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सऊदी अरब मिस्र हूती हमले: एमबीएस पहुंचे काहिरा, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब की सुरक्षा पर चर्चा

By yogesh jindoria | Published: Sep 16, 2026 06:54 AM

सऊदी अरब मिस्र हूती हमले: एमबीएस पहुंचे काहिरा, लाल सागर की सुरक्षा पर हुई अहम चर्चा

काहिरा: यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) मिस्र पहुंचे। काहिरा में उन्होंने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात की। बैठक में लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई।

लाल सागर और बाब-अल-मंदेब पर फोकस

मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में सुरक्षित एवं निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई। यह इलाका सऊदी अरब के तेल निर्यात और मिस्र के स्वेज नहर व्यापार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

सऊदी अरब ने हूतियों के लगातार हमलों के बीच अपनी सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। हालांकि, बैठक के बाद सऊदी अरब और मिस्र ने यह स्पष्ट नहीं किया कि हूतियों के खिलाफ आगे किस तरह के सैन्य या अन्य कदम उठाए जाएंगे।

यमन में मजबूत हुई हूतियों की स्थिति

हाल के दिनों में यमन के लाल सागर तट पर हूती लड़ाकों ने अपनी स्थिति मजबूत की है। रिपोर्टों के अनुसार, हूतियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाह मोखा और बाब-अल-मंदेब के आसपास के रणनीतिक द्वीपों पर भी कब्जा किया है। इससे समुद्री मार्गों पर उनका प्रभाव बढ़ा है।

बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल और अन्य सामान की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही पर असर डाल सकता है।

सऊदी तेल सप्लाई पर बढ़ा दबाव

हूती हमलों के कारण सऊदी अरब के लाल सागर से होने वाले तेल निर्यात पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमले के बाद तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है।

सऊदी अरब के लिए स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के रास्ते से उसके तेल की एशियाई बाजारों तक पहुंच जुड़ी हुई है।

मिस्र के लिए भी अहम है समुद्री मार्ग

हूती हमलों का असर केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। लाल सागर में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से मिस्र के स्वेज नहर कारोबार पर भी असर पड़ सकता है। स्वेज नहर वैश्विक समुद्री व्यापार का प्रमुख मार्ग है और मिस्र के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है।

इसी वजह से काहिरा और रियाद दोनों के लिए लाल सागर में समुद्री सुरक्षा बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सैन्य मदद पर अभी स्थिति साफ नहीं

सऊदी क्राउन प्रिंस की मिस्र यात्रा के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री आवाजाही पर सहमति सामने आई है, लेकिन मिस्र की ओर से सऊदी अरब को सीधे सैन्य सहायता देने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, मिस्र की भूमिका फिलहाल राजनीतिक और क्षेत्रीय समर्थन तक सीमित रहने की संभावना बताई जा रही है।

इस बीच हूती हमलों और सऊदी प्रतिक्रिया के चलते यमन तथा लाल सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में सऊदी अरब और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।

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