UP हाईवे पर मौत का तांडव! रोडवेज बस-ऑयल टैंकर की भीषण टक्कर, ‘भगवान मेरे पति-बच्चे को बचा लो’ की चीखों से गूंज उठा अस्पताल

उत्तर प्रदेश: के हमीरपुर जिले में कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-34) पर बुधवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। कुंडौरा गांव के पास महोबा डिपो की रोडवेज बस और खाद्य तेल लेकर लौट रहे एक ऑयल टैंकर की आमने-सामने हुई भीषण टक्कर में बस चालक समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 19 यात्री घायल हो गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सरकारी एंबुलेंस कम पड़ गईं और प्रशासन को निजी अस्पतालों की एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा।

शाम होते ही हाईवे पर मचा कोहराम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा बुधवार शाम करीब 7 बजे हुआ। महोबा डिपो की रोडवेज बस हमीरपुर से महोबा की ओर जा रही थी। दूसरी ओर, हिंदुस्तान यूनिलीवर का खाद्य तेल खाली कर ऑयल टैंकर कानपुर लौट रहा था। जैसे ही दोनों वाहन कुंडौरा गांव स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचे, आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई।

टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री अपनी सीटों से उछलकर बस के अंदर गिर पड़े। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए।

तीन लोगों की मौत, 19 घायल

हादसे में रोडवेज बस चालक निसार, टैंकर चालक तथा महोबा निवासी नंदकिशोर नायक (65) की मौके पर ही मौत हो गई।

वहीं 19 अन्य यात्री घायल हुए, जिनमें से 9 की हालत गंभीर होने के कारण जिला अस्पताल से कानपुर रेफर किया गया। बाकी घायलों का उपचार हमीरपुर जिला अस्पताल में किया गया।

एंबुलेंस कम पड़ने से बढ़ी परेशानी

घायलों को कानपुर रेफर करने के दौरान जिला अस्पताल की एंबुलेंस सेवा अपर्याप्त साबित हुई।

प्रशासन को तत्काल निजी अस्पतालों से एंबुलेंस बुलानी पड़ी। इस बीच गंभीर घायल काफी देर तक अस्पताल परिसर में उपचार और रेफरल की प्रतीक्षा करते रहे।

घायलों के परिजनों ने आरोप लगाया कि समय पर एंबुलेंस न मिलने से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

’10 मिनट कहते रहे, एक घंटा निकल गया’

घायल संजय वर्मा के भाई अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन एंबुलेंस मिलने में काफी देर हो गई।

उन्होंने कहा कि उनके भाई की हालत गंभीर थी, लेकिन लगातार इंतजार करना पड़ा। उनका आरोप था कि आपातकालीन स्थिति में भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।

‘भगवान, मेरे पति और बच्चे को बचा लो’

हादसे का सबसे भावुक दृश्य उस समय सामने आया जब सुमेरपुर निवासी लवली सिंह अपने घायल पति अनूप सिंह और दो वर्षीय बेटे अर्नव को देखकर फूट-फूटकर रोने लगीं।

खुद गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उनकी जुबान पर सिर्फ एक ही प्रार्थना थी—

“भगवान, मेरे पति और बच्चे को बचा लो, मुझे चाहे उठा लेना।”

अनूप सिंह की हालत गंभीर होने पर उन्हें कानपुर रेफर किया गया।

मां-बेटी भी हुईं घायल

कानपुर नगर निवासी रजनी यादव अपनी छह वर्षीय बेटी लाडो के साथ बस से बांदा जा रही थीं।

हादसे में दोनों घायल हो गईं। मासूम लाडो ने अस्पताल में बताया कि अचानक जोरदार टक्कर हुई और सब लोग गिर पड़े।

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?

घटना के समय बस में मौजूद यात्रियों का कहना है कि टक्कर बेहद तेज थी।

कुछ यात्रियों ने बताया कि बस अपनी लेन में चल रही थी, जबकि सामने से आ रहे टैंकर के साथ अचानक भिड़ंत हो गई। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और राहत दल मौके पर पहुंच गए।

घायलों को एंबुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

हाईवे पर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने और यातायात सामान्य करने में करीब एक घंटे का समय लगा।

पुलिस ने क्या कहा?

अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद वर्मा ने बताया कि हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है और 19 लोग घायल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि सभी घायलों का इलाज कराया जा रहा है तथा गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए कानपुर भेजा गया है।

पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

हादसे ने फिर उठाए कई सवाल

इस दुर्घटना ने एक बार फिर हाईवे सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते यातायात के साथ पर्याप्त एंबुलेंस, त्वरित राहत व्यवस्था और सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि गंभीर दुर्घटनाओं के दौरान समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

हमीरपुर के कानपुर-सागर हाईवे पर हुआ यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को सामने लेकर आया है। तीन लोगों की जान चली गई, जबकि 19 यात्री घायल हुए। राहत कार्य के दौरान एंबुलेंस की कमी ने हालात और कठिन बना दिए। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और घायलों का इलाज जारी है।

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