जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की बढ़ीं मुश्किलें, मुबारक गुल 4 नवंबर को खोलेंगे अपने पत्ते
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर असंतोष के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान के बाद अब वरिष्ठ नेता और ईदगाह विधानसभा क्षेत्र से विधायक मुबारक गुल भी चर्चा में हैं। छह बार विधायक रह चुके मुबारक गुल ने पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम पर 4 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखने की बात कही है। उनके इस ऐलान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस में यह असंतोष हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सामने आया है। पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक मंत्रियों के चयन और संगठन में फैसले लेने के तरीके से नाराज बताए जा रहे हैं। कुछ विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखने के लिए बैठक भी की है।
कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस फेरबदल में कुछ नए चेहरों को मंत्री बनाया गया, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इसी को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी सामने आई।
मुबारक गुल भी उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। उनके समर्थक लगातार विरोध जता रहे हैं और नेतृत्व से उन्हें सरकार में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के करीब 17 से 20 विधायकों ने बैठक कर संगठन में बदलाव और सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। विधायकों की ओर से मंत्रिमंडल में बदलाव, चुनावी वादों को पूरा करने और पार्टी के भीतर अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग उठाई गई है।
महासचिव बनाने के बाद फिर बदला फैसला
मुबारक गुल की नाराजगी उस समय और चर्चा में आ गई, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया था। यह नियुक्ति अली मोहम्मद सागर के मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद की गई थी।
हालांकि, कुछ ही दिनों बाद पार्टी ने नया आदेश जारी कर अली मोहम्मद सागर को ही अगले आदेश तक महासचिव बने रहने की जिम्मेदारी दे दी। इस घटनाक्रम के बाद मुबारक गुल की नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई।
इसी बीच मुबारक गुल ने संकेत दिया कि वह पार्टी के अंदर चल रहे घटनाक्रम पर चुप्पी तोड़ेंगे। उन्होंने 4 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखने का ऐलान किया है।
छह बार विधायक रह चुके हैं मुबारक गुल
मुबारक गुल नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह श्रीनगर की ईदगाह विधानसभा सीट से छह बार विधायक चुने जा चुके हैं और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पूर्व स्पीकर भी रह चुके हैं।
लंबे समय से पार्टी से जुड़े होने के कारण संगठन में उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान मानी जाती है। ऐसे में उनके अगले कदम को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है।
रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे से भी पार्टी को झटका
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष के बीच श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने भी पार्टी छोड़ने और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने 3 नवंबर को इस्तीफा देने की बात कही थी।
रूहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक कैदियों की रिहाई और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
रूहुल्लाह के इस फैसले ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को और चर्चा में ला दिया है। उनके इस्तीफे के बाद श्रीनगर लोकसभा सीट खाली होने की स्थिति भी बन सकती है।
पार्टी नेतृत्व असंतोष दूर करने में जुटा
पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को देखते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं से बातचीत कर रहा है। वरिष्ठ नेताओं के जरिए विधायकों की शिकायतें सुनने और मतभेदों को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी ओर, पार्टी के कश्मीर प्रांतीय अध्यक्ष शोएब अहमद मीर ने बगावत की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी के भीतर किसी तरह की बगावत नहीं है। उनका कहना है कि विधायकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और नेतृत्व उनकी चिंताओं पर विचार करेगा।
4 नवंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजरें मुबारक गुल की 4 नवंबर को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि वह पार्टी महासचिव पद को लेकर हुए घटनाक्रम और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पैदा हुई नाराजगी पर अपनी बात रख सकते हैं।
हालांकि, अभी तक मुबारक गुल ने पार्टी छोड़ने या विधायक पद से इस्तीफा देने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए उनके अगले कदम को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष को संभालने की है। आने वाले दिनों में मुबारक गुल और अन्य नाराज नेताओं का रुख तय करेगा कि यह विवाद केवल संगठनात्मक नाराजगी तक सीमित रहता है या पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता है।