दिल्ली की हवा चार महानगरों में सबसे प्रदूषित, AQI 197 पहुंचा; चेन्नई, मुंबई और कोलकाता की स्थिति बेहतर
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। त्योहारों के मौसम के बीच देश के चार प्रमुख महानगरों की वायु गुणवत्ता की तुलना में मंगलवार को दिल्ली की हवा सबसे अधिक प्रदूषित दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 197 रहा। वहीं चेन्नई में 143, मुंबई में 99 और कोलकाता में 81 AQI दर्ज किया गया।
दिल्ली का AQI 197 होने का मतलब है कि राजधानी की हवा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निर्धारित श्रेणी के अनुसार ‘मध्यम’ स्तर पर है। हालांकि यह आंकड़ा ‘खराब’ श्रेणी की सीमा के काफी करीब है। ऐसे में सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए प्रदूषण चिंता बढ़ा सकता है।
चार महानगरों में दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता के बीच वायु गुणवत्ता में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
दिल्ली का AQI 197 दर्ज किया गया, जो इन चारों महानगरों में सबसे अधिक है। चेन्नई का AQI 143 रहा, जबकि मुंबई में 99 और कोलकाता में 81 दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों के अनुसार दिल्ली और चेन्नई की हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में रही, जबकि मुंबई और कोलकाता की वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ श्रेणी में दर्ज की गई।
इस तुलना से स्पष्ट है कि चारों महानगरों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता सबसे अधिक चिंताजनक रही।
दिल्ली और चेन्नई के AQI में 54 अंकों का अंतर
दिल्ली और चेन्नई की वायु गुणवत्ता की तुलना करें तो दोनों शहरों के AQI में 54 अंकों का अंतर दर्ज किया गया।
दिल्ली का AQI 197 और चेन्नई का 143 रहा। इसका अर्थ है कि निर्धारित वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर चेन्नई की तुलना में अधिक रहा।
हालांकि चेन्नई की हवा भी पूरी तरह स्वच्छ नहीं थी। AQI 143 होने के कारण वहां की वायु गुणवत्ता भी मध्यम श्रेणी में रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यम स्तर की वायु गुणवत्ता भी सांस और फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित संवेदनशील लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
मुंबई और कोलकाता की हवा अपेक्षाकृत बेहतर
दिल्ली के मुकाबले मुंबई और कोलकाता की वायु गुणवत्ता बेहतर दर्ज की गई।
मुंबई में AQI 99 रहा, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। वहीं कोलकाता में AQI 81 दर्ज किया गया।
दिल्ली और मुंबई के AQI में 98 अंकों का अंतर रहा, जबकि दिल्ली और कोलकाता के बीच 116 अंकों का अंतर दर्ज किया गया।
चारों महानगरों में कोलकाता का AQI सबसे कम रहा। हालांकि कम AQI का अर्थ पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हवा नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि तुलना किए गए शहरों में वहां वायु प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम था।
क्या होता है AQI और कैसे मापा जाता है प्रदूषण?
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) एक ऐसा पैमाना है, जिसके माध्यम से किसी स्थान की हवा में प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जाता है।
इसमें हवा में मौजूद विभिन्न प्रदूषक तत्वों की मात्रा को ध्यान में रखा जाता है। प्रमुख प्रदूषकों में पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन शामिल हैं।
AQI का आंकड़ा जितना अधिक होता है, वायु गुणवत्ता उतनी खराब मानी जाती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु गुणवत्ता को छह श्रेणियों में विभाजित किया है।
- 0 से 50: अच्छा
- 51 से 100: संतोषजनक
- 101 से 200: मध्यम
- 201 से 300: खराब
- 301 से 400: बहुत खराब
- 401 से 500: गंभीर
इन श्रेणियों के आधार पर दिल्ली का AQI 197 मध्यम श्रेणी में आता है, लेकिन खराब श्रेणी की शुरुआत से केवल चार अंक नीचे है।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण
दिल्ली में हर साल अक्टूबर और नवंबर के दौरान वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर चर्चा का विषय बन जाती है।
राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, खुले में कचरा जलाना और क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषक तत्वों का परिवहन शामिल हैं।
मौसम संबंधी परिस्थितियां भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
सर्दियों की शुरुआत में हवा की गति कम होने और वातावरण में प्रदूषक तत्वों के फैलाव की क्षमता घटने से प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।
हालांकि 27 अक्टूबर को दर्ज AQI 197 के लिए किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराने के लिए विस्तृत प्रदूषण और मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण आवश्यक होगा।
त्योहारों के मौसम में बढ़ी चिंता
दिवाली और धनतेरस जैसे त्योहारों के आसपास दिल्ली के बाजारों में लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है।
इस दौरान प्रमुख बाजारों और सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। अधिक वाहनों की आवाजाही से उत्सर्जन में वृद्धि होने की संभावना रहती है।
इसके अलावा पटाखों से निकलने वाला धुआं भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि किसी विशेष दिन के प्रदूषण स्तर पर पटाखों, वाहनों या अन्य स्रोतों का कितना योगदान है, यह वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता पहले से मध्यम श्रेणी के ऊपरी स्तर पर होने के कारण आने वाले दिनों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
खराब हवा से किन लोगों को ज्यादा खतरा?
