308 पहियों वाला महाबली ट्रक: बेल्जियम से चला, 6 महीने बाद भी मंजिल से दूर

308 पहियों वाला महाबली ट्रक: बेल्जियम से चला, 6 महीने बाद भी मंजिल से दूर

चंदौली: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों 308 पहियों वाला एक विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस पर करीब 200 टन वजनी भारी मशीन लदी है और इसे ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। करीब 1000 किलोमीटर का सफर तय कर चुका यह महाबली ट्रक बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। कई जगह रास्ते की स्थिति और मशीन के विशाल आकार के कारण सड़क में बदलाव तक करना पड़ रहा है।

बेल्जियम से शुरू हुआ सफर

इस विशाल मशीन की यात्रा अप्रैल 2026 में बेल्जियम से शुरू हुई थी। इसे समुद्री रास्ते से भारत भेजा गया और करीब एक महीने के सफर के बाद मशीन ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची। इसके बाद मशीन को 308 पहियों वाले विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के लिए रवाना किया गया।

पारादीप से निकलने के बाद ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा। करीब 1000 किलोमीटर का यह सड़क सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रक कई दिनों में सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर तक ही आगे बढ़ पा रहा है।

308 पहियों की जरूरत क्यों पड़ी?

ट्रक पर लदी मशीन का वजन और आकार सामान्य वाहनों से काफी अधिक है। इसी वजह से इसे संभालने और वजन को सड़क पर वितरित करने के लिए मल्टी-एक्सल ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 308 पहिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रक के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारी और अन्य भारी वाहन भी चल रहे हैं। इसे आगे बढ़ाने के लिए रूट की पहले से जांच की जाती है और रास्ते में आने वाले अवरोधों को हटाया जाता है।

चंदौली में क्यों रुक गया ‘महाबली’?

25 सितंबर के आसपास यह विशाल ट्रक चंदौली जिले की सीमा में पहुंचा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर और रिंग रोड के आसपास ट्रक को आगे बढ़ाने में मुश्किल आई। मशीन की ऊंचाई और चौड़ाई को देखते हुए सामान्य रास्ते से इसे निकालना आसान नहीं था।

एक जगह सर्विस लेन के आगे दलदली जमीन भी परेशानी बनी। रास्ते को मजबूत करने और ट्रक को आगे निकालने के लिए टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ जगह हाईवे पर लगे साइनेज और बोर्ड हटाने की जरूरत भी पड़ी, ताकि विशाल ट्रक को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

जहां पहुंचता है, वहां रास्ते में करना पड़ता है बदलाव

इस महाबली ट्रक की सबसे बड़ी चुनौती इसका आकार है। रास्ते में ऊंचाई, चौड़ाई, पुल, ओवरब्रिज और अन्य संरचनाओं को ध्यान में रखकर इसकी आवाजाही कराई जा रही है।

रूट को सुरक्षित बनाने के लिए संबंधित विभागों और लॉजिस्टिक्स टीम के बीच समन्वय किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर सड़क को तैयार किया गया तो कहीं अवरोध हटाए गए। यही वजह है कि यह ट्रक सामान्य मालवाहक वाहनों की तुलना में बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।

रोजाना सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर की रफ्तार

308 पहियों वाले इस महाबली ट्रक की रफ्तार सुनकर भी लोग हैरान हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रोजाना औसतन करीब 10 से 20 किलोमीटर ही सफर कर पा रहा है। करीब 1000 किलोमीटर का सफर पूरा करने में इसे लगभग दो महीने लग चुके हैं।

इतनी धीमी गति की वजह सिर्फ ट्रक का वजन नहीं है, बल्कि रास्ते की परिस्थितियां और मशीन के विशाल आकार भी बड़ी वजह हैं। कई जगह पहले रास्ते का निरीक्षण किया जाता है और उसके बाद ही ट्रक को आगे बढ़ाया जाता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ट्रक

विशाल आकार और 308 पहियों की वजह से यह ट्रक सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ है। जिस रास्ते से यह गुजर रहा है, वहां लोग इसे देखने के लिए रुक रहे हैं। कई लोग ट्रक और उस पर लदी विशाल मशीन के साथ फोटो और वीडियो बना रहे हैं।

चंदौली में भी बारिश और खराब मौसम के बावजूद लोग इसे देखने पहुंचे। स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के दूसरे इलाकों से आए लोग भी इस अनोखे वाहन को देखने के लिए जुट रहे हैं।

अब कहां जाएगा महाबली ट्रक?

लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, चंदौली के बाद ट्रक को आगे वाराणसी और फिर गाजीपुर की ओर ले जाया जाना है। इसके बाद इसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा।

टीम के अनुसार, अगर आगे का सफर योजना के मुताबिक चलता रहा तो अंतिम मंजिल तक पहुंचने में अभी करीब दो से तीन सप्ताह और लग सकते हैं। हालांकि, रास्ते में आने वाली चुनौतियों के कारण समय में बदलाव संभव है।

 

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