CM उमर अब्दुल्ला की पार्टी में बढ़ी नाराजगी, फारूक अब्दुल्ला ने संभाला मोर्चा, असंतुष्ट विधायकों से हुई अहम बैठक
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष का मामला चर्चा में है। पार्टी के कई विधायक सरकार और संगठन के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। इस स्थिति को देखते हुए पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने असंतुष्ट विधायकों के साथ बैठक की।
6 नवंबर को श्रीनगर में हुई इस बैठक में विधायकों की शिकायतों और मांगों पर चर्चा की गई। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के 41 विधायकों में से करीब 18 विधायकों ने सरकार और संगठन के कामकाज को लेकर असंतोष जताया था। इनमें से 15 विधायक बैठक में शामिल हुए।
विधायकों ने उठाए सरकार और संगठन के कामकाज पर सवाल
नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों ने सरकार की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पार्टी के चुनावी वादों को पूरा करने की गति को लेकर सवाल उठाए हैं।
विधायकों की ओर से मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी की भूमिका और मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं।
विधायकों का कहना है कि पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को लागू करने और जनता की अपेक्षाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा- पार्टी में कोई टूट नहीं
बैठक के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी में किसी तरह की टूट या गुटबाजी की अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और इसे तोड़ने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी बैठक में मौजूद रहे। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों की शिकायतों को सुना और समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया।
उमर अब्दुल्ला ने दिया शिकायतों के समाधान का भरोसा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने असंतुष्ट विधायकों की बातों को सुनते हुए उनकी शिकायतों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। पार्टी के भीतर उठे सवालों को दूर करने और संगठनात्मक समन्वय बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद पार्टी नेताओं की ओर से संकेत दिया गया कि आने वाले दिनों में कुछ फैसले लिए जा सकते हैं। हालांकि, सभी मांगों पर अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
जम्मू-कश्मीर सरकार के सामने विकास कार्यों की चुनौती
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विकास योजनाओं की समीक्षा और सरकारी विभागों की जवाबदेही बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को बजट में घोषित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने, लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने और सरकारी धन का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार के सामने सर्दियों के दौरान आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, दूरदराज के इलाकों में सुविधाएं बनाए रखने और विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की चुनौती भी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए किस तरह आगे बढ़ती है।