राजस्थान नगर निगम चुनाव हंग बोर्ड: जोधपुर-अलवर समेत 4 शहरों में किसी को बहुमत नहीं, निर्दलीय निर्णायक
राजस्थान में नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य के 10 नगर निगमों में से जोधपुर, अलवर, अजमेर और पाली में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। चारों नगर निगमों में हंग बोर्ड की स्थिति बन गई है। ऐसे में अब बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बेहद अहम हो गया है।
नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गई हैं। बहुमत का आंकड़ा पूरा करने के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। इसी वजह से हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चार नगर निगमों में निर्दलीय बने किंगमेकर
जोधपुर, अलवर, अजमेर और पाली में किसी एक पार्टी के पास बोर्ड बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में पार्षद नहीं हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों पर दोनों प्रमुख दलों की नजर है।
इन नगर निगमों में बोर्ड बनाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के बाद से ही दोनों खेमे अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
पार्षदों को सुरक्षित रखने की कवायद
हंग बोर्ड की स्थिति के बीच बीजेपी और कांग्रेस ने अपने जीते हुए पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है। राजनीतिक खेमों में यह आशंका है कि बोर्ड गठन से पहले पार्षदों के पाला बदलने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।
इसी के चलते दोनों दल अपने पार्षदों को एक साथ रखने के लिए अलग-अलग रणनीति अपना रहे हैं। कांग्रेस ने भी अपने विजयी प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए हैं।
रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की चर्चा तेज
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की चर्चा शुरू हो गई है। हंग बोर्ड वाले नगर निगमों में पार्षदों को एक साथ रखने के लिए उन्हें शहर से बाहर ले जाने की रणनीति अपनाए जाने की अटकलें हैं।
राजनीतिक दलों की कोशिश है कि बोर्ड गठन तक उनके पार्षद किसी दूसरे खेमे के संपर्क में न आएं। निर्दलीय पार्षदों को लेकर भी दोनों पार्टियों की ओर से संपर्क साधे जाने की संभावना बढ़ गई है।
हॉर्स ट्रेडिंग रोकना बड़ी चुनौती
बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट नहीं होने की वजह से निर्दलीय पार्षदों की अहमियत बढ़ गई है। ऐसे में पार्षदों की खरीद-फरोख्त यानी हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, किसी भी पार्टी की ओर से इस तरह की खरीद-फरोख्त होने की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल दोनों प्रमुख दल अपने पार्षदों को साथ रखने और बोर्ड गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं।
बोर्ड गठन पर टिकी सबकी नजर
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जोधपुर, अलवर, अजमेर और पाली में नगर निगम का बोर्ड किस पार्टी के पक्ष में जाता है। निर्दलीय पार्षदों के रुख से तस्वीर बदल सकती है।
नगर निगमों में बोर्ड गठन के लिए होने वाली आगे की राजनीतिक गतिविधियां राजस्थान की स्थानीय राजनीति के साथ-साथ बीजेपी और कांग्रेस के संगठनात्मक प्रभाव के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।