औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में थाना अजीतमल क्षेत्र से जुड़े एक मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने अधिवक्ता दीपांकर मिश्रा की पैरवी और विकास कुमार के प्रार्थना-पत्र पर सुनवाई करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की आख्या प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया है।
यह मामला एक विवाहित महिला के घर से चले जाने और उसके बाद नकदी एवं आभूषण गायब मिलने के आरोपों से जुड़ा है। प्रार्थी ने पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए न्यायालय की शरण ली थी।
17 जुलाई की रात से जुड़ा है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजीतमल क्षेत्र निवासी विकास कुमार ने अपने प्रार्थना-पत्र में बताया कि 17 जुलाई 2026 की रात उनकी पत्नी नेहा ससुराल से चली गई थीं। अगले दिन सुबह घर में रखे लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के आभूषण और 15 हजार रुपये नकद गायब मिले।
विकास कुमार ने अपने प्रार्थना-पत्र में राहुल यादव नामक व्यक्ति की भूमिका पर संदेह जताया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित रूप से गायब नकदी एवं आभूषणों की बरामदगी की मांग की।
हालांकि, प्रार्थना-पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस से शिकायत के बाद न्यायालय पहुंचे विकास कुमार
विकास कुमार के अनुसार, उन्होंने घटना के संबंध में थाना अजीतमल में शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक स्तर पर भी अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय में प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया।
प्रार्थी ने न्यायालय से मामले में एफआईआर दर्ज कराकर विधिक कार्रवाई कराने का अनुरोध किया।
न्यायालय में प्रार्थना-पत्र पर सुनवाई हुई और संबंधित तथ्यों एवं प्रस्तुत सामग्री पर विचार किया गया।
अधिवक्ता दीपांकर मिश्रा ने की मामले की पैरवी
इस प्रकरण में विकास कुमार की ओर से अधिवक्ता दीपांकर मिश्रा ने न्यायालय में पैरवी की।
अधिवक्ता दीपांकर मिश्रा के अनुसार, मामले में करीब दो महीने के दौरान आधा दर्जन से अधिक सुनवाई हुईं। इस दौरान प्रार्थना-पत्र पर न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा गया और मामले में विधिसम्मत कार्रवाई का अनुरोध किया गया।
उन्होंने बताया कि न्यायालय ने 12 अक्टूबर 2026 को प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करने और मामले की विवेचना करने का आदेश दिया।
15 दिनों के भीतर कार्रवाई की आख्या देने के निर्देश
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/फास्ट ट्रैक कोर्ट, औरैया ने संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देशित किया है कि प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना की जाए।
इसके साथ ही न्यायालय ने 15 दिनों के भीतर कार्रवाई से संबंधित आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।
न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और विवेचना महत्वपूर्ण होगी। जांच में प्राप्त साक्ष्यों, संबंधित पक्षों के बयानों और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विवेचना के बाद स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई
मामले में नकदी और आभूषण गायब होने तथा एक व्यक्ति की संदिग्ध भूमिका को लेकर प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल इन आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
एफआईआर दर्ज करने का न्यायालय का आदेश किसी व्यक्ति के दोषी होने का निर्णय नहीं है। इसका उद्देश्य मामले में विधि के अनुसार जांच की प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
पुलिस विवेचना के दौरान संबंधित व्यक्तियों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज और अन्य संभावित साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध हैं या नहीं।
न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस कार्रवाई पर नजर
अजीतमल से जुड़े इस प्रकरण में न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज करने और 15 दिन में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने के बाद अब आगे की कार्रवाई पुलिस को करनी है।
प्रार्थी विकास कुमार ने न्यायालय के माध्यम से मामले की जांच और कथित रूप से गायब संपत्ति की बरामदगी की मांग उठाई है।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू न्यायालय के आदेश का अनुपालन और निष्पक्ष पुलिस विवेचना है। जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।