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JP Nadda SIR Statement: 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने के आरोप पर कांग्रेस को जवाब, चुनाव आयोग का किया बचाव

By aonenewstv | Published: Oct 27, 2026 02:47 PM

SIR विवाद पर जेपी नड्डा का कांग्रेस पर तीखा पलटवार, 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने के आरोपों को बताया गलत

नई दिल्ली/गुजरात, 27 अक्टूबर 2026। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अराजकता और भ्रम फैलाने वाली राजनीति को समाप्त करना जरूरी है।

जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े करने का आरोप लगाया।

13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों पर नड्डा का जवाब

SIR को लेकर सबसे बड़ा विवाद करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के दावों को लेकर है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर क्यों किए गए।

जेपी नड्डा ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि मतदाता सूची की जांच के दौरान ऐसे नाम सामने आए, जिनमें संबंधित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी थी, कुछ लोग स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए थे और कुछ नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की पहचान करना और मतदाता सूची को अद्यतन रखना चुनावी व्यवस्था की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

नड्डा ने तर्क दिया कि मतदाता सूची में गलत या दोहरी प्रविष्टियां बनी रहने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

क्या है 13.39 करोड़ मतदाताओं का पूरा मामला?

चुनाव आयोग की ओर से पहले जारी जानकारी के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 13.39 करोड़ मतदाता प्रविष्टियों को अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया था।

इनमें लगभग 2.80 करोड़ मृत व्यक्तियों, 6.30 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों, 3.01 करोड़ अनुपस्थित या संपर्क में नहीं आए मतदाताओं और 1.02 करोड़ दोहरी प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया था।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि प्रारूप मतदाता सूची में किसी नाम को चिह्नित किए जाने और अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बीच अंतर है।

आयोग के अनुसार, पात्र मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है, ताकि किसी योग्य नागरिक का नाम गलती से सूची से बाहर न रह जाए।

10 लाख से अधिक BLO ने किया काम

जेपी नड्डा ने SIR प्रक्रिया की तैयारियों और उसके संचालन का बचाव करते हुए कहा कि यह अभियान बिना किसी योजना या तैयारी के नहीं चलाया गया।

उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची के सत्यापन के लिए 10 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने काम किया।

इस प्रक्रिया में घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच, मतदाता विवरण का मिलान और संदिग्ध अथवा गलत प्रविष्टियों की पहचान जैसे कार्य शामिल रहे।

चुनाव आयोग की पूर्व जानकारी के अनुसार, इस अभियान में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को भी मतदाता सूची से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई थी।

नड्डा ने कहा कि इतनी व्यापक प्रक्रिया को बिना तथ्यों के राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।

‘SIR पहले भी 12 बार हुआ, 10 बार कांग्रेस के शासन में’

कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने SIR के इतिहास का भी उल्लेख किया।

उन्होंने दावा किया कि देश में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पहले भी 12 बार अपनाई जा चुकी है और इनमें से 10 बार यह प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में हुई थी।

नड्डा ने सवाल उठाया कि यदि पहले मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता था, तो अब उसी प्रक्रिया पर इतने गंभीर आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सभी राजनीतिक दलों के हित में है और मतदाता सूची को सही बनाए रखना निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी आवश्यकता है।

कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप

जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन सवाल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उठाए जाने चाहिए।

नड्डा के मुताबिक, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है।

उन्होंने कांग्रेस को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की चुनौती दी।

राहुल गांधी को संसद में चर्चा की चुनौती

जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संसद चर्चा और जवाबदेही का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। यदि विपक्ष के पास चुनावी प्रक्रिया से संबंधित ठोस सवाल हैं, तो उन्हें संसदीय चर्चा के माध्यम से सामने रखना चाहिए।

नड्डा ने राहुल गांधी को संसद में आकर मुद्दों पर चर्चा करने की चुनौती देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और बहस से समस्याओं का समाधान निकाला जाना चाहिए।

उन्होंने विपक्ष पर जनता से जुड़े मुद्दों के बजाय राजनीतिक विवादों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया

जेपी नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से भाजपा और केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन किसी संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर गलत जानकारी फैलाना उचित नहीं है।

नड्डा ने कांग्रेस पर अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा चुनाव आयोग और चुनावी व्यवस्थाओं पर फोड़ने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा को जनता का समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के कारण मिल रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का किया समर्थन

जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार देश के विकास और जनकल्याण के लिए काम कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा की राजनीतिक सफलता का आधार जनता का विश्वास और सरकार की नीतियां हैं।

नड्डा ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों को जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक विरोध और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के बीच अंतर समझने की अपील की।

कांग्रेस का सवाल—क्या वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटे?

दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रही है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के कारण वास्तविक और पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका है।

विपक्ष की मांग है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में किए गए बदलावों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाए।

कांग्रेस ने विशेष रूप से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच तथा प्रभावित नागरिकों के लिए उपलब्ध अपील व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

चुनाव आयोग की सफाई—पात्र मतदाता कर सकते हैं आवेदन

चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाना है।

आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर हो जाता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

इसके लिए दावा और आपत्ति प्रक्रिया के साथ संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष आवेदन करने की व्यवस्था उपलब्ध है।

आयोग का कहना है कि गलत, मृत और दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करना तथा पात्र मतदाताओं का नाम सूची में सुनिश्चित करना, दोनों ही इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।

SIR विवाद से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

SIR को लेकर केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है।

भाजपा जहां इसे मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया बता रही है, वहीं कांग्रेस इस अभियान के क्रियान्वयन और मतदाताओं के अधिकारों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रही है।

इस विवाद के केंद्र में एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर करते समय सभी पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल जेपी नड्डा के ताजा बयान के बाद SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़े, दावों और आपत्तियों का निस्तारण तथा मतदाता सूची की पारदर्शिता इस विवाद के महत्वपूर्ण पहलू बने रहेंगे।

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