पीवी सिंधु की एशियन गेम्स 2026 में हार, बोलीं- मेरे पास मौका था, उसे गंवाना दुख देता है
भारतीय बैडमिंटन स्टार और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु एशियन गेम्स 2026 के महिला एकल क्वार्टर फाइनल में चीन की चेन यूफेई के खिलाफ हार गईं। सिंधु ने मुकाबले की शुरुआत शानदार अंदाज में की और पहला गेम 21-11 से अपने नाम किया, लेकिन इसके बाद चेन यूफेई ने जोरदार वापसी करते हुए दूसरा गेम 21-18 और निर्णायक गेम 21-10 से जीत लिया। इस हार के साथ सिंधु का एशियन गेम्स अभियान क्वार्टर फाइनल में समाप्त हो गया।
पहले गेम में सिंधु का दबदबा
सिंधु ने मुकाबले के पहले गेम में आक्रामक खेल दिखाया। उनकी तेज स्मैश और सटीक शॉट्स के सामने चेन यूफेई शुरुआत में संघर्ष करती नजर आईं। सिंधु ने 21-11 से पहला गेम जीतकर मुकाबले में बढ़त बना ली।
दूसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। सिंधु एक समय 11-10 से आगे थीं और स्कोर 16-16 तक बराबरी पर रहा। इसके बाद सिंधु ने एक शानदार स्मैश लगाकर 17-16 की बढ़त बनाई, लेकिन चेन ने लगातार अंक हासिल करते हुए गेम 21-18 से अपने नाम कर लिया।
निर्णायक गेम में सिंधु की शुरुआत भी अच्छी रही, लेकिन जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, चेन यूफेई ने लंबी रैलियों के जरिए दबाव बढ़ाया। चेन ने निर्णायक गेम 21-10 से जीतकर मुकाबला 2-1 से अपने नाम कर लिया।
18 घंटे में खेले तीन मुकाबले
सिंधु ने अपनी हार के बाद मुकाबले के साथ-साथ व्यस्त शेड्यूल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने करीब 18 घंटे के भीतर तीन मैच खेले। शनिवार को उनके दो मुकाबले थे और दूसरा मैच देर रात समाप्त हुआ। होटल पहुंचने, डिनर और रिकवरी के बाद वह करीब सुबह 3 बजे आराम कर पाईं। इसके कुछ ही घंटे बाद उन्हें दोबारा कोर्ट पर उतरना था।
सिंधु ने कहा कि इस शेड्यूल का शरीर पर असर पड़ा। उन्होंने रिकवरी को अहम बताते हुए कहा कि केवल मानसिक रूप से तैयार होना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि लगातार मुकाबलों के बीच शरीर को पर्याप्त आराम की भी जरूरत होती है।
‘मेरे पास मौका था, उसे गंवाना दुख देता है’
क्वार्टर फाइनल में हार के बाद सिंधु ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने विचारों को शब्दों में ढालने के लिए थोड़ा समय चाहिए था। उनके मुताबिक, मुकाबले में वह जीत से सिर्फ तीन अंक दूर थीं और उन पलों को वह बार-बार याद कर रही हैं।
सिंधु ने कहा कि महत्वपूर्ण मौकों पर लंबी और मुश्किल रैलियों का असर मुकाबले का रुख बदल गया। उन्होंने हालिया चीन अभियान का भी जिक्र किया, जहां निर्णायक मौकों पर ऐसी ही स्थिति सामने आई थी।
हार को सफर की पहचान नहीं बनने देंगी
सिंधु ने साफ किया कि वह इस हार को अपने लंबे करियर और एशियन गेम्स के सफर की पहचान नहीं बनने देना चाहतीं। 2026 एशियन गेम्स उनके करियर का चौथा एशियन गेम्स था। उन्होंने 2014 में एशियन गेम्स में डेब्यू किया था और 2014 में कांस्य तथा 2018 में रजत पदक जीता था।
उन्होंने कहा कि एक दर्दनाक नतीजा उस सफर को परिभाषित नहीं कर सकता, जो उनके लिए बेहद मायने रखता है। सिंधु ने यह भी कहा कि वह अब भी खेल को लेकर उतनी ही उत्साहित हैं और कोर्ट पर अपना सबकुछ देना चाहती हैं।
‘मैं अभी भी यह चाहती हूं’
सिंधु के संदेश में हार का दर्द साफ दिखाई दिया, लेकिन इसके साथ आगे बढ़ने का संकल्प भी नजर आया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम पहले ही उन मौकों पर काम कर रही है, जहां मैच उनके हाथ से निकल गया।
सिंधु के मुताबिक, टीम इन कमियों को सुधारने पर काम करेगी। उन्होंने अपने समर्थकों का भी शुक्रिया अदा किया, जो देर रात तक उनके मुकाबले देखते रहे और उनका समर्थन करते रहे।
एशियन गेम्स में इस बार भारतीय बैडमिंटन टीम का अभियान भी अपेक्षाओं के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका। पुरुष टीम स्पर्धा में भारत ने कांस्य पदक जीता, जबकि व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों को पदक नहीं मिला।