मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली के विरोध में इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन
मैनपुरी। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में गुरुवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मैनपुरी में जोरदार प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय से निकाला गया पैदल मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जेल चौराहा और कलेक्ट्रेट पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जेल चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला भी फूंका।
प्रदर्शन में पूर्व विधायक राजकुमार यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ, किशनी विधायक बृजेश कठेरिया, सपा जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य, सतीश यादव समेत इंडिया गठबंधन के कई नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे। नेताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने अथवा उनके इस्तीफे की मांग की।
मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों के कारण आम मतदाताओं में असमंजस की स्थिति पैदा हुई है।
गठबंधन नेताओं ने मतदाता सूची से जुड़े मामलों और एफआईआर के मुद्दे को भी प्रदर्शन के दौरान प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के मामलों की जांच कराने और प्रभावित पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने की मांग की।
18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के नाम जोड़ने की मांग
सपा जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर देशभर में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के नाम बीएलओ के माध्यम से फॉर्म-6 भरवाकर मतदाता सूची में शामिल किए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इससे पहले मैनपुरी में गठबंधन ने लोकतंत्र बचाओ सप्ताह के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में पात्र नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से संबंधित शिकायतों की जांच और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।