रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक और विवाद के कारण सुर्खियों में है। रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने पहुंचीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर कथित तौर पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने स्याही फेंकने वाले युवक को हिरासत में ले लिया।
एक तरफ आंदोलन स्थल पर इस घटना से माहौल गरमाया, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बातचीत का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को समझना चाहती है और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
नेहा बोरा पर स्याही फेंकने से हंगामा
JPSC-JSSC विवाद को लेकर रांची में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी दौरान आंदोलन स्थल पर नेहा बोरा भी छात्रों के समर्थन में पहुंचीं। इसी बीच उन पर स्याही फेंके जाने की घटना हुई।
घटना के बाद पुलिस ने मौके से एक युवक को हिरासत में लिया। हालांकि, स्याही फेंकने के पीछे उसकी मंशा क्या थी और वह किसी संगठन या व्यक्ति से जुड़ा है या नहीं, इसकी आधिकारिक जांच की जानकारी सामने आना बाकी है।
नेहा बोरा ने घटना के बाद कहा कि इससे उनका आंदोलन कमजोर नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस और पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया था।
उन्होंने कहा कि जब वे उन परिस्थितियों से नहीं डरीं तो स्याही फेंके जाने से भी आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि छात्रों की आवाज उठाने का सिलसिला जारी रहेगा।

CM हेमंत सोरेन ने दिया बातचीत का भरोसा
इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JPSC-JSSC उम्मीदवारों के आंदोलन को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों से बातचीत करने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार ने बातचीत के लिए एक माध्यम पहले ही तय कर रखा है। उनका कहना है कि सरकार प्रत्येक छात्र की समस्या को समझना चाहती है और छात्रों की मांगों के अनुरूप व्यापक सुधार की दिशा में काम किया जाएगा।
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के छात्र-छात्राएं इस विषय पर अपने विचार रख सकते हैं। सरकार का उद्देश्य छात्रों की जिज्ञासाओं और चिंताओं को समझकर भर्ती व्यवस्था में मजबूत सुधार की दिशा में आगे बढ़ना है।
आंदोलन के पीछे क्या है विवाद?
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र लगातार पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।
मामला बढ़ने के साथ अब यह मुद्दा केवल परीक्षा परिणाम या भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकार और छात्रों के बीच संवाद का विषय भी बन गया है।
विधायक जयराम महतो ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के विधायक जयराम महतो ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने एक कथित आरोपी के परीक्षा परिणाम और उसके परिवार के सदस्यों के चयन का जिक्र करते हुए संबंधित परीक्षाओं की गहन जांच की मांग की। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति पर सवाल उठ रहे हैं, उसकी ओर से दी गई परीक्षाओं और संबंधित एजेंसी की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं की भी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही हो सकेगी।
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
वहीं, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने रांची में प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों के साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संवाद को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मामले की जांच को लेकर गंभीरता है तो मुख्यमंत्री से CBI जांच कराने की मांग क्यों नहीं की गई। संजय सेठ ने राहुल गांधी के संवाद को लेकर इसे दिखावे की राजनीति बताया।
इस बयान के बाद JPSC-JSSC विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होती नजर आ रही है।
आगे क्या होगा?
छात्र आंदोलन के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच औपचारिक बातचीत कब शुरू होती है और उससे क्या समाधान निकलता है।
मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत और सुधार का भरोसा दिए जाने के बाद गेंद अब छात्रों और सरकार दोनों के पाले में है। दूसरी ओर नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की घटना की जांच भी अहम होगी, क्योंकि आंदोलन के दौरान इस तरह की घटनाएं विवाद को और बढ़ा सकती हैं।