MLC चुनाव 2026: यूपी-बिहार समेत चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान, मोकामा में समर्थकों के बीच झड़प
उपशीर्षक: उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए वोटिंग; उरई में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने डाला वोट, भाजपा की जीत का किया दावा
नई दिल्ली/लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान जारी है। इन सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर रहे हैं। चार राज्यों में चल रहे इस चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इस बीच बिहार के मोकामा में उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच झड़प की खबर सामने आई है, जबकि उत्तर प्रदेश के उरई में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मतदान कर भारतीय जनता पार्टी की जीत का दावा किया है।
विधान परिषद के इन चुनावों में शिक्षकों, स्नातकों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मतदान के दौरान अलग-अलग राज्यों से राजनीतिक बयान और चुनावी गतिविधियों की खबरें सामने आ रही हैं।
उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सीटों पर मतदान हो रहा है, जिनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। यहां कुल 152 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
चार राज्यों की 28 सीटों पर चुनावी मुकाबला
उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए मतदान कराया जा रहा है।
ये चुनाव सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग हैं। इनमें स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं।
इन सीटों से चुने जाने वाले प्रतिनिधि संबंधित राज्य की विधान परिषद में पहुंचते हैं।
विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है। इसके सदस्य कानून निर्माण, सरकारी नीतियों पर चर्चा और विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों को उठाने में भूमिका निभाते हैं।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ शिक्षा, रोजगार और शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
बिहार के मोकामा में समर्थकों के बीच झड़प
बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान मोकामा से उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच झड़प की खबर सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनंत समर्थित उम्मीदवार और उनके प्रतिद्वंद्वी पक्ष से जुड़े समर्थकों के बीच विवाद की स्थिति बनी।
अनुज और नीरज के समर्थकों के बीच टकराव की बात सामने आने के बाद चुनावी माहौल में तनाव की खबरें चर्चा में आ गईं।
हालांकि, इस घटना में घायल व्यक्तियों की संख्या, पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे और किसी गिरफ्तारी के संबंध में उपलब्ध जानकारी स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित पुलिस और निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जा सकेगी।
मतदान के दौरान समर्थकों के बीच विवाद की घटनाएं चुनावी व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती को सामने लाती हैं।
उरई में स्वतंत्र देव सिंह ने किया मतदान
उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने उरई में विधान परिषद चुनाव के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
मतदान करने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की जीत का दावा किया।
स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी एकतरफा चुनाव जीतेगी।
इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी राजनीतिक निशाना साधा।
उनका बयान चुनाव के दौरान भाजपा के आत्मविश्वास को दर्शाता है। हालांकि, किसी भी दल की जीत या हार का वास्तविक फैसला मतगणना के बाद ही होगा।
उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर 152 प्रत्याशी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर इस बार कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
इनमें पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
प्रदेश में कुल 14,81,310 पंजीकृत मतदाता इन चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर प्रदेश के शेष 72 जिलों में मतदान की व्यवस्था की गई है।
इतने बड़े क्षेत्र में होने वाले चुनाव को देखते हुए निर्वाचन प्रक्रिया के सुचारु संचालन और मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाओं का महत्व बढ़ जाता है।
यूपी के छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान
उत्तर प्रदेश में जिन छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान हो रहा है, उनमें शामिल हैं:
- लखनऊ डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
- वाराणसी डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
- आगरा डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
- मेरठ डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
- बरेली-मुरादाबाद डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
- गोरखपुर-फैजाबाद डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
इन क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता के अनुसार पंजीकृत शिक्षक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर रहे हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में शिक्षकों की सेवा शर्तें, पेंशन, वेतन, पदोन्नति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
विभिन्न शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों की भी इन सीटों पर नजर बनी हुई है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी मुकाबला
उत्तर प्रदेश की पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर भी मतदान हो रहा है।
इन निर्वाचन क्षेत्रों में पात्रता संबंधी शर्तें पूरी करने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है।
हालांकि, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधि केवल स्नातकों के मुद्दों तक सीमित नहीं होते। विधान परिषद के सदस्य के रूप में वे व्यापक विधायी और जनहित संबंधी विषयों पर भी अपनी भूमिका निभाते हैं।
शिक्षक और स्नातक चुनावों में अलग होती है मतदान प्रक्रिया
विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदान प्रक्रिया सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होती है।
इन चुनावों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत एकल संक्रमणीय मत पद्धति अपनाई जाती है।
इस प्रणाली में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता देते हैं।
मतपत्र पर वरीयता दर्ज करने के लिए निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना आवश्यक होता है।
गलत तरीके से वरीयता दर्ज किए जाने पर मत की वैधता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए मतदान केंद्रों पर उपलब्ध आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही मतदान किया जाना चाहिए।
राजनीतिक दलों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं विधान परिषद चुनाव?
विधान परिषद के चुनाव राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विधान परिषद के सदस्य विधायी कार्यों, सरकारी प्रस्तावों और सार्वजनिक नीतियों पर चर्चा में भाग लेते हैं।
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय संगठनों और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पहचान का भी प्रभाव हो सकता है।
इन चुनावों के परिणाम संबंधित राज्यों के उच्च सदनों में राजनीतिक दलों और अन्य समूहों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी चुनावी माहौल को चर्चा में बनाए हुए है।
हालांकि, किसी पार्टी के दावे को चुनाव परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बिहार में मोकामा की घटना ने खींचा ध्यान
चार राज्यों में मतदान के बीच बिहार के मोकामा में समर्थकों के बीच हुई कथित झड़प ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है।
चुनावी मुकाबले में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन समर्थकों के बीच हिंसा या टकराव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है।
चुनाव के दौरान सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे कानून का पालन करें और मतदाताओं को शांतिपूर्ण वातावरण में मतदान करने दें।
मोकामा की घटना के संबंध में पुलिस और प्रशासन की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
मतदान प्रतिशत और परिणामों पर रहेगी नजर
उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान के बाद राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजर मतदान प्रतिशत तथा मतगणना पर रहेगी।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है।
वरीयता आधारित मतदान प्रणाली के कारण इन चुनावों में मतगणना की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से अलग होती है।
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन उम्मीदवारों को संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों से विधान परिषद में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है।
चार राज्यों के चुनाव पर देशभर की नजर
चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर 152 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। वहीं बिहार में मोकामा से समर्थकों की झड़प की खबर सामने आई है।
उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने उरई में मतदान कर भाजपा की जीत का दावा किया है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं।
फिलहाल चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए मतदान जारी है। सभी की नजर मतदान प्रक्रिया के शांतिपूर्ण संचालन, मतदाताओं की भागीदारी और चुनाव परिणामों पर बनी हुई है।