नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता बिरजू केओट की पुलिस हिरासत में मौत के आरोपों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। मृतक के परिवार ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और अब जांच को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया है।
मृतक के परिवार से मुलाकात के बाद भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच की जानकारी दी। उन्होंने पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की बात भी कही। हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री नहीं हैं।
बिरजू केओट की कैसे हुई मौत?
बिरजू केओट को जबरन वसूली समेत अन्य आरोपों के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद शनिवार को उनकी मौत की खबर सामने आई।
मृतक की पत्नी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि बिरजू केओट को पुलिस लॉक-अप के अंदर पीटा गया और इसी दौरान उनकी मौत हुई। परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस हिरासत में मौत के आरोप के बाद यह मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई
मामले को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि हालीशहर थाने के प्रभारी निरीक्षक को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा मामले की जांच कर रहे अधिकारी को भी निलंबित किए जाने की बात कही गई।
साथ ही मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। ऐसी जांच का उद्देश्य घटना के पूरे घटनाक्रम, पुलिस की भूमिका और हिरासत में हुई मौत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करना है।
पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा भी की गई है। इससे परिवार को तत्काल आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

ममता बनर्जी के दौरे के दौरान हुआ था हंगामा
बिरजू केओट की मौत के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी हालीशहर स्थित मृतक के घर पहुंची थीं। हालांकि, उनके दौरे के दौरान उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के काफिले को घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। काफिले की ओर कीचड़ और चप्पलें फेंके जाने का भी आरोप सामने आया। घटना के बाद ममता बनर्जी ने पुलिस की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए थे।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके काफिले पर हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ। उन्होंने इस घटना को लेकर भाजपा पर भी निशाना साधा था।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता के आरोपों पर क्या कहा?
शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के काफिले पर हुए विरोध में भाजपा की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी के खिलाफ हुआ विरोध लोगों के कथित आक्रोश को दर्शाता है।
उन्होंने ममता बनर्जी पर राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि उनके खिलाफ लोगों में नाराजगी है और इसी वजह से उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।
इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
बिरजू केओट की मौत का मामला अब मजिस्ट्रेट जांच के दायरे में है। परिवार की ओर से पुलिस हिरासत में मारपीट के आरोप लगाए गए हैं, जबकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस हिरासत के दौरान आखिर बिरजू केओट के साथ क्या हुआ? क्या उनकी मौत स्वाभाविक कारणों से हुई या हिरासत में कथित मारपीट के आरोपों में कोई सच्चाई है? जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस लॉक-अप से जुड़े साक्ष्य और घटना के समय मौजूद अधिकारियों की भूमिका अहम हो सकती है।
मामले में पुलिस अधिकारियों पर शुरुआती कार्रवाई और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश के बाद अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं, इस घटना ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।