दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा: ₹3.93 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क पकड़ा, 7 आरोपी गिरफ्तार; हवाला कनेक्शन की जांच
म्यूल बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर ट्रांसफर की गई ठगी की रकम, विदेशी मनी-एक्सचेंज ऐप ‘U Home’ से कथित संबंध; राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और फलोदी में सात दिन तक चला पुलिस का अभियान
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। दिल्ली पुलिस ने करीब 3.93 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक कथित नेटवर्क का खुलासा करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की स्पेशल टीम ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में सात दिनों तक जांच और छापेमारी अभियान चलाकर आरोपियों को पकड़ा। शुरुआती जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर किया गया था।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित किया। इसके बाद नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों ने बैंक खातों से नकदी निकालने और उसे आगे पहुंचाने का काम किया।
जांच के दौरान विदेशी मनी-एक्सचेंज ऐप ‘U Home’ और हवाला नेटवर्क से संभावित संबंधों के संकेत भी मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और उसका अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ।
₹3.93 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा
दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह मामला करीब 3.93 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से संबंधित है।
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनका कथित तौर पर धोखाधड़ी की रकम को स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस ने इन खातों से जुड़े लेनदेन और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर कथित नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने राजस्थान में आरोपियों की तलाश शुरू की।
पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न खातों में पहुंचाने और नकदी के रूप में निकालने से संबंधित रही है।
हालांकि, सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का अंतिम परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।
राजस्थान में सात दिन तक चला पुलिस का अभियान
आरोपियों की तलाश में दिल्ली पुलिस की टीम ने राजस्थान के कई स्थानों पर जांच की।
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बीकानेर, जोधपुर और फलोदी सहित विभिन्न इलाकों में सात दिनों तक अभियान चलाया।
इस दौरान संदिग्ध व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई गई और उनसे जुड़े बैंकिंग लेनदेन तथा अन्य सुरागों की पड़ताल की गई।
जांच के आधार पर पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
क्या होते हैं म्यूल बैंक खाते?
इस मामले में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है।
म्यूल बैंक खाते ऐसे खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए किया जाता है।
साइबर अपराध से जुड़े मामलों में धोखाधड़ी की रकम सीधे अंतिम व्यक्ति के खाते में भेजने के बजाय कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की जा सकती है।
ऐसा करने का उद्देश्य धनराशि के वास्तविक स्रोत और अंतिम प्राप्तकर्ता की पहचान को छिपाना हो सकता है।
कई मामलों में खाताधारक कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरों को करने देते हैं। कुछ मामलों में खाताधारक स्वयं भी धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं।
इसलिए किसी खाते के म्यूल खाते के रूप में इस्तेमाल होने की जांच में खाताधारक की जानकारी, उसकी भूमिका और लेनदेन की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।
कई स्तरों पर ट्रांसफर की गई ठगी की रकम
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कथित नेटवर्क ने धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित किया।
पुलिस को आशंका है कि धनराशि को कई स्तरों पर ट्रांसफर करके उसके मूल स्रोत का पता लगाना मुश्किल बनाने की कोशिश की गई।
इस प्रकार की गतिविधियों में रकम एक खाते से दूसरे खाते और फिर अन्य खातों में भेजी जा सकती है।
जांच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में पूरे लेनदेन का क्रम स्थापित करना महत्वपूर्ण होता है।
पुलिस अब बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड की मदद से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम किन खातों में पहुंची और वहां से आगे कैसे स्थानांतरित हुई।
बैंक खातों से नकदी निकालने की भी जांच
जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क के कुछ सदस्यों ने बैंक खातों से नकद रकम निकालने का काम भी किया।
पुलिस के अनुसार, बैंक खातों में पहुंची धनराशि को नकदी में बदलकर आगे पहुंचाने की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
इस प्रकार के लेनदेन की जांच में बैंक रिकॉर्ड, नकद निकासी का विवरण और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकदी किसे सौंपी गई और उसका आगे क्या इस्तेमाल हुआ।
हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों से कितनी नकदी या अन्य सामग्री बरामद हुई, इसका स्पष्ट विवरण उपलब्ध रिपोर्ट के अंशों में नहीं है।
