचालन, बैंक खातों के इस्तेमाल और ठगी की रकम के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने कितने बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया और ठगी की रकम कितनी है। मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की आशंका को देखते हुए जांच जारी है।
नौकरी के नाम पर ठगी से रहें सावधान
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को ऐसे मामलों से सतर्क रहने की जरूरत है। किसी अनजान कंपनी या व्यक्ति के नौकरी दिलाने के दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें। नौकरी के नाम पर पंजीकरण, प्रशिक्षण या नियुक्ति की गारंटी देकर पैसे मांगने वालों के प्रति सावधानी बरतें।
मैनपुरी में सामने आए इस मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।