अलीगढ़ में पहली बार 400 इंद्र-इंद्राणियों की सहभागिता से सजेगा आचार्य विद्यासागर महामंडल विधान, 26 अक्टूबर को भव्य आयोजन
शरद पूर्णिमा और जैन संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में अलीगढ़ में 26 अक्टूबर को भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, शहर में पहली बार लगभग 400 इंद्र-इंद्राणियां एक साथ महामंडल विधान में सहभागिता करेंगी। कार्यक्रम में अभिषेक, शांतिधारा, मुनि प्रवचन, नृत्य नाटिका, 108 दीपकों की महाआरती और आकर्षक बग्घी यात्रा विशेष आकर्षण होंगे।
अलीगढ़, 24 अक्टूबर 2026। जैन धर्म की भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं का भव्य संगम 26 अक्टूबर को अलीगढ़ में देखने को मिलेगा। जैन संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में खिरनी गेट स्थित श्री लख्मीचंद पांड्या खंडेलवाल दिगंबर जैन ट्रस्ट, आगरा रोड परिसर में आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान एवं धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता लगभग 400 इंद्र-इंद्राणियों की सामूहिक सहभागिता होगी। आयोजकों का कहना है कि अलीगढ़ में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस प्रकार के महामंडल विधान में एक साथ भाग लेंगे।
महोत्सव की तैयारियों को लेकर जैन समाज में उत्साह का वातावरण है। आयोजन समिति ने शहर और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।
पत्रकार वार्ता में दी गई आयोजन की जानकारी
मुनि सेवा समिति, अलीगढ़ की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रतिष्ठाचार्य राकेश भैया, मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार जैन, मंत्री मुनेश जैन, मुख्य संयोजक राजीव जैन, कोषाध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन और मीडिया प्रभारी मयंक जैन ने संयुक्त रूप से आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि यह महोत्सव धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी अनूठा संगम होगा।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के त्याग, तपस्या, करुणा और आध्यात्मिक आदर्शों को समाज तक पहुंचाना है।
उपाध्याय मुनि शिवदत्त सागर जी महाराज के सान्निध्य में होगा आयोजन
आचार्य विद्यासागर महामंडल विधान का आयोजन उपाध्याय मुनि श्री 108 शिवदत्त सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में किया जाएगा।
धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन प्रतिष्ठाचार्य राकेश भैया जी के निर्देशन में होगा।
आयोजन समिति के अनुसार, महामंडल विधान में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल होकर सामूहिक पूजा-अर्चना और धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता करेंगे।
जैन समाज के लिए यह आयोजन सामूहिक श्रद्धा, अनुशासन और धार्मिक एकता का प्रतीक होगा।
पहली बार 400 इंद्र-इंद्राणियों की सहभागिता
इस महोत्सव में लगभग 400 इंद्र-इंद्राणियों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
आयोजकों का दावा है कि अलीगढ़ में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ महामंडल विधान में सम्मिलित होंगे।
जैन धार्मिक परंपराओं में इंद्र-इंद्राणी के रूप में पूजा-अर्चना में भाग लेने का विशेष महत्व माना जाता है।
इस अवसर पर श्रद्धालु निर्धारित धार्मिक विधि के अनुसार अनुष्ठान संपन्न करेंगे।
आयोजन समिति का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सामूहिक सहभागिता से जैन समाज की धार्मिक एकता और आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रति श्रद्धा का संदेश जाएगा।
सुबह 6:30 बजे अभिषेक और शांतिधारा से शुरुआत
आयोजन का शुभारंभ 26 अक्टूबर को प्रातः 6:30 बजे धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगा।
सबसे पहले अभिषेक और शांतिधारा की धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई जाएंगी।
इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान प्रारंभ होगा।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु जैन धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना में भाग लेंगे।
आयोजकों ने बताया कि सभी धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य के निर्देशन में संपन्न कराई जाएंगी।
सुबह 8:15 बजे होंगे मुनि शिवदत्त सागर जी महाराज के प्रवचन
धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्रातः 8:15 बजे उपाध्याय मुनि श्री 108 शिवदत्त सागर जी महाराज के प्रवचन आयोजित होंगे।
प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन धर्म के सिद्धांतों, संयम, अहिंसा, त्याग और आध्यात्मिक जीवन के महत्व का संदेश दिया जाएगा।
आयोजन समिति के अनुसार, मुनि श्री का सान्निध्य इस महोत्सव को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करेगा।
दोपहर में दिल्ली के कलाकार प्रस्तुत करेंगे नृत्य नाटिका
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
दोपहर 1:30 बजे निशांत शर्मा कंठस्थ कला केंद्र, दिल्ली की ओर से विशेष नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
आयोजकों के अनुसार, यह प्रस्तुति महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी।
नृत्य नाटिका के माध्यम से धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
आयोजन समिति का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम नई पीढ़ी को धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में सहायक होते हैं।
शाम 6 बजे 108 दीपकों से होगी भव्य आरती
