यमन में भीषण हवाई हमला, 22 लोगों की मौत, महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग घायल
यमन में एक बार फिर हवाई हमलों ने तबाही मचा दी है। राजधानी सना के पास स्थित अल-शरिया गांव में कई घरों को निशाना बनाया गया। इस हमले में कम से कम 22 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों और घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हमले के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और कई मकान मलबे में तब्दील हो गए।
इस घटना ने यमन में जारी संघर्ष के मानवीय संकट को एक बार फिर सामने ला दिया है। हालांकि, हमले को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं और इसकी जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हूती स्वास्थ्य मंत्रालय ने सऊदी अरब पर लगाया आरोप
यमन के हूती नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अलसबाही ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) से बातचीत में इन हवाई हमलों के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है। उनके मुताबिक, अल-शरिया गांव में कई घरों पर हवाई हमले किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान चली गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सऊदी अरब के अधिकारियों की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ऐसे में हमले के पीछे किसकी भूमिका थी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अस्पताल में घायल बच्चों की तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता
हूती मीडिया अल-मसीरा टीवी ने हमले के बाद के कुछ दृश्य प्रसारित किए हैं। फुटेज में एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाते हुए दिखाया गया। अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मी घायल बच्चों और अन्य लोगों का इलाज करते नजर आए।
गांव से सामने आए दृश्यों में कई मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दिए। चारों तरफ मलबा और धूल फैली हुई थी। हमले के बाद कई लोग अपनी जान बचाने के लिए आसपास के कृषि क्षेत्रों में चले गए।
हूती अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि राहत और बचाव कार्य में जुटे लोगों को भी बाद के हमलों में निशाना बनाया गया। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक दिन पहले बाजार पर हमले में 30 लोगों की मौत का दावा
अल-शरिया गांव पर हमले से ठीक एक दिन पहले दक्षिणी यमन के ताइज प्रांत में एक बाजार पर हवाई हमला हुआ था। हूती अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी।
इस घटना को लेकर भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। हूती विद्रोहियों ने यमन की सऊदी समर्थित सेना को जिम्मेदार ठहराया, जबकि दूसरी तरफ से भी हूतियों पर आरोप लगाए गए।
लगातार हो रहे हमलों ने यमन में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बाजार और रिहायशी इलाकों में हमलों की खबरों से मानवीय संकट और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
यमन का संघर्ष अब क्षेत्रीय तनाव का हिस्सा
यमन में वर्ष 2014 से गृहयुद्ध जारी है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर रखा है। वहीं, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है।
इस संघर्ष में सऊदी अरब और ईरान की भूमिका के कारण मामला केवल यमन के आंतरिक विवाद तक सीमित नहीं रहा है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों पर भी इसका असर पड़ता रहा है।
हूतियों ने हाल के महीनों में सऊदी अरब के तेल और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने वाले हमले भी तेज किए हैं। दूसरी तरफ सऊदी नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन हूती ठिकानों पर कार्रवाई करता रहा है।
युद्धविराम टूटने के बाद फिर तेज हुई हिंसा
यमन में लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांति रहने के बाद गर्मियों में संघर्ष फिर तेज हो गया। हूती विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों और जवाबी कार्रवाइयों ने देश के कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण कर दिए हैं।
सितंबर में हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तटवर्ती इलाकों और रणनीतिक द्वीपों में अपनी पकड़ मजबूत की थी। इसके साथ ही ताइज शहर के आसपास भी सैन्य गतिविधियां बढ़ीं।
अल-शरिया गांव पर हुआ ताजा हमला इसी बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। लगातार हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिकों को उठानी पड़ रही है।