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Akhilesh Yadav Sanatan Samaj Controversy: Demands Action Over Religious Remarks

सनातन समाज की एकता तोड़ने की साजिश कर रहा है एक व्यक्ति, कार्रवाई होनी चाहिए: अखिलेश यादव

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सनातन समाज की एकता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनीतिक संरक्षण में घूम रहा एक व्यक्ति सनातन समाज की एकता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर धार्मिक भावनाओं से जुड़े कथित आपत्तिजनक बयानों पर कार्रवाई की मांग की है।

अखिलेश यादव ने उठाए धार्मिक भावनाओं का मुद्दा

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में कहा कि सनातन समाज की एकता को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही, जिनके बयानों से समाज में आपसी मतभेद और नाराजगी पैदा हो सकती है।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति राजनीतिक संरक्षण में घूमकर सनातन समाज की एकता को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहा है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए एक बयान के बाद विवाद शुरू हुआ। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित रामकथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दोनों देवताओं की मुद्रा और लीलाओं की तुलना करते हुए टिप्पणी की थी।

उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई लोगों ने नाराजगी जताई। विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों और यादव समाज के कुछ लोगों ने इस टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों सनातन परंपरा के आराध्य हैं और उनकी तुलना इस तरह नहीं की जानी चाहिए।

विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने बयान पर सफाई दी और माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है और उनका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करना नहीं था।

उन्होंने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि वे राम और कृष्ण में कोई भेद नहीं मानते। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भावावेश में कही गई बात से यदि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है तो वे इसके लिए क्षमा मांगते हैं।

राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने ईशनिंदा और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल इस मामले में अखिलेश यादव की मांग और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से मांगी गई माफी चर्चा के केंद्र में है।

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