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Ferozepur Stubble Burning 2026: 23 Farm Fire Cases Reported, 10 FIRs Registered in Punjab

By aonenewstv | Published: Oct 22, 2026 11:32 AM

पंजाब के फिरोजपुर में पराली जलाने पर प्रशासन सख्त, 23 घटनाएं दर्ज, 10 मामलों में FIR; खेतों में पहुंचकर आग बुझा रहे अधिकारी

फिरोजपुर जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक खेतों में आग लगाने की 23 घटनाएं सामने आई हैं, जबकि 10 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। एडीसी (डी) कृष्णा पाल राजपूत ने अधिकारियों को आग लगने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर उसे बुझाने के निर्देश दिए हैं।

फिरोजपुर, 22 अक्टूबर 2026। पंजाब के फिरोजपुर जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। खेतों में फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद जिले में अब तक पराली जलाने की 23 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने के मामलों में कार्रवाई करते हुए 10 एफआईआर दर्ज की हैं।

जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खेतों में आग लगने की सूचना मिलने पर केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित न रहें, बल्कि तत्काल मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई भी सुनिश्चित करें।

प्रशासन का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर रोकना और उनसे होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

फिरोजपुर में अब तक पराली जलाने की 23 घटनाएं

फिरोजपुर जिले में धान की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को जलाने की घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

जिले में अब तक खेतों में आग लगाने के 23 मामले सामने आने की जानकारी दी गई है।

इन घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को और सक्रिय कर दिया है।

संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में खेतों की स्थिति पर नजर रखने और आग लगने की जानकारी मिलते ही आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि खेतों में आग लगने की घटनाएं आगे न बढ़ें।

10 मामलों में एफआईआर दर्ज

पराली जलाने की घटनाओं को लेकर प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में अब तक 10 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।

यह कार्रवाई खेतों में आग लगाने से संबंधित नियमों के उल्लंघन के मामलों में की गई है।

प्रशासन का मानना है कि निगरानी के साथ नियमों का पालन सुनिश्चित कराना भी आवश्यक है।

हालांकि, दर्ज एफआईआर में नामजद व्यक्तियों, संबंधित पुलिस थानों और कानूनी धाराओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए इन मामलों में आगे की जांच और कार्रवाई की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।

आग लगने की सूचना मिलते ही खेतों में पहुंचेंगे अधिकारी

जिला प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।

अब संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी खेत में आग लगने की जानकारी मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचें।

अधिकारियों को घटनास्थल की स्थिति का जायजा लेने के साथ आग बुझाने के प्रयास भी सुनिश्चित करने हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य खेतों में लगी आग को फैलने से रोकना और प्रदूषण को कम करना है।

इसके साथ ही अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे घटनाओं की जानकारी संबंधित प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाएं, ताकि आवश्यक कार्रवाई समय पर की जा सके।

एडीसी कृष्णा पाल राजपूत ने दी जानकारी

फिरोजपुर के अतिरिक्त उपायुक्त विकास, एडीसी (डी) कृष्णा पाल राजपूत ने जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।

जहां भी खेतों में आग लगने की सूचना मिलती है, वहां संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते हैं।

उन्होंने बताया कि अधिकारियों को आग बुझाने के प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का जोर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी बनाने पर है।

सिर्फ निगरानी नहीं, मौके पर कार्रवाई पर भी जोर

पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी के साथ त्वरित कार्रवाई को भी प्राथमिकता दी है।

खेतों में आग लगने की सूचना मिलने पर समय पर कार्रवाई करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यदि आग फैल जाती है, तो उसे नियंत्रित करने में अधिक कठिनाई हो सकती है।

इसी कारण अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे प्रशासन को घटनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी मिल सकेगी।

साथ ही, संबंधित क्षेत्रों में नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में सहायता मिल सकती है।

धान की कटाई के बाद बढ़ती है पराली प्रबंधन की चुनौती

पंजाब में धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले फसल अवशेषों का प्रबंधन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।

