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Congress Gyanesh Kumar Protest 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग अभियान, दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति

By aonenewstv | Published: Oct 27, 2026 06:59 AM

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘सार्वजनिक महाभियोग’ अभियान आयोजित करने की योजना बनाई है, लेकिन पार्टी का दावा है कि दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस और INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी राजनीतिक रैली की तैयारी कर रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। पार्टी ने इस मामले में केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, अनुमति नहीं मिलने के पीछे प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

अशोका होटल में अनुमति नहीं मिलने के बाद रामलीला मैदान का विकल्प

कांग्रेस के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित ‘सार्वजनिक महाभियोग’ कार्यक्रम पहले दिल्ली के अशोका होटल में आयोजित करने की योजना थी।

पार्टी का दावा है कि वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के बाद आयोजन स्थल बदलने का निर्णय लिया गया। इसके बाद रामलीला मैदान में कार्यक्रम करने की योजना बनाई गई, लेकिन कांग्रेस के मुताबिक वहां भी आयोजन को मंजूरी नहीं मिल सकी।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। ऐसे में कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं मिलना कई सवाल खड़े करता है।

केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जताई है।

वैकल्पिक आयोजन स्थल के सवाल पर वेणुगोपाल ने तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवासों का भी उल्लेख किया।

उनकी इस टिप्पणी को केंद्र सरकार और प्रशासन के प्रति विरोध के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी अपने राजनीतिक विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर पीछे नहीं हटेगी। हालांकि, कार्यक्रम के अगले आयोजन स्थल और तारीख को लेकर आधिकारिक निर्णय की प्रतीक्षा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों है कांग्रेस का अभियान?

कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रही है।

पार्टी का आरोप है कि चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कुछ मुद्दों पर चुनाव आयोग का रवैया संतोषजनक नहीं रहा है। कांग्रेस इन सवालों को जनता के सामने उठाने के लिए ‘सार्वजनिक महाभियोग’ अभियान को राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।

हालांकि, ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं। इनसे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी कानूनी दोष या संवैधानिक उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती।

यह भी महत्वपूर्ण है कि ‘सार्वजनिक महाभियोग’ एक राजनीतिक अभियान का नाम है, न कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली

दिल्ली में चल रहे इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस और INDIA गठबंधन 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में बड़ी महारैली आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं।

इस रैली के लिए ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ का नारा दिया गया है। विपक्षी दलों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है।

कांग्रेस इस रैली के माध्यम से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक आरोपों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।

हालांकि, प्रस्तावित महारैली और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अलग से आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम की अनुमति की स्थिति को एक समान नहीं माना जाना चाहिए। दोनों आयोजनों के लिए प्रशासनिक अनुमति से संबंधित परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का अभियान चुनाव आयोग की भूमिका और स्वतंत्रता पर जारी राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है।

भारत में चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका दायित्व स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना है। चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक दलों की शिकायतें और आपत्तियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।

वहीं, किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया भी निर्धारित है। केवल किसी राजनीतिक दल द्वारा सार्वजनिक अभियान चलाने से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।

कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने से बढ़ी सियासी हलचल

कांग्रेस के प्रस्तावित कार्यक्रम को अनुमति नहीं मिलने के दावे ने दिल्ली की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है।

एक ओर कांग्रेस इसे शांतिपूर्ण राजनीतिक विरोध के अधिकार से जोड़ रही है, वहीं किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के आयोजन में कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।

ऐसे में कार्यक्रम को अनुमति देने या न देने के प्रशासनिक निर्णय के पीछे क्या कारण रहे, यह संबंधित अधिकारियों के विस्तृत स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट हो सकेगा।

महारैली से पहले विपक्ष की रणनीति पर नजर

1 नवंबर की प्रस्तावित महारैली से पहले कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपने अभियान को राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस कार्यक्रम के लिए कोई नया स्थान निर्धारित करती है या इसे किसी अन्य स्वरूप में आयोजित करने का निर्णय लेती है।

इसके साथ ही रामलीला मैदान में प्रस्तावित INDIA गठबंधन की महारैली में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।

फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के ‘सार्वजनिक महाभियोग’ अभियान को लेकर दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज है। कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के कांग्रेस के दावे और 1 नवंबर की प्रस्तावित महारैली ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

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