CM पुष्कर सिंह धामी ने जवानों के साथ मनाई दीपावली, सीमावर्ती गांवों को लेकर किया बड़ा ऐलान
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में गढ़वाल राइफल्स के वीर जवानों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं। जवानों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री ने देश की सुरक्षा में सैनिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देशवासी अपने घरों में जो दीप जलाते हैं, उनके पीछे सैनिकों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण होता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सैनिकों के साथ आत्मीय संवाद किया और अपने सैनिक परिवार से जुड़ी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के बीच आकर उन्हें अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने जैसा अनुभव हो रहा है।
सीमावर्ती गांवों को बनाया जा रहा वाइब्रेंट विलेज
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों को वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले माणा गांव को देश का अंतिम गांव कहा जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे देश का पहला गांव बताते हुए सीमांत क्षेत्रों के विकास को नई दिशा दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि कैलाश के निकट गुंजी गांव तक सड़क पहुंचाने और लिपुलेख तक सड़क निर्माण जैसे कार्यों से सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। पहले सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जाती थीं, जिसके कारण विकास कार्यों में देरी होती रही। अब इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
सड़क, पुल और सुरंगों से मजबूत हो रही सीमाओं की कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और संचार सुविधाओं को भी मजबूत बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों से न केवल सीमांत गांवों के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, बल्कि सेना की आवाजाही और संचार व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से सीमावर्ती क्षेत्रों में उच्च हिमालयी मैराथन जैसे आयोजन भी किए जा रहे हैं। हाल ही में गुंजी गांव में आदि कैलाश रन का आयोजन किया गया था। इसके अलावा आगामी मई में मलारी और नीति क्षेत्र में बड़ी मैराथन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
सैनिकों के योगदान से सुरक्षित हैं देशवासी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान लगातार मजबूत हो रही है और इसमें भारतीय सेना का महत्वपूर्ण योगदान है। सैनिकों की बदौलत ही देशवासी अपने त्योहार सुरक्षित माहौल में मना पाते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करते हैं, ताकि देश के नागरिक अपने परिवारों के साथ खुशियां मना सकें। मुख्यमंत्री ने सभी वीर जवानों और उनके परिवारों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए उनके साहस, शौर्य और समर्पण को नमन किया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने जवानों के साथ भारत माता की जय के नारे भी लगाए।
सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान तथा कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है।
इसके अलावा शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था के तहत कई आश्रितों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। आवेदन की समय-सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान करना और उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उत्तराखंड की वीरभूमि के सैनिकों ने हमेशा देश की रक्षा में अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया है। सरकार उनके सम्मान और कल्याण के लिए हरसंभव प्रयास करती रहेगी।