अगली फसल की बुवाई की तैयारी के दौरान खेतों को जल्द खाली करने की आवश्यकता पड़ती है।

ऐसी परिस्थितियों में कुछ किसान फसल अवशेषों को जलाने का तरीका अपनाते हैं।

हालांकि, पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और खेत की मिट्टी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन पर्यावरण और मिट्टी की गुणवत्ता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

पराली जलाने से बढ़ सकता है वायु प्रदूषण

खेतों में पराली जलाने से बड़ी मात्रा में धुआं उत्पन्न होता है।

इस धुएं में सूक्ष्म कण और विभिन्न गैसीय प्रदूषक मौजूद हो सकते हैं, जो वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

मौसम की परिस्थितियों और हवा की दिशा के अनुसार इसका प्रभाव आसपास के इलाकों तक पहुंच सकता है।

विशेष रूप से अक्टूबर और नवंबर के दौरान उत्तर भारत में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

इस अवधि में मौसम संबंधी परिस्थितियां प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित कर सकती हैं।

हालांकि, किसी क्षेत्र के कुल वायु प्रदूषण में पराली जलाने का कितना योगदान है, इसका निर्धारण वैज्ञानिक आंकड़ों और विश्लेषण के आधार पर ही किया जा सकता है।

किसानों के लिए वैकल्पिक उपाय भी महत्वपूर्ण

पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए नियमों का पालन कराने के साथ किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्प उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।

कृषि क्षेत्र में हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर और अन्य उपकरणों का उपयोग फसल अवशेषों के प्रबंधन में किया जाता है।

कुछ तकनीकों की सहायता से पराली को खेत में ही मिलाया जा सकता है, जबकि अन्य तरीकों से इसे एकत्र कर अलग उपयोग में लाया जा सकता है।

फसल अवशेषों का उपयोग जैविक खाद, बायोमास और अन्य औद्योगिक प्रक्रियाओं में भी किया जा सकता है।

हालांकि, फिरोजपुर जिले में इन विकल्पों के लिए वर्तमान में उपलब्ध सहायता या योजनाओं का विशिष्ट विवरण सामने नहीं आया है।

मिट्टी की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है असर

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसल अवशेष जलाने से खेत की सतह पर मौजूद उपयोगी जैविक पदार्थ और कुछ पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं।

आग के कारण मिट्टी के ऊपरी हिस्से में रहने वाले सूक्ष्मजीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

इसी वजह से कृषि क्षेत्र में पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया जाता है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

पराली जलाने की समस्या केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है।

इससे निपटने के लिए किसानों, कृषि विभाग, स्थानीय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।

किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकों की जानकारी और आवश्यक संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है।

वहीं, नियमों का उल्लंघन होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

इन दोनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देने से समस्या का दीर्घकालिक समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है।

आने वाले दिनों में निगरानी रहेगी अहम

फिरोजपुर में अब तक 23 घटनाएं सामने आने और 10 एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।

अधिकारियों को खेतों में आग लगने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक सख्ती और त्वरित कार्रवाई से पराली जलाने की घटनाओं में कितनी कमी आती है।

इसके साथ ही किसानों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के व्यावहारिक विकल्प भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

पराली जलाने पर फिरोजपुर प्रशासन का सख्त संदेश

फिरोजपुर जिले में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जाएगी।

एडीसी (डी) कृष्णा पाल राजपूत के अनुसार, प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और खेतों में आग लगने की जानकारी मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंच रहे हैं।

प्रशासन का उद्देश्य आग की घटनाओं को नियंत्रित करना और वायु प्रदूषण को बढ़ने से रोकना है।

फिरोजपुर में पराली जलाने की 23 घटनाओं और 10 एफआईआर के बाद प्रशासन ने निगरानी तथा मौके पर कार्रवाई तेज कर दी है। अब अधिकारियों की तत्परता और किसानों के सहयोग से ही यह तय होगा कि आने वाले दिनों में खेतों में आग लगाने की घटनाओं को किस हद तक रोका जा सकेगा।

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