📅 Loading Date & Time...
होम > ताजा > न्यूज़

PM Modi Mohan Bhagwat Speech: संघ प्रमुख के संबोधन की तारीफ

By aonenewstv | Published: Oct 20, 2026 05:13 AM

पीएम मोदी ने की मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की तारीफ, सेवा और राष्ट्र निर्माण पर दिया जोर

उपशीर्षक: RSS के शताब्दी वर्ष पर नागपुर में संघ प्रमुख ने सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों पर चिंता जताई; प्रधानमंत्री ने स्वयंसेवकों की सेवा भावना और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को सराहा।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की सराहना की है। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में दिए गए संबोधन में मोहन भागवत ने समाज, संस्कृति, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देने के लिए संघ प्रमुख की तारीफ की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज की सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक के महत्वपूर्ण मूल्य हैं। उनके संदेश में सेवा भाव, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के प्रति प्रतिबद्धता को प्रमुखता दी गई।

सेवा और राष्ट्र निर्माण पर पीएम मोदी का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहन भागवत के संबोधन में सेवा और राष्ट्र निर्माण को दिए गए महत्व की सराहना की। उन्होंने इन मूल्यों को संघ के स्वयंसेवकों की कार्यशैली का अहम हिस्सा बताया। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिया गया यह संबोधन संगठन की विचारधारा, सामाजिक भूमिका और भविष्य की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संघ की ओर से सेवा गतिविधियों और सामाजिक कार्यों को लंबे समय से संगठनात्मक जीवन का हिस्सा बताया जाता रहा है। प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया में भी सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित के लिए काम करने की भावना पर जोर दिखाई दिया।

मोहन भागवत ने पश्चिमी प्रभाव को लेकर जताई चिंता

नागपुर में विजयादशमी के अवसर पर संबोधन देते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिम से आने वाले प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिम से ऐसी आंधी चली है, जो हर तरह की व्यवस्था, भद्रता, सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संस्कारों को नष्ट करना चाहती है।

भागवत के इस बयान में सांस्कृतिक पहचान और मानवीय मूल्यों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उन्होंने बदलते वैश्विक माहौल के बीच समाज की व्यवस्था, परंपराओं और संस्कारों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।

‘रिजीम चेंज’ से परिस्थिति बदलने पर उठाए सवाल

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता या शासन व्यवस्था में बदलाव के जरिए परिस्थितियां बदलने के दावे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और आज भी नहीं हो रहा है।

उनकी टिप्पणी का आशय यह था कि केवल सत्ता या व्यवस्था में बदलाव से समस्याओं का समाधान सुनिश्चित नहीं होता। सामाजिक परिस्थितियों में वास्तविक सुधार के लिए व्यापक प्रयासों और मूलभूत विषयों पर ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, इस टिप्पणी को संबोधन के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है।

संघ के शताब्दी वर्ष में संबोधन का महत्व

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन की यात्रा, सामाजिक योगदान और भविष्य की भूमिका को लेकर चर्चा कर रहा है। विजयादशमी पर नागपुर में संघ प्रमुख का संबोधन संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण वार्षिक अवसर होता है, जिसमें वह अपने विचार और प्राथमिकताएं सामने रखते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा और मोहन भागवत के संबोधन में उठाए गए मुद्दों ने सेवा, राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों को फिर चर्चा में ला दिया है। दोनों संदेशों में अपने-अपने संदर्भ में राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का विषय प्रमुख रहा।

Scroll to Top