वायु प्रदूषण का प्रभाव सभी लोगों पर एक जैसा नहीं होता।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को प्रदूषित हवा से अधिक परेशानी हो सकती है।
अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए वायु प्रदूषण विशेष रूप से चिंताजनक हो सकता है।
प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि वायु प्रदूषण का नुकसान हमेशा खांसी या गले में जलन जैसे स्पष्ट लक्षणों के रूप में सामने नहीं आता।
प्रदूषण से बचाव के लिए क्या सावधानियां जरूरी?
वायु गुणवत्ता खराब होने की स्थिति में नागरिक कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर प्रदूषण के संपर्क को कम कर सकते हैं।
- बाहर निकलने से पहले अपने क्षेत्र का AQI देखें।
- अधिक प्रदूषण वाले समय में अनावश्यक बाहरी गतिविधियों को सीमित करें।
- सांस की बीमारी वाले लोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहें।
- अधिक प्रदूषण वाले स्थानों पर सही तरीके से फिट होने वाला N95 मास्क उपयोगी हो सकता है।
- खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने से बचें।
- निजी वाहनों के अनावश्यक उपयोग को कम करें और जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन अपनाएं।
- घर के अंदर धुएं और प्रदूषण के स्रोतों को कम रखें।
यदि सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या गंभीर स्वास्थ्य संबंधी लक्षण महसूस हों, तो चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
क्या आने वाले दिनों में और खराब हो सकती है दिल्ली की हवा?
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह और नवंबर के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति पर मौसम का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
हवा की गति, तापमान, स्थानीय उत्सर्जन और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषक तत्वों के आधार पर AQI में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
मंगलवार को दिल्ली का AQI 197 दर्ज होने से यह स्पष्ट है कि वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी की सीमा के करीब थी।
हालांकि केवल एक दिन के AQI के आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि अगले दिनों में प्रदूषण बढ़ेगा या घटेगा।
इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित मौसम एजेंसियों के ताजा आंकड़ों की निगरानी जरूरी होगी।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या केवल प्रशासन के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे उपाय वायु गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकते हैं।
इसके साथ ही नागरिकों की जागरूकता और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन भी जरूरी है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या कई प्रशासनिक सीमाओं से जुड़ी हुई है। इसलिए दिल्ली और आसपास के राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
निष्कर्ष: चार महानगरों में दिल्ली की स्थिति सबसे चिंताजनक
27 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता की तुलना में दिल्ली की वायु गुणवत्ता सबसे खराब रही।
दिल्ली का AQI 197, चेन्नई का 143, मुंबई का 99 और कोलकाता का 81 दर्ज किया गया।
दिल्ली और चेन्नई की हवा मध्यम श्रेणी में रही, जबकि मुंबई और कोलकाता में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई।
दिल्ली का AQI खराब श्रेणी के करीब पहुंचना इस बात का संकेत है कि राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और प्रदूषण नियंत्रण उपाय यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि राजधानी की हवा में सुधार होता है या प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है।