अंकिता भंडारी केस: राहुल गांधी ने राष्ट्रपति मुर्मु को लिखा पत्र, दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर दोबारा विचार करने की अपील
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से अपील की है कि दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर दोबारा विचार किया जाए। राहुल गांधी की मांग है कि अंकिता भंडारी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने तक नियुक्ति की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
यह मामला उस समय फिर चर्चा में आया, जब अंकिता के माता-पिता दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध में दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठे। बुधवार, 14 अक्टूबर को राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने धरनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया।
राष्ट्रपति से नियुक्ति पर पुनर्विचार की अपील
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि अंकिता भंडारी मामले की जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल नियुक्त करने की प्रक्रिया रोकने पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि मामले में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवाल अब भी उठ रहे हैं और पीड़ित परिवार लंबे समय से जवाब मांग रहा है।
राहुल गांधी ने इस मामले में जांच की गति और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक उसकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
इंडिया गेट पर धरने में शामिल हुए राहुल और प्रियंका
अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग को लेकर इंडिया गेट पर धरने पर बैठे थे। परिवार ने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर आपत्ति जताई है।
धरनास्थल पर पहुंचे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने परिवार से मुलाकात की। अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने राष्ट्रपति से अपील की कि जब तक सीबीआई की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति आगे न बढ़ाई जाए। अंकिता की मां सोनी देवी ने भी इस नियुक्ति को लेकर दुख जताया और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की। <
अंकिता भंडारी हत्याकांड में क्या है मामला?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। <
हालांकि, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर अंकिता के परिवार और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। परिवार की मांग है कि इस पहलू की भी पूरी जांच हो और सभी सवालों के जवाब सामने आएं। दुष्यंत कुमार गौतम का नाम इस विवाद में आरोपों के संदर्भ में उठाया गया है। इन आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
धरने के बाद पुलिस कार्रवाई पर भी विवाद
15 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर रातभर जारी धरने के दौरान अंकिता के माता-पिता और कुछ कांग्रेस नेताओं सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की और आरोप लगाया कि न्याय की मांग कर रहे लोगों के साथ सख्ती की गई। इस घटना के बाद भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रही।
मामले पर राजनीतिक टकराव तेज
अंकिता भंडारी मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार और कथित वीआईपी पहलू की जांच की मांग उठाई है। वहीं, भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार की ओर से पहले की गई कार्रवाई और अदालत में दोषियों को मिली सजा का हवाला दिया है।
फिलहाल, इस विवाद का केंद्र अंकिता के परिवार की मांग, सीबीआई जांच और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति को लेकर उठे सवाल हैं। आगे की स्थिति जांच की प्रगति और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।