अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव? पहले बैच के 75% अग्निवीरों को 6 साल तक सेवा का मौका, 25% को स्थायी भर्ती
नई दिल्ली। भारतीय सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना को लेकर एक बड़े बदलाव की खबर सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले बैच के अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल को लेकर नई व्यवस्था पर चर्चा है। इसके तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में सेना में शामिल करने का प्रावधान है, जबकि शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल के बजाय छह साल तक सेवा का अवसर दिए जाने की बात कही गई है।
अगर यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू होता है, तो इससे उन हजारों युवाओं को अतिरिक्त समय मिल सकता है, जिनका चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। साथ ही, उन्हें सेवा निधि और नियमित सैनिक बनने के अवसर से जुड़ी अतिरिक्त संभावनाएं भी मिल सकती हैं।
2022 में शुरू हुई थी अग्निपथ योजना
केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए अग्निपथ योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं को अग्निवीर के रूप में चार साल के लिए भर्ती किया जाता है।
योजना के प्रावधानों के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी योग्यता, प्रदर्शन और संगठनात्मक जरूरतों के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जा सकता है। बाकी अग्निवीरों को सेवा से मुक्त किया जाता है और उन्हें निर्धारित सेवा निधि दी जाती है।
पहले बैच के 24,400 अग्निवीरों पर चर्चा
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अग्निपथ योजना के पहले बैच में करीब 24,400 अग्निवीरों की भर्ती हुई थी। उनका चार साल का कार्यकाल 31 दिसंबर को पूरा होने वाला है।
इसी समयसीमा को देखते हुए पहले बैच के अग्निवीरों के भविष्य को लेकर नई व्यवस्था की चर्चा तेज हुई है। बताया जा रहा है कि 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत के लिए सेवा अवधि दो साल बढ़ाकर कुल छह साल करने का प्रस्ताव सामने आया है।
हालांकि, इस व्यवस्था की आधिकारिक अधिसूचना और विस्तृत शर्तों की पुष्टि जरूरी है। इसलिए इसे लागू हो चुका अंतिम सरकारी फैसला मानने से पहले संबंधित मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी देखना महत्वपूर्ण होगा।
सेवा निधि और भविष्य के अवसरों पर असर
चार साल के बजाय छह साल तक सेवा करने का अवसर मिलने से अग्निवीरों को सेना में अधिक समय तक काम करने और अनुभव हासिल करने का मौका मिल सकता है। इसके साथ ही उनकी सेवा अवधि के अनुसार सेवा निधि में भी बदलाव होने की संभावना पर चर्चा है।
छह साल की सेवा के बाद भी नियमित सैनिक बनने का अवसर किस प्रक्रिया और किन शर्तों के तहत मिलेगा, यह स्पष्ट होना जरूरी है। भर्ती, चयन और सेवा से जुड़े अंतिम नियम सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही तय होंगे।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी जुड़ रहा मुद्दा
अग्निवीर योजना में संभावित बदलाव को उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राज्य के कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती की तैयारी करते हैं। पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में सेना में सेवा को रोजगार के साथ-साथ सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जाता है।
ऐसे में अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाने और नियमित भर्ती के अवसरों को लेकर होने वाला कोई भी फैसला युवाओं के साथ उनके परिवारों और गांवों तक असर डाल सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
युवाओं की मांगों से जुड़ा फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अग्निपथ योजना में बदलाव से युवाओं के बीच यह संदेश जा सकता है कि सरकार उनकी मांगों और परिस्थितियों पर विचार कर रही है। हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार की ओर से क्या आधिकारिक प्रावधान जारी किए जाते हैं और उनका लाभ कितने अग्निवीरों को मिलता है।
फिलहाल अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल, सेवा निधि और नियमित भर्ती के अवसरों को लेकर सामने आई जानकारी पर आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है। इससे पहले बैच के अग्निवीरों के भविष्य की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।