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पेट्रोल पंप कैलिब्रेशन: 10 लीटर के नाम पर कम तेल तो ऐसे पकड़ें गड़बड़ी

By yogesh jindoria | Published: Sep 18, 2026 12:15 PM

पेट्रोल पंप पर मशीन में 10 लीटर दर्ज होने और डिस्प्ले पर भी 10 लीटर दिखने से आमतौर पर ग्राहक मान लेता है कि उसे पूरी मात्रा में पेट्रोल या डीजल मिला है। लेकिन मशीन की कैलिब्रेशन में गड़बड़ी होने पर डिस्प्ले पर दिखाई गई मात्रा और वास्तव में निकलने वाले ईंधन में अंतर हो सकता है। कर्नाटक में हालिया जांच के दौरान ऐसे ही मामलों में कई पेट्रोल पंपों पर कार्रवाई की गई है।

805 पेट्रोल पंपों की जांच, 101 पर केस

कर्नाटक के लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने ‘मिशन निखरा’ के तहत राज्यभर में 805 पेट्रोल और डीजल पंपों की जांच की। इनमें 101 पंप ऐसे मिले, जहां ईंधन की मात्रा में निर्धारित सीमा से अधिक अंतर पाया गया। इन पंपों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए और कुल 6.66 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

जांच में 768 पंपों के डिस्पेंसिंग सिस्टम को दोबारा कैलिब्रेशन की जरूरत पाई गई। अधिकारियों के मुताबिक, जांच किए गए नोजल में बड़ी संख्या में ईंधन की मात्रा में अंतर दर्ज किया गया और कम ईंधन मिलने के मामले ज्यादा सामने आए।

क्या होता है पेट्रोल पंप कैलिब्रेशन?

कैलिब्रेशन का मतलब यह जांचना है कि पेट्रोल पंप की मशीन जितनी मात्रा डिस्प्ले पर दिखा रही है, वास्तव में उतना ही पेट्रोल या डीजल ग्राहक को मिल रहा है या नहीं। उदाहरण के लिए, अगर डिस्प्ले पर 10 लीटर दिख रहा है तो माप की जांच में यह सुनिश्चित किया जाता है कि मशीन से निर्धारित मानक के मुताबिक 10 लीटर ही ईंधन निकले।

समय के साथ मशीन के तकनीकी हिस्सों में बदलाव या खराबी के कारण माप में अंतर आ सकता है। इसी वजह से डिस्पेंसिंग यूनिट की नियमित जांच और वेरिफिकेशन किया जाता है।

कितनी कमी को माना जाता है गड़बड़ी?

कर्नाटक की हालिया कार्रवाई में 10 लीटर ईंधन पर 50 मिलीलीटर तक के अंतर को अनुमत सीमा के तौर पर बताया गया। इससे अधिक अंतर पाए जाने पर कार्रवाई की गई। 805 पंपों की जांच में 101 ऐसे पंप मिले जिनमें त्रुटि इस सीमा से अधिक थी।

इसलिए हर छोटी मात्रा के अंतर को अपने आप में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। कार्रवाई निर्धारित कानूनी और तकनीकी सहनशीलता सीमा से अधिक अंतर मिलने पर होती है।

ग्राहक खुद कैसे करा सकता है जांच?

अगर आपको लगता है कि पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है, तो आप मशीन की मात्रा की जांच कराने के लिए निर्धारित माप से सत्यापन की मांग कर सकते हैं। पेट्रोल पंप पर आम तौर पर प्रमाणित माप उपकरण के जरिए यह देखा जा सकता है कि मशीन से निकली मात्रा डिस्प्ले पर दिखाई गई मात्रा के अनुरूप है या नहीं।

कर्नाटक सरकार ने भी पेट्रोल पंपों पर कैलिब्रेशन और वेरिफिकेशन से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित करने तथा ग्राहकों को मात्रा पर संदेह होने पर जांच की सुविधा देने की बात कही है।

पेट्रोल पंप की कैलिब्रेशन अवधि पर भी सवाल

कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने पेट्रोल पंपों की अनिवार्य वेरिफिकेशन अवधि को 12 महीने से बढ़ाकर 24 महीने किए जाने पर चिंता जताई है। राज्य सरकार ने वार्षिक कैलिब्रेशन की व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की है।

कर्नाटक सरकार के मुताबिक, राज्य में पेट्रोल-डीजल के हजारों पंप हैं और विभाग आगे भी बाकी पंपों की जांच करेगा। उपभोक्ताओं के हित में पंपों की जांच, वेरिफिकेशन और कैलिब्रेशन की जानकारी सार्वजनिक करने की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।

ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि अगर पेट्रोल या डीजल की मात्रा को लेकर संदेह हो तो तुरंत शिकायत करने के साथ मशीन की माप की जांच कराने की मांग करें। इससे डिस्प्ले पर दिखाई गई मात्रा और वास्तविक डिलीवरी के बीच किसी संभावित अंतर का पता लगाया जा सकता है।

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