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सऊदी अरब हूती तनाव: पाकिस्तानी मौलाना बोले- यह शिया-सुन्नी की जंग नहीं

By aonenewstv | Published: Sep 30, 2026 03:49 AM

सऊदी अरब-हूती तनाव: पाकिस्तानी मौलाना ताहिर अशरफी बोले- यह शिया-सुन्नी की जंग नहीं

नई दिल्ली: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के प्रमुख मौलाना हाफिज मुहम्मद ताहिर अशरफी का बयान चर्चा में है। मदीनाह स्थित इस्लामिक यूनिवर्सिटी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अशरफी ने हूतियों को आतंकवादी बताते हुए कहा कि उनका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सऊदी अरब की सुरक्षा को पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

‘यह शिया और सुन्नी के बीच की जंग नहीं’

ताहिर अशरफी ने अपने संबोधन में कहा कि सऊदी अरब और हूतियों के बीच चल रहा संघर्ष शिया और सुन्नी समुदायों के बीच धार्मिक युद्ध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने हूतियों को आतंकवादी बताया और कहा कि उनके पीछे ऐसे तत्व हैं जिन्हें वह मुस्लिम समुदाय के हितों का विरोधी मानते हैं।

अशरफी ने सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि मक्का और मदीना समेत इस्लाम के पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान का रुख स्पष्ट है। उन्होंने मुस्लिम देशों के बीच एकता और संयम की जरूरत पर भी जोर दिया।

‘सऊदी अरब की सुरक्षा रेड लाइन’

पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के प्रमुख ने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा पाकिस्तान के लिए रेड लाइन है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की जनता और नेतृत्व सऊदी अरब की सुरक्षा के समर्थन में दृढ़ हैं। सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का खतरा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच हमलों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक हूती समूह ने सऊदी क्षेत्र की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जबकि सऊदी अरब की ओर से भी जवाबी सैन्य कार्रवाई की गई है।

पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब के समर्थन की बात कही

ताहिर अशरफी का बयान पाकिस्तान सरकार के हालिया रुख की पृष्ठभूमि में भी आया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 29 सितंबर को कहा कि नए आपसी रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि पाकिस्तानी सेना ने हूतियों के खिलाफ किसी हवाई हमले में हिस्सा लिया है या नहीं।

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच अगस्त 2026 में एक पारस्परिक रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत तीनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का ढांचा तैयार किया है।

मुस्लिम देशों में एकता पर जोर

इस बीच पाकिस्तान के धार्मिक विद्वानों ने भी सऊदी अरब के पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। पाकिस्तान उलेमा काउंसिल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मक्का और मदीना की सुरक्षा पूरे मुस्लिम जगत के लिए साझा चिंता का विषय है। साथ ही धार्मिक नेताओं ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए प्रयास करने की अपील की थी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी पहले कहा है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीति जरूरी है। मंत्रालय ने बाब-अल-मंदेब की स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए हूतियों से अपनी गतिविधियां रोकने की अपील की थी।

ताहिर अशरफी के पुराने बयानों का भी जिक्र

ताहिर अशरफी के मौजूदा बयान के साथ उनके पुराने बयानों को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 2007 में अशरफी और पाकिस्तान उलेमा काउंसिल की ओर से ओसामा बिन लादेन को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां की गई थीं। हालांकि, ऐसे पुराने दावों को मौजूदा बयान से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए और संबंधित मूल रिकॉर्ड के आधार पर ही उनका आकलन किया जाना उचित है।

फिलहाल सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव के बीच पाकिस्तान की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक संस्थाओं की ओर से सऊदी अरब के समर्थन के बयान सामने आए हैं। क्षेत्रीय स्थिति तेजी से बदल रही है और आने वाले दिनों में पाकिस्तान की भूमिका तथा सऊदी-हूती संघर्ष की दिशा पर नजर रहेगी।

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