महोत्सव के अंतर्गत सायंकाल 6 बजे 108 दीपकों के साथ भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर श्रद्धालु सामूहिक रूप से धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होंगे।
इसके बाद भगवान नेमीनाथ के वैराग्य पर आधारित सांस्कृतिक नाटक का मंचन किया जाएगा।
यह नाटक जैन धर्म में त्याग और वैराग्य के आध्यात्मिक महत्व को प्रस्तुत करेगा।
आयोजन समिति के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को जोड़ने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश देना है।
महोत्सव में इन प्रमुख पात्रों को मिला सौभाग्य
आयोजन समिति ने महामंडल विधान में प्रमुख पात्रों के रूप में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की जानकारी भी दी है।
महोत्सव में सौधर्म इंद्र के रूप में राजीव जैन एवं इंद्राणी के रूप में इंद्रा जैन सहभागिता करेंगे।
यज्ञनायक के रूप में सौरभ जैन एवं रेशु जैन पांड्या शामिल होंगे।
ईशान इंद्र के रूप में सुरजीत जैन एवं पूनम जैन पाटनी भाग लेंगे।
सानत इंद्र के रूप में संजय जैन एवं श्रद्धा जैन लुहाड़िया सहभागिता करेंगे।
माहेन्द्र इंद्र के रूप में प्रवीन जैन एवं राशि जैन लुहाड़िया धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे।
आयोजकों ने बताया कि सभी प्रमुख पात्र निर्धारित धार्मिक विधि के अनुसार विधान में सहभागिता करेंगे।
हस्तकरघा निर्मित वस्त्र पहनकर करेंगे धार्मिक अनुष्ठान
इस महोत्सव की एक अन्य विशेषता हस्तकरघा निर्मित वस्त्रों का उपयोग होगा।
आयोजन समिति के अनुसार, महामंडल विधान में शामिल होने वाले सभी श्रावक-श्राविकाएं पहली बार हस्तकरघा से निर्मित वस्त्र पहनकर धार्मिक क्रियाएं संपन्न करेंगे।
इस पहल को पारंपरिक वस्त्रों और भारतीय हस्तकरघा संस्कृति के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठानों में पारंपरिक वस्त्रों का उपयोग कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान करेगा।
बग्घी यात्रा रहेगी विशेष आकर्षण
महामंडल विधान के बाद सकल जैन समाज की सहभागिता से भव्य बग्घी यात्रा निकाली जाएगी।
आयोजन समिति के अनुसार, यात्रा का शुभारंभ बाग वाले मंदिर जी से होगा।
इस दौरान महोत्सव के प्रमुख पात्र बग्घियों में सवार होंगे, जबकि इंद्र-इंद्राणियां पदयात्रा के रूप में शामिल होंगे।
यात्रा बड़े मंदिर जी तक पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु दर्शन करेंगे।
इसके बाद यात्रा पुनः बाग वाले मंदिर जी पहुंचेगी और वहीं इसका समापन होगा।
आयोजकों का कहना है कि बग्घी यात्रा धार्मिक उत्साह और सामूहिक श्रद्धा का प्रमुख आकर्षण बनेगी।
आचार्य विद्यासागर महाराज के आदर्शों को समर्पित महोत्सव
आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जैन धर्म के प्रतिष्ठित संतों में रहे हैं।
उनका जीवन संयम, तपस्या, त्याग, अहिंसा और आध्यात्मिक साधना के आदर्शों के लिए जाना जाता है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति, शिक्षा, नैतिक मूल्यों और समाजसेवा के महत्व पर विशेष बल दिया।
आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से जुड़े अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्य देश के विभिन्न हिस्सों में संचालित होते रहे हैं।
अलीगढ़ में आयोजित होने वाला महामंडल विधान भी उनके आध्यात्मिक आदर्शों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम बनेगा।
जैन समाज में उत्साह, तैयारियां तेज
26 अक्टूबर को होने वाले महोत्सव को लेकर अलीगढ़ के जैन समाज में विशेष उत्साह है।
आयोजन समिति कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने की तैयारियों में जुटी हुई है।
लगभग 400 इंद्र-इंद्राणियों की सहभागिता के कारण धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्थाओं को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम, आरती और बग्घी यात्रा के आयोजन की रूपरेखा भी तैयार की गई है।
समिति ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पहुंचने का अनुरोध किया है।
धार्मिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
आयोजन समिति का कहना है कि इस महोत्सव का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराना नहीं, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देना भी है।
सामूहिक महामंडल विधान के माध्यम से श्रद्धालु एक साथ पूजा-अर्चना करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन नई पीढ़ी को जैन धर्म की परंपराओं और आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन मूल्यों से परिचित कराने का अवसर भी बनेगा।
सकल जैन समाज से सहभागिता की अपील
मुनि सेवा समिति, अलीगढ़ ने सकल जैन समाज से इस महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
समिति ने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष संगम होगा।
श्रद्धालुओं से अभिषेक, शांतिधारा, महामंडल विधान, प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और बग्घी यात्रा में सहभागिता करने का आग्रह किया गया है।
अलीगढ़ में 26 अक्टूबर को आयोजित होने वाला आचार्य विद्यासागर महामंडल विधान जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। लगभग 400 इंद्र-इंद्राणियों की सहभागिता, हस्तकरघा निर्मित वस्त्रों में धार्मिक अनुष्ठान, 108 दीपकों की महाआरती, भगवान नेमीनाथ के वैराग्य पर आधारित नाटक और भव्य बग्घी यात्रा इस आयोजन को विशेष बनाएंगे। आयोजकों को उम्मीद है कि यह महोत्सव आचार्य विद्यासागर महाराज के त्याग, तप और आध्यात्मिक आदर्शों का संदेश व्यापक समाज तक पहुंचाएगा।