विदेशी मनी-एक्सचेंज ऐप ‘U Home’ से कथित संबंध
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू विदेशी मनी-एक्सचेंज ऐप ‘U Home’ से कथित संबंध का सामने आना है।
पुलिस जांच में इस ऐप के माध्यम से संभावित वित्तीय गतिविधियों के संकेत मिलने की बात कही गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित नेटवर्क ने ऐप का किस प्रकार इस्तेमाल किया और क्या इसके माध्यम से धोखाधड़ी की रकम को आगे स्थानांतरित किया गया।
हालांकि, ऐप की भूमिका और उससे जुड़े व्यक्तियों के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
फिलहाल विदेशी ऐप से संबंध होने की बात पुलिस की जांच में सामने आई आशंका के रूप में ही देखी जानी चाहिए।
हवाला नेटवर्क से कनेक्शन की भी आशंका
दिल्ली पुलिस की जांच में कथित हवाला नेटवर्क से संबंधों की संभावना भी सामने आई है।
हवाला ऐसी अनौपचारिक धन हस्तांतरण व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें धनराशि का लेनदेन औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से अलग माध्यमों के जरिए किया जा सकता है।
इस मामले में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को किसी हवाला नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाया गया या नहीं।
यदि जांच में ऐसे संबंधों की पुष्टि होती है, तो धनराशि के अंतिम प्राप्तकर्ताओं और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान महत्वपूर्ण होगी।
हालांकि, इस चरण में हवाला नेटवर्क से संबंधों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
सात आरोपियों से पूछताछ में खुल सकते हैं नए राज
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित नेटवर्क के संचालन से संबंधित और जानकारी सामने आने की संभावना है।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि साइबर धोखाधड़ी की रकम किन लोगों के नियंत्रण में पहुंची।
इसके अतिरिक्त यह भी पता लगाया जा रहा है कि बैंक खातों का इंतजाम किसने किया और नकदी निकासी के बाद रकम कहां भेजी गई।
पुलिस के लिए कथित नेटवर्क की पूरी वित्तीय श्रृंखला का पता लगाना महत्वपूर्ण होगा।
जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
साइबर ठगी के मामलों में क्यों इस्तेमाल होते हैं कई बैंक खाते?
साइबर धोखाधड़ी के मामलों में अपराध से प्राप्त रकम को जल्दी-जल्दी विभिन्न खातों में स्थानांतरित करना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
जब किसी पीड़ित के खाते से रकम निकलती है, तो उसका शुरुआती लेनदेन बैंकिंग रिकॉर्ड में दर्ज होता है।
लेकिन यदि धनराशि कई खातों में भेजी जाए और उसके बाद नकदी निकाल ली जाए, तो पूरी वित्तीय श्रृंखला का पता लगाने के लिए अधिक जांच की आवश्यकता होती है।
इसी कारण साइबर अपराध से जुड़े मामलों में बैंक खातों की जांच, संदिग्ध लेनदेन की पहचान और वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण महत्वपूर्ण होता है।
बैंक खाते किराये पर देना पड़ सकता है भारी
साइबर अपराध से जुड़े मामलों में लोगों को अपने बैंक खाते दूसरों के इस्तेमाल के लिए देने से बचना चाहिए।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में रकम मंगवाना, उसे दूसरे खाते में भेजना या कमीशन के बदले नकदी निकालना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।
ऐसी गतिविधियों में व्यक्ति का बैंक खाता अपराध से प्राप्त रकम के हस्तांतरण में इस्तेमाल हो सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को अपने खाते में संदिग्ध रकम आने की जानकारी मिलती है, तो उसे तुरंत बैंक और संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए।
अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासवर्ड, ओटीपी और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए।
साइबर धोखाधड़ी होने पर क्या करें?
साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है।
पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले अपने बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था को सूचित करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
शिकायत करते समय संबंधित लेनदेन का विवरण, भुगतान का समय, बैंक खाते की जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखना उपयोगी होता है।
जल्दी शिकायत करने से संदिग्ध धनराशि को रोकने या उसके आगे हस्तांतरण पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
दिल्ली पुलिस की जांच जारी
करीब 3.93 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी के इस मामले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच जारी है।
जांच का प्रमुख केंद्र कथित म्यूल बैंक खातों के माध्यम से हुए लेनदेन, नकदी निकासी और विदेशी मनी-एक्सचेंज ऐप तथा संभावित हवाला संबंधों का पता लगाना है।
पुलिस के सामने यह भी चुनौती है कि धोखाधड़ी से प्राप्त रकम की पूरी वित्तीय श्रृंखला का पता लगाया जाए।
मामले में आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों, पूछताछ और जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने साइबर धोखाधड़ी में बैंक खातों के कथित दुरुपयोग और अवैध वित्तीय नेटवर्क की भूमिका को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।