धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रमों पर अखिलेश यादव का विरोध, प्रशासन से अनुमति न देने की अपील; राजा भैया से सियासी टकराव तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सार्वजनिक आयोजनों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रमों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन से ऐसे आयोजनों को अनुमति नहीं देने की अपील की है। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और राजा भैया के साथ उनके सियासी टकराव की चर्चा भी सामने आई है।
‘न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में’
अखिलेश यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रमों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा, ‘न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में।’
सपा प्रमुख की इस टिप्पणी को धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित धार्मिक आयोजनों के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। अखिलेश ने अपने बयान के जरिए प्रदेश में ऐसे कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े किए।
कई जिलों में आयोजनों की अनुमति न देने की अपील
बुधवार शाम को अखिलेश यादव ने अपना विरोध और व्यापक कर दिया। उन्होंने अंबेडकरनगर, कुंडा, गोंडा, झांसी समेत कई स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए प्रशासन से ऐसे आयोजनों को अनुमति नहीं देने की अपील की।
अखिलेश यादव का कहना है कि राजनीतिक टकराव में धार्मिक आस्था और भगवान को बीच में लाना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि सियासी लोग अपने आपसी विवादों में भगवान को क्यों शामिल कर रहे हैं।
धार्मिक आयोजनों को लेकर सियासी बहस तेज
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रमों को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों और राजनीति के संबंध पर बहस शुरू हो गई है। सपा प्रमुख ने प्रशासन से आयोजनों की अनुमति देने के मामले में सतर्कता बरतने की बात कही है।
उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। अखिलेश यादव ने आशंका जताई कि इस तरह के आयोजनों के जरिए राजनीतिक माहौल प्रभावित हो सकता है।
राजा भैया के साथ सियासी टकराव की चर्चा
इस पूरे मामले में राजा भैया का नाम भी चर्चा में है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के रामकथा कार्यक्रम और कुंडा से जुड़े घटनाक्रम को लेकर अखिलेश यादव के विरोध को राजा भैया के साथ राजनीतिक टकराव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, इस विवाद में दोनों नेताओं के बीच आगे क्या राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल अखिलेश यादव ने प्रशासन से प्रस्तावित आयोजनों को अनुमति नहीं देने की अपील कर अपना रुख साफ कर दिया है।
आगे क्या होगा?
अखिलेश यादव की अपील के बाद अब संबंधित जिलों के प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आयोजनों को अनुमति देने या नहीं देने का फैसला संबंधित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर प्रशासन को करना होगा।
इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार, आयोजकों और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रमों को लेकर अखिलेश यादव के विरोध ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है।