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कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल बिक्री पर कैपिंग, Reliance-BP और Nayara का बड़ा कदम

By aonenewstv | Published: Sep 29, 2026 12:43 PM

कच्चे तेल की कीमत में उछाल का असर, Jio-bp और Nayara ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगाई सीमा

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारत में निजी ईंधन कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर मात्रा संबंधी सीमाएं लगानी शुरू कर दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, Jio-bp और Nayara Energy ने अपने कुछ रिटेल आउटलेट्स पर खास तौर पर डीजल की खरीद सीमित की है। इसका प्रमुख कारण औद्योगिक और बड़े उपभोक्ताओं का सस्ता रिटेल डीजल खरीदने के लिए पेट्रोल पंपों का रुख करना बताया जा रहा है।

Jio-bp में 50 लीटर तक डीजल की सीमा

रिपोर्ट के अनुसार, Jio-bp के कुछ पेट्रोल पंपों पर एक ग्राहक को प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल देने की सीमा लागू की गई है। वहीं Nayara Energy के आउटलेट्स पर लेनदेन की सीमा करीब 70 से 200 लीटर के बीच बताई गई है। इन कदमों का उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और बड़े पैमाने पर खरीद के कारण पैदा हो रहे दबाव को कम करना है।

Jio-bp ने कहा है कि उसके सभी Mobility Stations चालू हैं और पर्याप्त ईंधन स्टॉक उपलब्ध है। कंपनी के मुताबिक, मौजूदा मांग की स्थिति को देखते हुए परिवहन और मोबिलिटी जरूरतों के लिए ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपाय किए जा रहे हैं।

रिटेल और थोक डीजल के दाम में बड़ा अंतर

रिपोर्ट में बताया गया है कि रिटेल और थोक डीजल की कीमतों के बीच अंतर करीब 40 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसी वजह से फैक्ट्रियां, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, टेलीकॉम कंपनियां, होटल, मॉल, डेटा सेंटर और अस्पताल जैसे बड़े उपभोक्ता रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने लगे हैं।

कुछ औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीदने की जानकारी सामने आई है। इससे पेट्रोल पंपों के स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि प्रत्येक स्टेशन की भंडारण क्षमता सीमित होती है और दोबारा सप्लाई पहुंचने में समय लग सकता है।

मई से रिटेल पेट्रोल-डीजल के दाम में बदलाव नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रिटेल पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई से स्थिर रही हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में इस दौरान तेजी आई है। 28 सितंबर को पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल की रिटेल कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर थी।

इस मूल्य अंतर के चलते बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए रिटेल पंप से डीजल खरीदना थोक बाजार की तुलना में सस्ता पड़ रहा है। इससे निजी ईंधन कंपनियों के रिटेल नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पैदा हुआ है।

सरकारी तेल कंपनियां भी लगा सकती हैं सीमा

रिपोर्टों के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) भी डीजल की खरीद पर मात्रा संबंधी प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और उसकी शर्तें अलग-अलग कंपनियों पर निर्भर करेंगी।

देश में सरकारी तेल कंपनियों का रिटेल नेटवर्क काफी बड़ा है। ऐसे में यदि बड़े उपभोक्ता लगातार रिटेल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदते रहे, तो सामान्य वाहन चालकों के लिए पेट्रोल पंपों पर उपलब्धता बनाए रखना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है।

कच्चे तेल की कीमत में तेजी क्यों?

वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता ने तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है। 29 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 104.74 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 91.83 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। हालांकि दिन के कारोबार में दोनों बेंचमार्क में कुछ गिरावट दर्ज हुई, लेकिन सितंबर में अब तक ब्रेंट में करीब 16 प्रतिशत और WTI में करीब 7 प्रतिशत की बढ़त बताई गई है।

भारत के लिए आयातित कच्चे तेल की लागत पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ माल ढुलाई, बीमा और क्षेत्रीय सप्लाई बाधाओं का भी असर पड़ता है। हालिया रिपोर्ट में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क से काफी ऊपर रहने की बात भी सामने आई है।

फिलहाल आम वाहन चालकों पर सीधा असर नहीं

Jio-bp और Nayara द्वारा लगाई गई सीमाएं मुख्य रूप से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदने वाले ग्राहकों को प्रभावित कर रही हैं। कंपनियों की ओर से यह कदम पेट्रोल पंपों पर ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और बड़े पैमाने पर खरीद को नियंत्रित करने के लिए बताया गया है। इसलिए सामान्य मात्रा में पेट्रोल या डीजल भरवाने वाले वाहन चालकों पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।

हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रिटेल तथा थोक ईंधन कीमतों के बीच अंतर लंबे समय तक बना रहता है, तो पेट्रोल पंपों पर मांग और आपूर्ति का दबाव आगे भी बढ़ सकता है।

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