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E20 Fuel Rollout: वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं ने सरकार से रोलआउट रोकने की मांग की

By yogesh jindoria | Published: Sep 13, 2026 12:21 PM

E20 Fuel Rollout: वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं ने सरकार से रोलआउट रोकने की मांग

मुंबई: देश में E20 ईंधन के रोलआउट को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मुंबई में शनिवार को आयोजित ‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ के दौरान वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सरकार से E20 ईंधन नीति के रोलआउट को रोकने की मांग की। समूह ने इसके साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को खत्म करने, देशभर में एंटी-ब्लैक मैजिक कानून बनाने और सरकारी नीतियों में वैज्ञानिक प्रमाणों को प्राथमिकता देने की अपील की।

E20 Fuel Rollout रोकने की मांग

संयुक्त अपील में हस्ताक्षरकर्ताओं ने E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति को तत्काल रोकने की मांग की। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नीति को लागू करने से पहले इसके पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक आकलन किया जाना चाहिए।

समूह ने ईंधन के लिए पानी की अधिक जरूरत वाली खाद्य फसलों के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उनका तर्क है कि इससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है और भूजल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

NTA को खत्म करने की मांग

वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA को खत्म करने की मांग भी उठाई। अपील में हाल के पेपर लीक और परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों का हवाला देते हुए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई।

समूह ने कहा कि शिक्षा और परीक्षाओं से जुड़े फैसले पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर होने चाहिए।

छद्म विज्ञान और अंधविश्वास पर भी सवाल

संयुक्त अपील में छद्म विज्ञान को बढ़ावा देने और वैज्ञानिक प्रमाणों की अनदेखी किए जाने पर भी चिंता जताई गई। वैज्ञानिकों ने संविधान के अनुच्छेद 51A(h) में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने से जुड़े नागरिक कर्तव्य का उल्लेख करते हुए अंधविश्वास के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की।

समूह ने देशभर में एंटी-ब्लैक मैजिक कानून बनाने की मांग की, ताकि डायन प्रथा, अंधविश्वास और फर्जी उपचार जैसी गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

शिक्षा और रिसर्च बजट बढ़ाने की मांग

अपील में शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए सरकारी खर्च बढ़ाने की मांग भी की गई। समूह ने केंद्र के बजट का कम से कम 10 प्रतिशत और राज्यों के बजट का 30 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित करने की मांग रखी।

इसके अलावा वैज्ञानिक अनुसंधान पर खर्च को बढ़ाकर GDP का कम से कम 3 प्रतिशत करने की मांग की गई। समूह ने कहा कि भारत के भविष्य के लिए मजबूत वैज्ञानिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जरूरी है।

पर्यावरण संकट पर भी जताई चिंता

वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने चरम मौसम की घटनाओं, ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र के बढ़ते स्तर, पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव और प्रजातियों के विलुप्त होने को लेकर चिंता जताई।

अपील में वनों की कटाई, भूजल के अत्यधिक दोहन और नदियों एवं जल स्रोतों के प्रदूषण का भी जिक्र किया गया। समूह ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों को कमजोर करने के बजाय उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत बताई।

‘Adopt Science, Secure the Future’ का संदेश

‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ से जुड़े लोगों ने ‘Adopt Science, Secure the Future’ यानी विज्ञान अपनाएं, भविष्य सुरक्षित करें का संदेश दिया। आयोजकों ने वैज्ञानिकों, शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों से तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की अपील की।

E20 नीति, NTA, पर्यावरण, शिक्षा और अंधविश्वास जैसे मुद्दों को लेकर जारी यह संयुक्त अपील अब सरकार की नीतियों पर व्यापक बहस के बीच सामने आई है।

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