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राजस्थान निकाय चुनाव बीजेपी प्रदर्शन: भजनलाल-वसुंधरा के गढ़ में कमजोर नतीजे, बड़े नेताओं की साख पर सवाल

By aonenewstv | Published: Sep 15, 2026 06:02 AM

राजस्थान निकाय चुनाव बीजेपी प्रदर्शन: भजनलाल-वसुंधरा के गढ़ में कमजोर नतीजे, बड़े नेताओं की साख पर सवाल

राजस्थान में हुए नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कई नगर निगमों में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ बड़े नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी अपेक्षा के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। यही वजह है कि इन नतीजों को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव समेत बीजेपी के कई बड़े नेताओं की राजनीतिक साख से जोड़कर देखा जा रहा है।

जोधपुर में बराबरी का मुकाबला

100 वार्ड वाले जोधपुर नगर निगम में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने 44-44 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं 11 सीटें अन्य उम्मीदवारों के खाते में गईं। ऐसे में यहां बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय या अन्य पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

जोधपुर का नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बराबरी पर आ गया। चुनाव से पहले बीजेपी की ओर से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन परिणाम ने मुकाबले को पूरी तरह खुला छोड़ दिया।

भजनलाल शर्मा ने झोंकी थी पूरी ताकत

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निकाय चुनाव के प्रचार में पूरी ताकत लगाई थी। दूसरे चरण के चुनाव से पहले उन्होंने जयपुर समेत कई इलाकों में प्रचार किया और विकास, पानी, बिजली तथा कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ने बीजेपी की जीत पर जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और विकसित राजस्थान के संकल्प पर भरोसा जताया है।

हालांकि, जिन इलाकों में पार्टी को अपेक्षित बढ़त नहीं मिली, वहां स्थानीय संगठन और बड़े नेताओं के प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भूपेंद्र यादव के क्षेत्र में भी चुनौती

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के प्रभाव वाले इलाकों में भी बीजेपी को हर जगह अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अलवर नगर निगम में बीजेपी को 28 और कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं। यहां भी बोर्ड गठन के लिए अन्य पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

अलवर का परिणाम बीजेपी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के राजनीतिक प्रभाव वाले इलाकों में गिना जाता है।

वसुंधरा राजे के गढ़ में बीजेपी को झटका

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मजबूत राजनीतिक गढ़ झालावाड़ में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। झालावाड़ नगर परिषद की 45 सीटों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि बीजेपी को यहां बड़ा नुकसान हुआ।

झालावाड़ जिले की आठ निकायों में से चार में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया। इनमें झालावाड़ नगर परिषद के अलावा भवानी मंडी, खानपुर और डग शामिल हैं। बीजेपी झालरापाटन, अकलेरा और मनोहरथाना में जीत दर्ज करने में सफल रही।

बीजेपी ने कुल मिलाकर हासिल की बढ़त

इन स्थानीय झटकों के बावजूद पूरे राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से ज्यादा वार्ड जीते हैं। उपलब्ध नतीजों के अनुसार बीजेपी ने 4,026 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3,438 वार्डों में सफलता मिली। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी 2,436 वार्डों में जीत हासिल की।

10 नगर निगमों की तस्वीर में बीजेपी ने पांच में जीत हासिल की, कांग्रेस एक नगर निगम में सफल रही, जबकि चार नगर निगमों में त्रिशंकु यानी हंग बोर्ड की स्थिति बनी।

चार नगर निगमों में निर्दलीय निर्णायक

जोधपुर, अजमेर, अलवर और पाली नगर निगमों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय और अन्य पार्षद बोर्ड गठन में किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं।

अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों की नजर इन पार्षदों पर है। बोर्ड गठन से पहले राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

आगे क्या होगा?

राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को एक तरफ प्रदेश के कई हिस्सों में बढ़त दी है, तो दूसरी तरफ बड़े नेताओं के प्रभाव वाले कुछ क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल भी खड़े किए हैं। खासकर झालावाड़ और जोधपुर जैसे नतीजे बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

अब देखना होगा कि पार्टी इन स्थानीय चुनावों के नतीजों का किस तरह आकलन करती है और आने वाले समय में संगठन को मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।

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