दिल्ली के आस्था कुंज पार्क सामूहिक दुष्कर्म मामले में बड़ा अपडेट, तीनों आरोपियों के खिलाफ 500 पन्नों की चार्जशीट की तैयारी
नई दिल्ली: दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में नाबालिग के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जांच तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस इस मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारियों ने केस को मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक सबूत, गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं।
पुलिस का प्रयास है कि अदालत में आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से पेश किया जाए, ताकि मामले की सुनवाई के दौरान जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे जा सकें।
500 पन्नों की चार्जशीट में शामिल होंगे अहम सबूत
जांच अधिकारियों के मुताबिक, तीनों आरोपियों के खिलाफ केस को मजबूत बनाने के लिए कई तरह के साक्ष्य जुटाए गए हैं। इनमें टाइम-स्टैम्प्ड सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक सबूत और गवाहों के बयान शामिल हैं।
इसके अलावा जांच के दौरान किए गए टेस्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी चार्जशीट का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुलिस इन सभी तथ्यों को जोड़कर घटना से संबंधित परिस्थितियों और आरोपियों की कथित भूमिका को अदालत के सामने रखने की तैयारी में है।
60 गवाहों के बयान भी होंगे अहम
इस मामले में करीब 60 गवाहों के बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जांच के दौरान जुटाए गए बयानों और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ रही है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्य मामले की सुनवाई में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच
पुलिस ने तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी चैट हिस्ट्री डिलीट कर दी थी। अब जांच एजेंसियां डिलीट किए गए डिजिटल डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं।
मोबाइल फोन से मिलने वाले डेटा के जरिए आरोपियों की आपसी बातचीत और घटना से जुड़े संभावित डिजिटल सुरागों की जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्य इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
वरिष्ठ अधिकारी कर रहे मामले की निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी जांच की निगरानी कर रहे हैं। केस की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए एक स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति भी की गई है।
पुलिस का ध्यान जांच से जुड़े सभी जरूरी साक्ष्यों को चार्जशीट में शामिल करने और अदालत में मजबूत तरीके से मामला रखने पर है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद आगे बढ़ेगी कानूनी प्रक्रिया
करीब 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार होने के बाद उसे अदालत में दाखिल किया जाएगा। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से जुटाए गए साक्ष्य, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगे।
नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पीड़िता की पहचान और उससे संबंधित निजी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। अब सभी की नजर पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर है।