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Ghaziabad Air Pollution Control: प्रदूषण रोकने के लिए 9 हॉट स्पॉट चिन्हित

By aonenewstv | Published: Oct 14, 2026 11:49 AM

गाजियाबाद में सर्दियों के प्रदूषण पर प्रशासन सख्त, नौ हॉट स्पॉट चिन्हित; निर्माण स्थलों और पुराने वाहनों पर होगी कार्रवाई

गाजियाबाद। सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए गाजियाबाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शीतकालीन वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना की समीक्षा की गई। इस दौरान जिले में प्रदूषण की दृष्टि से नौ प्रमुख हॉट स्पॉट चिन्हित किए गए और संबंधित विभागों को प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए।

बैठक में निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को रोकने, सड़कों की नियमित सफाई, वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर कार्रवाई और खुले में अलाव जलाने की समस्या को नियंत्रित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।

गाजियाबाद में नौ प्रमुख हॉट स्पॉट चिन्हित

जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत जिले के नौ प्रमुख क्षेत्रों को हॉट स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है।

इनमें शामिल हैं:

  • साहिबाबाद
  • राजनगर एक्सटेंशन
  • लोनी
  • भोपुरा-दिल्ली बॉर्डर क्षेत्र
  • इंदिरापुरम
  • विजय नगर-एसएसजीटी रोड
  • लाल कुआं
  • सिद्धार्थ विहार
  • वसुंधरा-वैशाली

इन क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के निर्देश

निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। इसे नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, नगर निगम, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और एनसीआरटीसी सहित सभी निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए हैं।

निर्माण स्थलों और उनके आसपास पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव कराने तथा आवश्यकता के अनुसार एंटी स्मॉग गन लगाने को कहा गया है। प्रशासन ने निर्माण एजेंसियों को धूल रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम करने और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

रात में होगी सड़कों की मैकेनाइज्ड सफाई

सड़कों पर जमा धूल उड़ने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और नगर निगम को रात के समय मैकेनाइज्ड स्वीपिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सड़कों पर वाटर स्प्रिंकलिंग यानी पानी का छिड़काव भी कराया जाएगा।

प्रशासन का उद्देश्य सड़कों पर जमा धूल को नियंत्रित करना और शीतकाल के दौरान वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी कदम उठाना है।

अलाव रोकने के लिए सोसायटियों में इलेक्ट्रिक हीटर

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने सभी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के माध्यम से सुरक्षा कर्मियों को इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सर्दियों में सुरक्षा कर्मियों और अन्य लोगों द्वारा खुले में लकड़ी या अन्य सामग्री जलाकर आग तापने से होने वाले प्रदूषण को रोकना है। संबंधित संस्थाओं को समय रहते आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

होटल और रेस्टोरेंट में कोयले-लकड़ी के तंदूर पर रोक लगाने के निर्देश

होटल और रेस्टोरेंट से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए संचालकों को कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों के स्थान पर पीएनजी या एलपीजी गैस का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों और प्रतिष्ठानों को अपनी जिम्मेदारी के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।

पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर होगी कार्रवाई

वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ईवी, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाले डीजल वाहनों को छोड़कर 10 वर्ष पुराने डीजल तथा 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में परिवहन विभाग और पुलिस सहित संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।

500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों का डस्ट ऑडिट अनिवार्य

जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित यूपीईसीपी (उत्तर प्रदेश एनवायरनमेंटल कंप्लायंस पोर्टल) पर उपलब्ध डस्ट ऐप के माध्यम से निर्माण परियोजनाओं की निगरानी और स्व-ऑडिट की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

निर्देशों के अनुसार, 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर संचालित सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए पोर्टल पर डस्ट कंट्रोल ऑडिट लिंक के माध्यम से पंजीकरण कर सेल्फ ऑडिट करना अनिवार्य है।

निर्माण एजेंसियों को इस व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी रखी जा सके और समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

कई विभागों की जिम्मेदारी तय

वायु प्रदूषण नियंत्रण अभियान के तहत गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, नगर निगम, सभी नगर पालिकाओं, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, परिवहन विभाग, जिला पूर्ति विभाग, विद्युत विभाग, पुलिस, कृषि विभाग और आवास विकास परिषद सहित संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शीतकाल के दौरान वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। नौ हॉट स्पॉट पर विशेष निगरानी रखने के साथ पूरे जिले में प्रदूषण के कारकों पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन का जोर निर्माण स्थलों की धूल, सड़कों की सफाई, वाहनों के उत्सर्जन और अन्य स्थानीय प्रदूषणकारी गतिविधियों पर नियंत्रण के जरिए गाजियाबाद की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने पर है।

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