जनगणना 2027 पर कांग्रेस के सवाल, जयराम रमेश ने RSS के ट्रेनिंग कैंप और कर्मचारियों की पात्रता पर जताई चिंता
उपशीर्षक: 16 अक्टूबर को जारी अधिसूचना, जनसांख्यिकीय बदलावों पर गठित समिति और बेलगावी में कथित प्रशिक्षण शिविर को लेकर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। जनगणना 2027 को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता नजर आ रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जनगणना के लिए गणनाकर्ताओं की पात्रता से जुड़े नियमों में बदलाव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कथित प्रशिक्षण शिविर और जनसांख्यिकीय बदलावों से संबंधित समिति का उल्लेख करते हुए जनगणना की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है।
जयराम रमेश ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी जनगणना संबंधी अधिसूचना को हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में देखने की बात कही। उनका सवाल है कि कर्मचारियों की पात्रता का दायरा बढ़ाने के फैसले के पीछे क्या उद्देश्य है और इससे जनगणना की विश्वसनीयता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
कर्मचारियों की पात्रता बढ़ाने पर सवाल
जनगणना जैसे बड़े राष्ट्रीय कार्य को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में गणनाकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए गणनाकर्ताओं के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों की श्रेणियों से संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है।
संशोधित प्रावधानों के तहत शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों, स्थानीय निकायों से जुड़े कर्मियों और विभिन्न संस्थानों में कार्यरत लोगों को जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है। इसके अलावा, संबंधित प्रशासन को नियमों के अनुसार अन्य उपयुक्त व्यक्तियों की नियुक्ति का विकल्प भी मिलता है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसी बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनगणना कर्मचारियों की पात्रता बढ़ाने के फैसले को अन्य घटनाक्रमों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और कर्मचारियों के चयन के मानदंडों को लेकर चिंता जाहिर की।
बेलगावी में RSS के प्रशिक्षण शिविर का जिक्र
जयराम रमेश ने दावा किया कि RSS ने 10 से 12 जुलाई 2026 के बीच कर्नाटक के बेलगावी में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था। उनके अनुसार, इस शिविर में जनगणना 2027 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई थी।
कांग्रेस नेता ने इस प्रशिक्षण शिविर और गणनाकर्ताओं की पात्रता बढ़ाने के फैसले के बीच संभावित संबंध को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि नियमों में बदलाव से RSS और BJP से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए जनगणना कार्य में शामिल होने के अवसर बढ़ सकते हैं।
हालांकि, RSS या BJP से जुड़े लोगों को राजनीतिक आधार पर जनगणना कार्य में नियुक्त करने की किसी योजना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में लगाए गए आरोपों को कांग्रेस नेता के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
जनसांख्यिकीय बदलावों पर बनी समिति पर भी आपत्ति
जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित जनसांख्यिकीय बदलावों से संबंधित उच्चस्तरीय समिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इस समिति का संबंध देश में जनसंख्या से जुड़े बदलावों, अवैध प्रवासन और असामान्य बसावट जैसे विषयों पर जानकारी तथा सुझाव प्राप्त करने से है।
कांग्रेस नेता ने समिति की संरचना और उससे जुड़े लोगों की वैचारिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाते हुए आशंका व्यक्त की कि इन विषयों पर होने वाली चर्चा प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि जनसंख्या और प्रवासन जैसे संवेदनशील मामलों पर विचार करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए।
समिति को सुझाव देने के लिए लोगों और संगठनों से अपील किए जाने के घटनाक्रम का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके अनुसार, समिति की भूमिका और जनगणना से जुड़े फैसलों के बीच संबंधों को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
जनगणना की निष्पक्षता को लेकर चिंता
जयराम रमेश ने जनगणना से जुड़े इन घटनाक्रमों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता के व्यापक संदर्भ में देखने की बात कही। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का भी उल्लेख किया और निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
जनगणना देश की आबादी, सामाजिक संरचना, आवास, प्रवासन और अन्य जनसांख्यिकीय पहलुओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने, संसाधनों के वितरण और विकास संबंधी नीतियों को निर्धारित करने में किया जाता है।
ऐसे में गणनाकर्ताओं की नियुक्ति, आंकड़ों के संग्रह और पूरी प्रक्रिया की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जाता है। कांग्रेस का कहना है कि जनगणना की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियुक्तियों और प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नियमों में बदलाव का क्या होगा असर?
गणनाकर्ताओं की पात्रता से संबंधित नियमों में बदलाव के बाद प्रशासन को जनगणना कार्य के लिए अधिक श्रेणियों से कर्मचारी चुनने का अवसर मिल सकता है। इससे बड़े पैमाने पर होने वाली जनगणना के लिए आवश्यक मानव संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस बदलाव के समय और इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, पात्रता का दायरा बढ़ाए जाने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नियुक्तियां राजनीतिक संबद्धता के आधार पर होंगी या जनगणना के आंकड़ों में किसी तरह की गड़बड़ी होगी।
इस पूरे मामले में नियमों का वास्तविक क्रियान्वयन, नियुक्ति प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण होंगे। इन पहलुओं से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जनगणना कार्य किस तरह संचालित किया जाता है और उसकी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
आगे क्या?
जनगणना 2027 को लेकर जयराम रमेश के सवालों ने इस मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस ने कर्मचारियों की पात्रता, RSS के कथित प्रशिक्षण शिविर और जनसांख्यिकीय बदलावों पर गठित समिति को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखी हैं।
अब इस विषय पर आगे की बहस का केंद्र सरकार की ओर से अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, कर्मचारियों की नियुक्ति के मानदंड और जनगणना की पारदर्शिता से जुड़े सवाल हो सकते हैं। फिलहाल, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों और उनके समर्थन में उपलब्ध प्रमाणों के बीच अंतर करना जरूरी है, ताकि जनगणना से संबंधित चर्चा तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ सके।