UP MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर मतदान संपन्न, 152 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला 27 अक्टूबर को
पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक हुई वोटिंग, चंदौली में शिक्षक सीट पर 71.70 प्रतिशत मतदान
लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान संपन्न हो गया। प्रदेश के पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान हुआ। इस चुनाव में कुल 152 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनकी चुनावी किस्मत अब मतपेटियों में बंद हो गई है। मतदान समाप्त होने के बाद सभी की नजरें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की इन 11 सीटों के लिए हुए मतदान को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के समर्थित प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला किया। हालांकि, वास्तविक परिणाम मतगणना पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ मतदान
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 के अंतर्गत कुल 11 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान कराया गया। इनमें पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
- लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
- वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
- आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
- मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
- इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ और वाराणसी सहित कुल छह सीटों पर मतदान कराया गया। इन सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पात्र शिक्षक मतदाताओं ने अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए वोट डाले।
इन चुनावों में सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग मतदाता व्यवस्था लागू होती है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता रखने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र और पंजीकृत शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनते हैं।
152 प्रत्याशियों के बीच चुनावी मुकाबला
इस बार विधान परिषद की 11 सीटों के लिए कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे हैं। मतदान समाप्त होने के साथ ही सभी उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य मतगणना पर निर्भर हो गया है।
इन चुनावों में राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी भी मुकाबले को महत्वपूर्ण बनाती है। विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों ने स्नातकों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच अपनी बात रखी।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याएं, शिक्षा व्यवस्था और प्रतिनिधित्व जैसे विषय महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षित युवाओं, रोजगार और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे चर्चा का विषय रहते हैं।
चंदौली में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 71.70 प्रतिशत मतदान
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के दौरान चंदौली जिले से मतदान के आंकड़े भी सामने आए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदौली में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 43.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 71.70 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की तुलना में अधिक मतदान दर्ज किया गया।
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक की निगरानी में जिले की चुनावी व्यवस्थाओं पर प्रशासन की नजर रही।
हालांकि, पूरे प्रदेश की सभी 11 सीटों का अंतिम और समेकित मतदान प्रतिशत आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
भाजपा और सपा के लिए महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबला
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
दोनों दलों के लिए विधान परिषद में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना महत्वपूर्ण है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम राजनीतिक दलों के लिए शिक्षित मतदाताओं और शिक्षक समुदाय के बीच अपने समर्थन का आकलन करने का अवसर भी होते हैं।
हालांकि, इन निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता संरचना सामान्य विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से अलग होती है। इसलिए इनके परिणामों को सीधे विधानसभा चुनावों के जनादेश के समान नहीं माना जा सकता।
विधान परिषद के चुनावों में स्थानीय समीकरण, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पहचान और शिक्षक एवं स्नातक संगठनों का समर्थन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आगरा स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर भी नजर
आगरा खंड के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी मतदान को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में रहीं।
औरैया जिले के अजीतमल में मतदान के दौरान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शिक्षक निर्वाचन के बूथ संख्या 139 और स्नातक निर्वाचन के बूथ संख्या 223 पर बूथ कैप्चरिंग तथा मारपीट के आरोप लगाए।
इन आरोपों को लेकर सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मामले की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी बृजेश कुमार और पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया।
वहीं, भाजपा जिला उपाध्यक्ष सौरभ भूषण शर्मा ने समाजवादी पार्टी पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को सपा से निष्पक्षता का प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, अजीतमल में लगाए गए बूथ कैप्चरिंग और मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित प्रशासनिक जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
विधान परिषद चुनाव क्यों होते हैं महत्वपूर्ण?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। विधानसभा के विपरीत विधान परिषद एक स्थायी सदन है, जिसे भंग नहीं किया जाता।
विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल सामान्यतः छह वर्ष का होता है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय-समय पर सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने पर चुनाव कराए जाते हैं।
विधान परिषद में विभिन्न श्रेणियों के माध्यम से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। इनमें स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, विधानसभा सदस्यों द्वारा निर्वाचन तथा राज्यपाल द्वारा मनोनयन की व्यवस्था शामिल है।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इनके माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त मतदाताओं और शिक्षक समुदाय को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिलता है।
मतगणना 27 अक्टूबर को, परिणामों का इंतजार
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सभी 11 सीटों के लिए मतदान संपन्न होने के बाद अब मतगणना की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित हो गया है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को मतों की गिनती की जाएगी। इसके बाद अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणाम सामने आएंगे।
विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अधिमान्य मतदान प्रणाली के अंतर्गत मतों की गणना की जाती है। इसमें मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता देते हैं। इस कारण मतगणना की प्रक्रिया सामान्य बहुमत आधारित चुनावों से अलग हो सकती है।
अंतिम परिणाम निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही मान्य होंगे।
चुनाव परिणामों से स्पष्ट होगी राजनीतिक तस्वीर
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 में मतदान पूरा होने के बाद राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नजर अब 27 अक्टूबर पर है।
इन 11 सीटों के परिणामों से यह स्पष्ट होगा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में किन उम्मीदवारों को मतदाताओं का समर्थन मिला है।
भाजपा और समाजवादी पार्टी के लिए भी चुनाव परिणाम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे। वहीं, निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल प्रदेश में 152 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला मतदाताओं ने कर दिया है। अब 27 अक्टूबर की मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन 11 सीटों पर किन उम्मीदवारों को जीत हासिल होती है।