ग्रेटर नोएडा में PNB बैंक में 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, CBI ने महिला कर्मचारी दीपांशी को किया गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को कार्रवाई करते हुए बैंक की एक महिला कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक ग्राहकों के अलग-अलग खातों से करीब 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी का खुलासा हुआ है।
गिरफ्तार महिला कर्मचारी की पहचान दीपांशी के रूप में हुई है। वह ग्रेटर नोएडा के पाई-1 सेक्टर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में कार्यरत थी। सीबीआई ने इस मामले में बैंक कर्मचारी के साथ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।
महिला ग्राहक की शिकायत से खुला धोखाधड़ी का मामला
बैंक की ओर से सीबीआई को दी गई शिकायत के अनुसार, कथित धोखाधड़ी का मामला 16 सितंबर को सामने आया था। उस दिन एक महिला ग्राहक बैंक पहुंची और अपने खाते से जुड़ी जानकारी लेने के दौरान उसे संदिग्ध लेनदेन का पता चला।
ग्राहक ने बैंक को बताया कि उसके खाते से ऐसी रकम निकाली गई है, जिसके लिए उसने कोई अनुमति नहीं दी थी। शिकायत के बाद बैंक ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि मामला केवल एक ग्राहक के खाते तक सीमित नहीं था।
कई ग्राहकों के खातों से निकाले गए पैसे
बैंक की जांच में सामने आया कि कई ग्राहकों के खातों से उनकी जानकारी और अनुमति के बिना रकम निकाली गई थी। शुरुआती जांच के मुताबिक, अलग-अलग खातों से कुल 10.24 करोड़ रुपये के अनधिकृत लेनदेन किए गए।
इस खुलासे के बाद बैंक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई से शिकायत की। जांच एजेंसी ने शिकायत के आधार पर मामले की पड़ताल शुरू की और बैंक के लेनदेन तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की।
महिला बैंक कर्मचारी दीपांशी गिरफ्तार
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार महिला कर्मचारी का नाम दीपांशी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वह पाई-1 सेक्टर स्थित PNB शाखा में तैनात थी।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित धोखाधड़ी को किस तरीके से अंजाम दिया गया और इसमें बैंक के किन कर्मचारियों या बाहरी लोगों की भूमिका रही। सीबीआई लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी केस दर्ज
सीबीआई ने इस मामले में अपनी एफआईआर में दीपांशी, आशुतोष पाठक और अन्य अज्ञात सरकारी तथा निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने भारतीय दंड कानूनों के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी मामला दर्ज किया है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि 10.24 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी में आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था और रकम कहां स्थानांतरित की गई। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि बैंकिंग प्रक्रिया का दुरुपयोग किस स्तर पर हुआ।
बैंक के रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच जारी
सीबीआई की जांच का मुख्य आधार बैंक खातों से हुए संदिग्ध लेनदेन, संबंधित दस्तावेज और कर्मचारियों की भूमिका है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कितने ग्राहकों के खाते प्रभावित हुए और कथित तौर पर निकाली गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।
इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है।
ग्रेटर नोएडा में सामने आए इस मामले ने बैंक खातों की सुरक्षा और ग्राहकों की जमा पूंजी की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है और उनकी दोषसिद्धि का फैसला अदालत में होगा।