अलीगढ़ श्री रामलीला महोत्सव 2026 में धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मनोहारी मंचन
अलीगढ़। जी.टी. रोड स्थित रामलीला भवन में श्री रामलीला गौशाला कमेटी के तत्वावधान में श्री रामलीला महोत्सव 2026 का आयोजन भव्य रूप से चल रहा है। सर्वोदय गणेश रामलीला मंडल, मथुरा द्वारा आचार्य राजीव चतुर्वेदी के निर्देशन में रामलीला की विभिन्न लीलाओं का मंचन किया जा रहा है। कथा व्यास गौतम चतुर्वेदी के माध्यम से कलाकारों ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को धनुष भंग, भगवान परशुराम के आगमन और लक्ष्मण-परशुराम संवाद की लीला का मनोहारी मंचन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महोत्सव अध्यक्ष विमल अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल और अन्नू बीड़ी द्वारा प्रभु श्री राम के पूजन के साथ किया गया। इसके बाद मंच पर भगवान श्री राम और माता सीता के स्वयंवर का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
लीला में दिखाया गया कि माता सीता के स्वयंवर में देशभर के अनेक राजा पहुंचे। स्वयंवर में भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी गई थी। एक के बाद एक कई राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं सका।
इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्री राम स्वयं धनुष के पास पहुंचे। प्रभु श्री राम ने सहजता से धनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते ही धनुष भंग हो गया। धनुष टूटते ही तेज गर्जना हुई, जिससे स्वयंवर स्थल पर मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए।
धनुष भंग की आवाज सुनकर पहाड़ों में तपस्या कर रहे भगवान परशुराम क्रोधित अवस्था में जनकपुरी पहुंच गए। उन्होंने राजा जनक से पूछा कि भगवान शिव का धनुष किसने और क्यों तोड़ा। राजा जनक ने उन्हें पूरी घटना के बारे में बताया। धनुष टूटने की बात सुनकर परशुराम जी का क्रोध और बढ़ गया।
इसके बाद भगवान परशुराम और लक्ष्मण जी के बीच तीखा एवं प्रभावशाली संवाद हुआ। लक्ष्मण जी ने अपने तर्कों और व्यंग्यपूर्ण जवाबों से परशुराम जी के क्रोध का सामना किया। दोनों के बीच संवाद ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। मंचन के दौरान कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय और संवाद अदायगी पर दर्शकों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया।
स्थिति गंभीर होती देख भगवान श्री राम ने दोनों के बीच मध्यस्थता की और परशुराम जी को शांत करने का प्रयास किया। लीला के अनुसार भगवान श्री राम ने अपने वक्षस्थल पर अंकित भृगु ऋषि के चरण चिह्न परशुराम जी को दिखाए। इसे देखकर परशुराम जी को यह आभास हुआ कि भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर श्री राम के रूप में अवतार लिया है।
इसके बावजूद परशुराम जी अपने मन का संशय पूरी तरह दूर करना चाहते थे। उन्होंने भगवान श्री राम से अपने सारंग धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का आग्रह किया। भगवान श्री राम ने सहजता से सारंग धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा दी। यह देखकर परशुराम जी को पूर्ण विश्वास हो गया कि श्री राम भगवान विष्णु के अवतार हैं।
इसके बाद भगवान परशुराम ने प्रभु श्री राम सहित सभी को आशीर्वाद दिया और हिमालय पर्वत की ओर तपस्या के लिए प्रस्थान कर गए। इस भावपूर्ण प्रसंग के मंचन ने रामलीला स्थल पर मौजूद दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर श्री रामलीला गौशाला कमेटी के अध्यक्ष विमल अग्रवाल, सचिव अरविंद अग्रवाल, कोषाध्यक्ष टी.एन. मित्तल एडवोकेट, संयोजक अन्नू बीड़ी, ऋषभ गर्ग, विक्रांत गर्ग, संयम पाराशर, आकाश अग्रवाल, सीए पीयूष अग्रवाल, राजेश गर्ग, अर्जुन गोविल, भव्य अग्रवाल, पवन अग्रवाल, प्रदीप उपाध्याय, अभिनव वार्ष्णेय, शिखर अग्रवाल मीरा, शिवम वार्ष्णेय, शोभित अग्रवाल, दिव्यम, हर्ष गुप्ता, कमल अरोड़ा सहित रामलीला एवं महोत्सव समिति के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
8 अक्टूबर को निकलेगी भगवान श्री राम की भव्य बारात
रामलीला महोत्सव के अगले कार्यक्रम के तहत 8 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजे भगवान श्री राम की भव्य बारात निकाली जाएगी। श्री राम जी की बारात श्री टीकाराम मंदिर, सेंटर पॉइंट से प्रारंभ होगी। इसके बाद बारात रामघाट रोड और शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए श्री रामलीला भवन, अचल ताल पहुंचेगी।
रामलीला समिति की ओर से श्री राम की बारात को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। समिति ने श्रद्धालुओं और शहरवासियों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान श्री राम की बारात में शामिल होने की अपील की है।