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टोंक सुमन हत्या मामला: प्रेमिका की हत्या में मां-बेटे समेत एक ही परिवार के 4 लोगों को उम्रकैद

By aonenewstv | Published: Oct 01, 2026 08:09 AM

टोंक सुमन हत्या मामला: प्रेमिका की हत्या में मां-बेटे समेत 4 को उम्रकैद

जयपुर/टोंक। राजस्थान के टोंक जिले में करीब चार साल पुराने सुमन हत्या मामले में विशेष एससी/एसटी अदालत ने फैसला सुनाते हुए एक ही परिवार के चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में सुमन के प्रेमी प्रधान, उसकी मां संजना, भाई सवाई राम और बहन सुशीला शामिल हैं। अदालत ने चारों पर कुल 1.35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

शादी को लेकर विवाद के बाद हत्या की साजिश

मामला साल 2022 का है। मृतका सुमन की आरोपी प्रधान के साथ प्रेम संबंध था। दोनों जयपुर में रहते थे और मूल रूप से टोंक जिले के रहने वाले थे। अभियोजन के मुताबिक, सुमन और प्रधान अलग-अलग जातियों से थे। सुमन प्रधान से शादी करना चाहती थी और कथित तौर पर उस पर शादी के लिए दबाव बना रही थी।

आरोप है कि प्रधान ने शादी से बचने के लिए अपनी मां संजना, भाई सवाई राम और बहन सुशीला के साथ मिलकर सुमन की हत्या की साजिश रची।

श्राद्ध के बहाने गांव बुलाया

अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रधान ने सुमन को श्राद्ध कार्यक्रम के बहाने गांव बुलाया। आरोप है कि वहां उसे जहरीला रसायन पिला दिया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद परिजनों को बताया गया कि सुमन की मौत सांप के काटने से हुई है। सितंबर 2022 में परिवार ने इसी जानकारी के आधार पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि, बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया। रिपोर्ट में सामने आया कि सुमन की मौत सांप के काटने से नहीं बल्कि जहरीला रसायन खाने से हुई थी।

ATM कार्ड से निकाले गए करीब 80 हजार रुपये

जांच के दौरान पुलिस को सुमन के बैंक खाते से करीब 80 हजार रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके ATM कार्ड का इस्तेमाल प्रधान ने किया था। इससे पुलिस का शक और गहरा हुआ।

सुमन के भाई की शिकायत पर मई 2023 में मामला दर्ज किया गया। जांच में पुलिस ने प्रेम संबंध, शादी के दबाव और कथित साजिश से जुड़े पहलुओं को सामने रखा।

27 गवाहों और 37 दस्तावेजों के आधार पर फैसला

टोंक की विशेष एससी/एसटी अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों पर विचार किया। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने 27 गवाहों के बयान और 37 दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाया। चारों आरोपियों को हत्या और संबंधित एससी/एसटी कानून के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी गई।

अदालत ने चारों दोषियों पर कुल 1.35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

फैसले में जज ने लिखी कविता

इस मामले के फैसले की एक खास बात यह रही कि न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने अपने निर्णय में 10 पंक्तियों की एक कविता भी शामिल की। रिपोर्टों के मुताबिक, कविता में हत्या, विश्वासघात और रिश्ते में जातिगत अंतर के संदर्भों को सामने रखा गया।

 

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