अमेरिकी डीजल निर्यात प्रतिबंध पर ट्रंप का बड़ा बयान, बढ़ती कीमतों के बीच एक्सपोर्ट रोकने पर विचार
रिपोर्टर: दीप सिंह, लखनऊ मुख्य संवाददाता
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द
नई दिल्ली। अमेरिका में डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डीजल के निर्यात पर रोक लगाने के विचार का समर्थन किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को विदेशों में डीजल भेजने के बजाय घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन में इस मुद्दे पर पूरी तरह एक राय नहीं है और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने साफ तौर पर कहा है कि पूर्ण निर्यात प्रतिबंध प्रभावी समाधान नहीं होगा।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची डीजल की कीमत
अमेरिका में डीजल की कीमतें हाल के दिनों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हैं। AAA के आंकड़ों के मुताबिक 23 सितंबर को अमेरिका में औसत डीजल कीमत करीब 6.52 डॉलर प्रति गैलन थी, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 76 फीसदी अधिक थी। बढ़ती कीमतों का असर खेती, ट्रकिंग और निर्माण जैसे डीजल पर निर्भर क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
ट्रंप ने 22 सितंबर को कहा था कि वह डीजल को अमेरिका से बाहर भेजने पर रोक लगाने के विचार का समर्थन करते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी उस समय कहा था कि प्रशासन यह देख रहा है कि पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध व्यावहारिक होगा या नहीं।
क्रिस राइट ने क्या कहा?
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने राष्ट्रपति के रुख से अलग राय रखते हुए कहा कि डीजल के निर्यात पर सीधा प्रतिबंध लगाना एक ऐसा कदम होगा जो अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकता। उनके मुताबिक इससे डीजल के साथ-साथ गैसोलीन और जेट फ्यूल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
प्रशासन की ओर से अब ऐसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है जिनके जरिए अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार में अधिक ईंधन उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इसमें आर्थिक या टैक्स प्रोत्साहन जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
अमेरिका क्यों रोकना चाहता है डीजल का निर्यात?
अमेरिका में डीजल की कीमतों में वृद्धि का संबंध केवल घरेलू मांग से नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भी ईंधन की कीमतों पर दबाव है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक तेल और रिफाइंड ईंधन आपूर्ति पर असर पड़ा है। रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के बाद वहां से डीजल निर्यात भी प्रभावित हुआ है।
अमेरिका दुनिया के बड़े डीजल निर्यातकों में शामिल है। ऐसे समय में यदि अमेरिकी डीजल की बड़ी मात्रा अंतरराष्ट्रीय बाजार से हटती है, तो वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया पर क्यों पड़ सकता है असर?
अमेरिकी डीजल निर्यात में संभावित कटौती का असर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया सीधे तौर पर बड़ी मात्रा में अमेरिकी डीजल पर निर्भर नहीं है, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदता है। इसलिए वैश्विक कीमतों में तेजी का असर वहां भी पहुंच सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई ऊर्जा बाजार को लेकर कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका व्यापक निर्यात प्रतिबंध लागू करता है और मध्य पूर्व की आपूर्ति बाधाएं भी बनी रहती हैं, तो वहां डीजल की कीमतों और उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि, ये संभावित प्रभाव हैं और वास्तविक असर प्रतिबंध की प्रकृति तथा वैश्विक आपूर्ति परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
प्रतिबंध से अमेरिका में भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
डीजल निर्यात रोकने के प्रस्ताव को लेकर एक महत्वपूर्ण तर्क यह है कि अमेरिकी रिफाइनरियां डीजल के साथ दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद भी बनाती हैं। यदि निर्यात बंद होने के बाद घरेलू बाजार में डीजल का भंडार बढ़ जाता है और रिफाइनरियों के पास अतिरिक्त उत्पादन रखने की क्षमता सीमित हो जाती है, तो कंपनियां उत्पादन कम कर सकती हैं।
ऐसी स्थिति में डीजल के साथ गैसोलीन और जेट फ्यूल का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। कुछ ऊर्जा विश्लेषकों ने इसी वजह से चेतावनी दी है कि निर्यात प्रतिबंध का उद्देश्य घरेलू ईंधन कीमतों को कम करना हो, लेकिन इसके कुछ अप्रत्याशित परिणाम भी हो सकते हैं।
पूर्ण प्रतिबंध के बजाय दूसरे विकल्पों पर चर्चा
अमेरिकी प्रशासन के सामने अब पूर्ण प्रतिबंध के अलावा कई विकल्प हैं। इनमें अमेरिकी ईंधन कंपनियों को घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति करने के लिए प्रोत्साहन देना, निर्यात पर आंशिक सीमा लगाना या कुछ परिस्थितियों में निर्यात को नियंत्रित करना शामिल हो सकता है। ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी संकेत दिया है कि प्रशासन ऐसे उपायों पर विचार कर रहा है जिनसे घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।
फिलहाल किसी अंतिम नीति की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन पूर्ण निर्यात प्रतिबंध लगाएगा, सीमित अवधि के लिए कोई कोटा तय करेगा या फिर कंपनियों को घरेलू बाजार में ईंधन भेजने के लिए प्रोत्साहन देने का रास्ता अपनाएगा।
दुनिया के डीजल बाजार पर नजर
अमेरिकी डीजल निर्यात में किसी भी बड़ी कटौती का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रह सकता। यूरोप, लैटिन अमेरिका और एशिया के कई बाजार अंतरराष्ट्रीय डीजल कारोबार पर निर्भर हैं। ऐसे में अमेरिका से होने वाले निर्यात में कमी वैश्विक बाजार में उपलब्ध ईंधन की मात्रा को प्रभावित कर सकती है।
इस समय वैश्विक ईंधन बाजार पहले ही कई आपूर्ति बाधाओं का सामना कर रहा है। इसलिए अमेरिकी नीति में बदलाव को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन डीजल निर्यात को लेकर पूर्ण प्रतिबंध, आंशिक नियंत्रण या घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन में से कौन सा रास्ता अपनाता है।