उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के खिलाफ अपने चुनावी नैरेटिव को धार देने के लिए नई रणनीति तैयार की है। पार्टी इस बार केवल अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के बजाय 2012-2017 के सपा शासन और 2017 के बाद के बीजेपी शासन का तुलनात्मक रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखने की तैयारी में है।
बीजेपी की कोशिश चुनावी बहस को इस सवाल के इर्द-गिर्द केंद्रित करने की है कि ‘सपा से बेहतर बीजेपी क्यों?’ और उत्तर प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुशासन कौन दे सकता है। पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले झटकों से सबक लेते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने संगठन और चुनावी संदेश को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है।
‘तब बनाम अब’ पर रहेगा बीजेपी का फोकस
बीजेपी की रणनीति में ‘तब बनाम अब’ फॉर्मूला अहम भूमिका निभाएगा। इसके तहत कानून-व्यवस्था, माफियाओं पर कार्रवाई, महिला सुरक्षा, बिजली आपूर्ति और गरीब कल्याण योजनाओं जैसे मुद्दों पर दोनों सरकारों के कार्यकाल की तुलना की जाएगी।
पार्टी हत्या, लूट, डकैती, दंगे, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट के तहत हुई कार्रवाई से जुड़े आंकड़ों को सामने रखने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही संपत्ति कुर्की और अदालतों में सजा की दर यानी कन्विक्शन रेट से जुड़े आंकड़ों को भी चुनावी अभियान में इस्तेमाल किया जाएगा।
महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन, मिशन शक्ति और गरीब कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के आंकड़ों की भी तुलना सपा सरकार के कार्यकाल से किए जाने की योजना है। बीजेपी इन आंकड़ों के जरिए अपने शासन को बेहतर साबित करने की कोशिश करेगी।
तीन मोर्चों पर चलेगा बीजेपी का अभियान
बीजेपी अपनी रणनीति को तीन प्रमुख स्तरों पर जमीन पर उतारने की तैयारी कर रही है।
पहला- डाटा कैंपेन: पार्टी आकर्षक ग्राफिक्स और प्रमाणिक रिपोर्ट कार्ड के जरिए सपा शासन की कमियों और बीजेपी सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखेगी।
दूसरा- ग्राउंड कैंपेन: बूथ स्तर पर अभियान चलाकर सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधा संपर्क साधा जाएगा। पार्टी का प्रयास होगा कि योजनाओं का लाभ पाने वाले लोगों तक संगठन के कार्यकर्ता सीधे पहुंचें।
तीसरा- सोशल कोएलिशन कैंपेन: बीजेपी अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने के लिए विशेष अभियान चलाएगी। इसका मकसद चुनावी समीकरणों को मजबूत करना और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाना है।
सपा के PDA नैरेटिव का जवाब देने की तैयारी
समाजवादी पार्टी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA नैरेटिव के मुकाबले बीजेपी सामाजिक समीकरणों पर भी खास ध्यान दे रही है। पार्टी गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित, सवर्ण और छोटे सामाजिक वर्गों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
बीजेपी का संदेश यह रखने की कोशिश है कि सरकारी योजनाओं का लाभ किसी खास जाति के आधार पर नहीं, बल्कि जरूरत के आधार पर दिया गया। पार्टी इसी मुद्दे को अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है।
2027 के लिए अभी से तेज हुई तैयारी
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों वाले चुनाव को लेकर बीजेपी, सपा समेत तमाम दल अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं। बीजेपी जहां अपने शासन की उपलब्धियों को मुद्दा बनाने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी दल सरकार के खिलाफ अपने मुद्दों को मजबूत करने में लगे हैं।
ऐसे में 2027 के चुनाव में विकास, कानून-व्यवस्था, सामाजिक समीकरण और सरकार की योजनाओं के साथ-साथ ‘तब बनाम अब’ की राजनीतिक बहस भी अहम भूमिका निभा सकती है। बीजेपी का ताजा प्लान इसी बहस को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।