महाराष्ट्र में सिंहस्थ कुंभ का शंखनाद, CM देवेंद्र फडणवीस ने त्र्यंबकेश्वर में फहराया धर्मध्वज
नासिक: महाराष्ट्र में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की तैयारियों का शनिवार, 31 अक्टूबर को विधिवत शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर नासिक के रामकुंड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मध्वज फहराया, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में ध्वजारोहण किया। दोनों स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच संपन्न हुए। इस कार्यक्रम में संत-महात्माओं, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
रामकुंड में राष्ट्रपति मुर्मू ने किया धर्मध्वजारोहण
नासिक के पंचवटी स्थित रामकुंड और रामतीर्थ में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सबसे पहले यज्ञकुंड में आहुति दी। इसके बाद उन्होंने गोदावरी नदी और धर्मध्वज की पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रों के बीच राष्ट्रपति ने दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर धर्मध्वज फहराया।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में संतों और अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
त्र्यंबकेश्वर में CM फडणवीस ने फहराया धर्मध्वज
नासिक से करीब 30 किलोमीटर दूर त्र्यंबकेश्वर स्थित कुशावर्त तीर्थ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सिंहस्थ महाकुंभ का धर्मध्वज फहराया। यहां भी दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर धार्मिक विधि-विधान के साथ ध्वजारोहण किया गया।
समारोह में श्रृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी विधुशेखर भारती, विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और पूजा-अर्चना के बीच मुख्यमंत्री ने संतों का स्वागत किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
सिंहस्थ कुंभ 2027 की तैयारियों को मिली औपचारिक शुरुआत
धर्मध्वजारोहण को नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन जुलाई 2028 तक चलेगा। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं, साधु-संतों और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है।
सिंहस्थ कुंभ के दौरान नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ का विशेष धार्मिक महत्व रहेगा। गोदावरी नदी के तट पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और स्नान कार्यक्रमों के लिए प्रशासन को व्यापक व्यवस्थाएं करनी होंगी।
अगस्त 2027 में होगा पहला अमृत स्नान
सिंहस्थ महाकुंभ के प्रमुख आकर्षणों में अमृत स्नान शामिल होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहला अमृत स्नान 2 अगस्त 2027 को प्रस्तावित है। इसके लिए प्रशासन को श्रद्धालुओं की भीड़, यातायात, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और पेयजल जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना होगा।
कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारियां की जा रही हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन की तैयारी
सिंहस्थ कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके लिए सड़क संपर्क, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, घाटों की व्यवस्था, साफ-सफाई और सुरक्षा से जुड़े इंतजाम महत्वपूर्ण होंगे।
प्रशासन की ओर से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के जरिए तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
धर्मध्वज में छिपा है धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश
सिंहस्थ महाकुंभ का धर्मध्वज धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक माना जाता है। ध्वज पर अंकित अमृत कलश, ओम और अन्य धार्मिक प्रतीकों का विशेष महत्व है। यह ध्वज श्रद्धालुओं को महाकुंभ में शामिल होने का आमंत्रण देने के साथ ही परंपरा और आस्था से जुड़ने का संदेश भी देता है।
जुलाई 2028 तक चलेगा सिंहस्थ महाकुंभ
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व देशभर में है। 31 अक्टूबर 2026 को हुए धर्मध्वजारोहण के साथ अब इस बड़े आयोजन की तैयारियों ने औपचारिक गति पकड़ ली है। आने वाले महीनों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं, धार्मिक कार्यक्रमों और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य सरकार के सामने इस आयोजन को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। अब श्रद्धालुओं की नजर 2027 में होने वाले अमृत स्नान और महाकुंभ के अन्य प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों पर रहेगी।