अलीगढ़ रामलीला महोत्सव 2026: निषादराज मिलन और केवट संवाद लीला का भव्य मंचन, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा अचल सरोवर
अलीगढ़। जीटी रोड स्थित रामलीला भवन में श्री रामलीला गौशाला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित श्री रामलीला महोत्सव 2026 के अंतर्गत 10 अक्टूबर को निषादराज मिलन, प्रभु श्रीराम-केवट संवाद और अचल सरोवर पर सरयू पार लीला का मनोहारी मंचन किया गया। सर्वोदय गणेश रामलीला मंडल, मथुरा के कलाकारों ने आचार्य राजीव चतुर्वेदी के निर्देशन में कथा व्यास गौतम चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में रामकथा के इन भावपूर्ण प्रसंगों को प्रस्तुत किया।
लीला के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रभु श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। अचल सरोवर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया, जबकि आसमान में आतिशबाजी ने आयोजन की भव्यता बढ़ा दी।
अतिथियों ने प्रभु श्रीराम की आरती कर किया शुभारंभ
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीराम का पूजन और आरती एसपी सिटी आदित्य बंसल, राजेश मित्तल, रसिक बिहारी (रसिक टावर), राजीव अग्रवाल और संदीप अग्रवाल ने की।
इसके बाद अचल सरोवर पर महापौर प्रशांत सिंघल और नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की आरती कर लीला का शुभारंभ किया। धार्मिक आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया।
निषादराज मिलन ने दिया सामाजिक समरसता का संदेश
वनवास की आज्ञा मिलने के बाद प्रभु श्रीराम वन की ओर प्रस्थान करते हैं। इसी दौरान उनकी भेंट परम भक्त निषादराज से होती है। रामलीला में इस प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया।
निषादराज और प्रभु श्रीराम की मित्रता के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और सच्चे प्रेम का संदेश दिया गया। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्ची मित्रता में जाति-पाति, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता। भगवान श्रीराम का निषादराज के प्रति स्नेह देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
प्रभु श्रीराम और केवट संवाद ने श्रद्धालुओं को किया भावुक
रामलीला का प्रमुख आकर्षण गंगा नदी के तट पर प्रभु श्रीराम और केवट के बीच हुआ संवाद रहा। मंचन में दिखाया गया कि प्रभु श्रीराम नदी पार करने के लिए केवट से नाव मांगते हैं। इस पर केवट भगवान श्रीराम के चरणों की महिमा का वर्णन करते हुए कहता है कि उनके चरणों के स्पर्श से पत्थर भी नारी बन गया था। इसलिए वह अपनी नाव को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता।
केवट कहता है कि नाव उसकी आजीविका का साधन है, इसलिए वह पहले प्रभु श्रीराम के चरण पखारेगा और उसके बाद ही उन्हें नदी पार कराएगा। केवट की अनन्य भक्ति और भोलेपन से भरी बातें सुनकर प्रभु श्रीराम मुस्कुराते हैं और उसे अपने चरण धोने की अनुमति देते हैं।
इसके बाद केवट प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के चरण पखारता है। फिर तीनों को नाव में बैठाकर नदी के पार पहुंचाता है। इस पूरे प्रसंग का मंचन श्रद्धा और भक्ति के भाव के साथ किया गया।
इस दौरान रामचरितमानस की चौपाई ने भी प्रसंग को विशेष भाव प्रदान किया—
मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना॥
चरन कमल रज कहुँ सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई॥
केवट ने उतराई लेने से किया इनकार
नदी पार पहुंचने के बाद माता सीता केवट को उतराई देने के लिए अपनी अंगूठी देती हैं, लेकिन केवट पारिश्रमिक लेने से इनकार कर देता है। वह प्रभु श्रीराम से विनम्रतापूर्वक कहता है कि जिस प्रकार उसने उन्हें नदी पार कराई है, उसी प्रकार जब वह उनके धाम पहुंचे तो प्रभु उसे भवसागर से पार करा दें।
केवट की इस निश्छल भक्ति और समर्पण से भरे संवाद ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से भगवान के प्रति प्रेम, निस्वार्थ सेवा और पूर्ण समर्पण का संदेश दिया गया।
रंग-बिरंगी रोशनी और आतिशबाजी से जगमगाया अचल सरोवर
अचल सरोवर पर आयोजित सरयू पार लीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। आसमान में आतिशबाजी के आकर्षक नजारे ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
अलीगढ़ के अलावा आसपास के जिलों से भी महिलाएं, बच्चे और अन्य दर्शक लीला देखने पहुंचे। प्रभु श्रीराम के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रामलीला का आनंद लिया।
रामलीला समिति के पदाधिकारी और सदस्य रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्री रामलीला गौशाला कमेटी के अध्यक्ष विमल अग्रवाल, सचिव अरविंद अग्रवाल, एडवोकेट कोषाध्यक्ष टी.एन. मित्तल, संयोजक अन्नू बीड़ी, ऋषभ गर्ग, विक्रांत गर्ग, संयम पाराशर, आकाश अग्रवाल, सीए पीयूष अग्रवाल, राजेश गर्ग, अर्जुन गोविल, भव्य अग्रवाल, पवन अग्रवाल, प्रदीप उपाध्याय, अभिनव वार्ष्णेय, शिखर अग्रवाल मीरा, शिवम वार्ष्णेय, शोभित अग्रवाल, दिव्यम, डॉ. हर्ष गुप्ता और रामलीला एवं महोत्सव समिति के मीडिया प्रभारी कमल अरोड़ा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
श्री रामलीला महोत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के आदर्शों, निषादराज की मित्रता और केवट की निस्वार्थ भक्ति से जुड़ने का अवसर दिया। आयोजन के माध्यम से सामाजिक समरसता, प्रेम, सेवा और समर्पण का संदेश दिया गया।