यूपी-बिहार MLC चुनाव: आम चुनाव से कितनी अलग है वोटों की गिनती? कैसे तय होता है विजेता
उत्तर प्रदेश और बिहार में विधान परिषद (MLC) चुनाव की मतगणना शुरू हो चुकी है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। हालांकि, इन चुनावों में वोटों की गिनती लोकसभा और विधानसभा चुनावों से काफी अलग तरीके से होती है। यहां सिर्फ सबसे ज्यादा वोट हासिल करना ही जीत की गारंटी नहीं है, बल्कि उम्मीदवार को निर्धारित कोटा हासिल करना भी जरूरी होता है।
यूपी-बिहार MLC चुनाव में वोटों की गिनती कैसे होती है?
विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में मतदाता बैलेट पेपर के जरिए मतदान करते हैं। इन चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। मतदान पूरा होने के बाद मतपेटियों को मतगणना केंद्रों पर लाया जाता है, जहां निर्धारित चुनावी नियमों के तहत वोटों की गिनती की जाती है।
इन चुनावों की एक खास बात यह है कि मतदाता उम्मीदवारों के सामने अपनी पसंद के क्रम में प्राथमिकता दर्ज कर सकते हैं। मतदाता अपनी पहली पसंद के उम्मीदवार के सामने ‘1’ लिखता है। इसके बाद वह चाहे तो दूसरी पसंद के उम्मीदवार के सामने ‘2’ और तीसरी पसंद के उम्मीदवार के सामने ‘3’ लिख सकता है।
मतदाता के लिए पहली प्राथमिकता दर्ज करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। अन्य प्राथमिकताएं दर्ज करना वैकल्पिक होता है।
सबसे पहले छांटे जाते हैं अवैध वोट
मतगणना शुरू होने पर सबसे पहले मतपत्रों की जांच की जाती है। इस दौरान वैध और अवैध मतों को अलग किया जाता है। मतपत्र पर निर्धारित तरीके से प्राथमिकता दर्ज नहीं होने या नियमों का उल्लंघन होने पर वोट अमान्य घोषित किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि मतदाता ने निर्धारित पेन की जगह किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल किया या प्राथमिकता के अंक गलत तरीके से दर्ज किए, तो मतपत्र की वैधता पर असर पड़ सकता है। इसी तरह, एक से अधिक उम्मीदवारों के सामने पहली प्राथमिकता लिखने जैसी गलतियां भी मतपत्र को अमान्य बना सकती हैं। हालांकि, किसी मतपत्र को अमान्य घोषित करने का अंतिम फैसला लागू निर्वाचन नियमों के अनुसार किया जाता है।
क्या है जीत का कोटा और क्यों है जरूरी?
MLC चुनाव की मतगणना में जीत का कोटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रणाली में उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित होने के लिए निर्धारित संख्या में वैध वोट हासिल करने होते हैं।
एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) के तहत जहां लागू हो, जीत का कोटा कुल वैध मतों और भरी जाने वाली सीटों के आधार पर तय किया जाता है। एक सीट वाले चुनाव में सामान्य तौर पर कोटा कुल वैध मतों को दो से भाग देकर उसमें एक जोड़ने से प्राप्त होता है।
इसका मतलब है कि केवल दूसरे उम्मीदवार से अधिक वोट हासिल करना पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार को निर्धारित कोटा प्राप्त करना होता है।
पहली पसंद के वोटों की होती है गिनती
मतगणना के पहले चरण में उम्मीदवारों को मिले पहली प्राथमिकता वाले वैध वोट गिने जाते हैं। इसके बाद देखा जाता है कि क्या किसी उम्मीदवार ने जीत के लिए निर्धारित कोटा हासिल कर लिया है।
यदि कोई उम्मीदवार पहली गिनती में ही आवश्यक कोटा प्राप्त कर लेता है, तो उसे निर्वाचित घोषित किया जा सकता है। लेकिन अगर किसी उम्मीदवार को जरूरी कोटा नहीं मिलता, तो मतगणना आगे बढ़ती है।
कोटा नहीं मिलने पर क्या होता है?
यदि पहली गिनती में कोई भी उम्मीदवार जीत का कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो लागू नियमों के तहत सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर किया जा सकता है। इसके बाद उस उम्मीदवार के मतपत्रों पर दर्ज अगली उपलब्ध प्राथमिकता के अनुसार वोट दूसरे उम्मीदवारों को स्थानांतरित किए जाते हैं।
इसके बाद दोबारा वोटों की गिनती होती है। यदि किसी उम्मीदवार को आवश्यक कोटा मिल जाता है, तो उसे विजेता घोषित किया जा सकता है। यदि ऐसा नहीं होता, तो नियमों के अनुसार आगे की गिनती और वोटों का स्थानांतरण जारी रहता है।
यह प्रक्रिया तब तक चल सकती है, जब तक सभी सीटों के लिए उम्मीदवार निर्वाचित नहीं हो जाते या लागू निर्वाचन नियमों के तहत परिणाम तय नहीं हो जाता।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव से कैसे अलग है MLC चुनाव?
लोकसभा और विधानसभा के आम चुनावों में सामान्य तौर पर सबसे ज्यादा वैध वोट पाने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाता है। इसके विपरीत, विधान परिषद के उन चुनावों में जहां एकल संक्रमणीय मत प्रणाली लागू होती है, प्राथमिकता वाले वोट और जीत का निर्धारित कोटा अहम होते हैं।
इसलिए MLC चुनाव की मतगणना में केवल शुरुआती वोटों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं होता। उम्मीदवारों के बीच वोटों का स्थानांतरण भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है।
कब आएंगे यूपी और बिहार MLC चुनाव के नतीजे?
मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जरूरी औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बाद परिणाम घोषित किए जाते हैं। हालांकि, नतीजे घोषित होने का सटीक समय मतगणना की प्रगति और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में अब सभी की नजर मतगणना के अंतिम परिणामों पर है। इन चुनावों में प्राथमिकता वाले वोटों की भूमिका के कारण अंतिम नतीजे समझने के लिए वोटों की गिनती की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी है।
नोट: मतगणना के चरण और मतपत्रों की वैधता से जुड़े नियम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र और लागू चुनावी प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होते हैं। ताजा परिणामों और आधिकारिक घोषणाओं के लिए निर्वाचन आयोग की जानकारी देखें।