छोटेलाल वर्मा अंतिम विदाई: चार बार के विधायक पंचतत्व में विलीन, फतेहाबाद में उमड़ा जनसैलाब
आगरा की फतेहाबाद विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे छोटेलाल वर्मा को शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। उनके पैतृक गांव नगला देवहंस में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, समर्थक, भाजपा नेता और अन्य राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। अंतिम संस्कार से पहले उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।
शहीद नगर से निकली अंतिम यात्रा
शुक्रवार सुबह आगरा स्थित आवास से छोटेलाल वर्मा की अंतिम यात्रा शुरू हुई। करीब 11 बजे उनके पार्थिव शरीर को रथ में रखकर पैतृक गांव नगला देवहंस के लिए रवाना किया गया। रास्ते में कई जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। घरों की छतों से भी महिलाओं ने पुष्पवर्षा की और कई लोग भावुक नजर आए।
जैसे-जैसे अंतिम यात्रा आगे बढ़ी, इसमें शामिल लोगों की संख्या बढ़ती चली गई। पैतृक गांव पहुंचने तक बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक जमा हो चुके थे। एक स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 12 से 15 हजार लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
गांव में उमड़ी भीड़, कई घंटे प्रभावित रहा यातायात
छोटेलाल वर्मा का पार्थिव शरीर नगला देवहंस पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। भारी भीड़ के कारण गांव और आसपास के रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस को वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
गांव में मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा के दौरान माहौल भावुक रहा और कई समर्थक उन्हें याद करते हुए रोते नजर आए।
पुलिस गार्द की सलामी के बाद अंतिम संस्कार
पैतृक गांव में अंतिम संस्कार की तैयारी की गई थी। पुलिस गार्द की सलामी के बाद छोटेलाल वर्मा के सबसे छोटे बेटे महेंद्र वर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। इसके साथ ही चार बार विधायक रहे छोटेलाल वर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए।
अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।
सांसद राजकुमार चाहर समेत कई नेता पहुंचे
छोटेलाल वर्मा की अंतिम यात्रा और अंतिम दर्शन में फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर, पूर्व मंत्री रामसकल गुर्जर, पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय, पूर्व विधायक और भाजपा के कई पदाधिकारी समेत क्षेत्र के जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
सांसद राजकुमार चाहर अंतिम यात्रा के दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने छोटेलाल वर्मा के निधन को व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना एक बाजू खो दिया है। उन्होंने वर्मा को जमीन से जुड़ा नेता बताया और कहा कि अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ उनके जनसंपर्क और क्षेत्र में उनकी पकड़ को दिखाती है।
73 साल की उम्र में हुआ निधन
छोटेलाल वर्मा का गुरुवार शाम नोएडा के एक अस्पताल में निधन हुआ था। वह 73 वर्ष के थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें पिछले कुछ दिनों से बुखार था और तबीयत बिगड़ने के बाद आगरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उन्हें दिल्ली ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में स्थिति बिगड़ने पर उन्हें नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
उनके निधन की खबर के बाद फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
चार बार विधायक रहे छोटेलाल वर्मा
छोटेलाल वर्मा ने फतेहाबाद की राजनीति में लंबा सफर तय किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वह 1993 और 2002 में भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए। 2012 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता और 2022 में भाजपा के टिकट पर एक बार फिर फतेहाबाद से विधानसभा पहुंचे। इस तरह वह चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक रहे।
उनका जन्म 7 जुलाई 1953 को आगरा के नगला देवहंस में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वह कृषि और कारोबार से जुड़े रहे। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और फतेहाबाद क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
क्षेत्र की राजनीति में लंबा रहा प्रभाव
छोटेलाल वर्मा का राजनीतिक सफर केवल विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं रहा। उन्हें प्रदेश स्तर पर भी जिम्मेदारियां मिलीं। 2008 में उन्हें रामगंगा कमांड परियोजना से जुड़ी जिम्मेदारी मिली थी, जबकि 2009 में उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य एकीकरण परिषद का अध्यक्ष बनाया गया था।
फतेहाबाद क्षेत्र में उनके निधन के बाद समर्थकों और कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है। अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और अलग-अलग वर्गों के लोगों की मौजूदगी उनके लंबे राजनीतिक सफर की स्थानीय छाप को दर्शाती रही।
अब राजनीतिक विरासत पर नजर
छोटेलाल वर्मा के निधन के साथ फतेहाबाद विधानसभा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर भाजपा के सामने संगठन और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर नई परिस्थितियां बनेंगी। हालांकि आगे की राजनीतिक दिशा और नेतृत्व को लेकर पार्टी का आधिकारिक फैसला महत्वपूर्ण होगा।